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- क्या सुभाष चंद्र बोस...

प्रियदर्शन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिल्कुल सही कहा कि अतीत की भूलों को सुधारना चाहिए. लेकिन अतीत की भूलों को सुधारने का क्या मतलब होता है? क्या किसी नेता की मूर्ति को कहीं लगा देना ही अतीत की भूलों का सुधार है? क्या सुभाष चंद्र बोस इतिहास के ऐसे उपेक्षित चरित्र हैं जिन्हें अब बीजेपी सामने लाने की कृपा कर रही है? आज़ादी की लड़ाई में महात्मा गांधी के अलावा जिन बड़े नेताओं का एक सांस में ज़िक्र होता है, उनमें सुभाषचंद्र बोस, जवाहरलाल नेहरू, भगत सिंह और चंद्रशेखर आज़ाद सबसे ऊपर आते हैं. इस लिहाज से बोस को बीजेपी की कृपा की कोई ज़रूरत नहीं है. यह देश कभी इतना कृतघ्न नहीं रहा कि वह बीजेपी के सत्ता में आए बिना बोस को याद नहीं करता. इस देश में बोस की प्रतिष्ठा इंडिया गेट पर किसी छतरी के नीचे खड़ी मूर्ति की मोहताज नहीं है. उसे इस तरह पेश करना दरअसल सुभाष चंद्र बोस का भी अपमान है और इस देश की साझा स्मृति का भी.





