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सम्पादकीय

जितिन प्रसाद इफेक्ट, सचिन भी दिल्ली तलब, क्या फाइनल सौदेबाजी के मूड में हैं पायलट?

Gulabi
11 Jun 2021 9:41 AM GMT
जितिन प्रसाद इफेक्ट, सचिन भी दिल्ली तलब, क्या फाइनल सौदेबाजी के मूड में हैं पायलट?
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जितिन प्रसाद

संयम श्रीवास्तव। उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद (Jitin Prasada) ने जब से पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ज्वॉइन की है उसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि अब इसके बाद कौन सा और कांग्रेसी नेता होगा जो पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकता है. इन नामों में सबसे ऊपर नाम है राजस्थान की राजनीति में बड़ा नाम रखने वाले सचिन पायलट (Sachin Pilot) का, दरअसल सचिन पायलट, ज्योतिरादित्य सिंधिया और जितिन प्रसाद तीनों बहुत अच्छे दोस्त हैं, इसमें से ज्योतिरादित्य सिंधिया और जितिन प्रसाद ने भारतीय जनता पार्टी ज्वॉइन कर ली है इसलिए अब पूरे कयास लगाए जा रहे हैं कि केंद्रीय नेतृत्व से नाराज सचिन पायलट भी जल्द ही यह कदम उठा सकते हैं. दरअसल राजस्थान के कांग्रेस विधायकों की हलचल कुछ ऐसी ही कहानी कहती है. सचिन पायलट गुट के करीब 6 विधायकों की बातें तो खुलेआम बगावत वाली हैं. इन विधायकों का कहना है कि 10 महीने हो गए पर सुलह कमिटी की ओर से कोई भी रिस्पॉन्स अब तक नहीं मिला है.


दरअसल राजस्थान में जब से कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी है तब से पदों को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच मतभेद होते रहे हैं. इस वक्त राजस्थान कांग्रेस दो गुटों में बटा हुआ है जहां एक गुट सरकार में है, वहीं दूसरा गुट पार्टी में होते हुए भी सरकार में नहीं है. बीते वर्ष नाराजगी इतनी बढ़ गई थी कि अशोक गहलोत की सरकार गिरते-गिरते बची थी. क्योंकि सचिन पायलट अपने समर्थक विधायकों को लेकर पार्टी से बगावत करने पर आमादा थे. लेकिन अहमद पटेल और प्रियंका गांधी ने किसी तरह से मान मन्नउल करके सचिन पायलट को फिर से पार्टी में शामिल कर लिया था. लेकिन उस वक्त सचिन पायलट से जो वादे किए गए थे उसे अभी तक पूरा नहीं किया गया है, जिसे लेकर अब फिर से सचिन पायलट और उनके समर्थकों की आवाज बुलंद होने लगी है. सचिन पायलट के बीजेपी में शामिल होने का अनुमान कितना ज्यादा लगाया जा रहा है इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि जिस दिन जितिन प्रसाद बीजेपी में शामिल हुए उसके बाद से ही ट्विटर पर सचिन पायलट हैशटैग ट्रेंड करने लगा था.


सचिन पायलट के समर्थन में आए पूर्व केंद्रीय मंत्री और एआईसीसी महासचिव भंवर जितेंद्र सिंह
राजस्थान में गहलोत सरकार से पहले केवल सचिन पायलट का खेमा ही नाराज रहता था, लेकिन अब और भी आवाजें गहलोत के खिलाफ बुलंद होने लगी हैं. इनमें एआईसीसी महासचिव और कांग्रेस सरकार में पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह का भी नाम शामिल हो गया है. जिन्होंने पायलट के समर्थन में बयान दिया है. उन्होंने मीडिया के सामने कहा कि राजस्थान में केंद्रीय नेतृत्व को पार्टी में बढ़ते असंतोष को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. अगर सचिन पायलट से कुछ वादे किए गए थे तो उसे बिल्कुल पूरा किया जाना चाहिए.

सौदा करना चाहते हैं सचिन पायलट
मीडिया के हलकों से खबर आ रही है कि सचिन पायलट प्रियंका गांधी के संपर्क में है और जल्द ही दिल्ली जाकर केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात कर सकते हैं. ऐसा अंदाजा लगाया जा रहा है कि जून के अंत तक गहलोत सरकार के मंत्रिमंडल में विस्तार होगा जिसमें पायलट समर्थक विधायकों को जगह मिलेगी और सचिन पायलट को एआईसीसी में कोई भूमिका मिल सकती है. दरअसल 11 जून को सचिन पायलट के पिता राजेश पायलट की पुण्यतिथि होती है, जिसे हर साल दौंसा में एक सभा आयोजन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है. लेकिन इस बार सचिन पायलट इस जनसभा के जरिए केंद्रीय नेतृत्व को अपना शक्ति प्रदर्शन दिखाने वाले थे. हालांकि प्रियंका गांधी से बात करने के बाद शायद उन्होंने अब इस योजना को छोड़ दिया है.

नाराज विधायक पहुंचे घर
बगावत के बाद सचिन पायलट को मना कर पार्टी के साथ लाते समय जो उनसे वादे किए गए थे उन्हें अब लगभग 10 महीने हो गए हैं, लेकिन उनमें से एक भी पूरा नहीं किया गया है. इसी को लेकर सचिन पायलट खेमे के विधायक उनके घर पहुंच गए और उनसे बातचीत कर नेतृत्व द्वारा अब तक वादों को पूरा ना करने को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की. विधायक वेदप्रकाश सोलंकी, मुकेश भास्कर और रामनिवास गावड़िया ने यह कहते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की कि सुलह के समय जो उनसे राजनीतिक नियुक्तियां और मंत्री मंडल में विस्तार को लेकर कहा गया था उसे अब तक पूरा नहीं किया गया.

इन विधायकों का कहना है कि सभी विधायक सचिन पायलट के साथ अखिरी दम तक खड़े हैं. सचिन पायलट ने इन सबकी सुनी और सिर्फ एक बात कहा कि इंतज़ार करो. यहां इंतज़ार का मतलब बड़ा है, जैसा हमने ऊपर ही बताया है कि वह जल्द प्रियंका गांधी से मिलने वाले हैं ऐसे में इंतज़ार करने का मतलब है कि ऊपर से उन्हें मुद्दों के सुलझने का संकेत मिल रहा है. हालांकि सियासी गलियारों में ये भी बात चल रही है कि केंद्रीय नेतृत्व से मिलने से पहले विधायकों को घर बुला कर मीडिया के सामने अपनी नाराजगी जाहिर करने को सचिन पायलट ने ही कहा होगा, इससे केंद्रीय नेतृत्व पर दबाव बनेगा और पायलट की बात जल्द मान ली जाएगी.


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