सम्पादकीय

विरासत के नजरिए से औपनिवेशिक शासन से आजादी तक भारत की यात्रा

nidhi
4 Oct 2026 8:02 AM IST
विरासत के नजरिए से औपनिवेशिक शासन से आजादी तक भारत की यात्रा
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भारत की आज़ादी के 80 साल पूरे होने के मौके पर, श्रुति फ़ाउंडेशन की पहल MOHAR (रामगढ़ में म्यूज़ियम ऑफ़ हेरिटेज एंड आर्ट) ने "राज से स्वराज तक" नाम की एक प्रदर्शनी पेश की। यह प्रदर्शनी शेखावाटी की हवेलियों, चीज़ों और कहानियों के ज़रिए देश के बदलाव को दिखाती है।
इंडिया हैबिटैट सेंटर की विज़ुअल आर्ट्स गैलरी में आठ दिन तक चली इस प्रदर्शनी को श्रुति नाडा पोद्दार ने क्यूरेट किया था और अल्का पांडे इसकी को-क्यूरेटर थीं।
10 अलग-अलग सफ़र के तौर पर आयोजित इस प्रदर्शनी में 1800 और 1900 के दशक में ब्रिटिश राज के समय के भारत और उसके बाद स्वराज के आठ दशकों को दिखाया गया है। इन सफ़रों में कला और डिज़ाइन के असर, मान्यताओं, धार्मिक और लोक कथाओं, ब्रिटिश असर, राजनीतिक कला, आर्किटेक्चर, पहनावे और जीवनशैली को शामिल किया गया है। इसमें शेखावाटी के सेठों द्वारा बनाई गई या जुटाई गई चीज़ों और उन चीज़ों से उनके समय के बारे में क्या पता चलता है, इस पर भी गौर किया गया है।
शेखावाटी को अक्सर अपनी फ़्रेस्को वाली हवेलियों के कारण "राजस्थान की ओपन-एयर आर्ट गैलरी" कहा जाता है। प्रदर्शनी का कहना है कि इन दीवारों में कला और आर्किटेक्चर से कहीं ज़्यादा कुछ है। ये उन लोगों की ज़िंदगी और उनकी दुनिया को आकार देने वाले कई असर को दर्ज करती हैं जिन्होंने इन्हें बनाया था।
इस प्रदर्शनी में MOHAR के म्यूज़ियम कलेक्शन और पोद्दार के बड़े निजी कलेक्शन का इस्तेमाल किया गया। इनमें कला, पांडुलिपियां, टेलीग्राम, अख़बार, चिट्ठियां, नक्शे और ओलियोग्राफ़ शामिल हैं, जिनमें राजा रवि वर्मा का कलेक्शन भी है। साथ ही मैनचेस्टर टेक्सटाइल लेबल, सिक्के, करेंसी, खेल, आज़ादी की लड़ाई की तस्वीरें और दूसरी कलाकृतियां भी दिखाई गई हैं। ये सब मिलकर भारतीय और विदेशी असर के उस मेल को दिखाते हैं जिसने देश को आकार दिया, और आज़ादी की लड़ाई और नए भारत के निर्माण में राजस्थान के व्यापारियों की भूमिका को भी दर्शाते हैं। 23 सितंबर को हुए इसके लॉन्च के मौके पर यूनेस्को के दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय प्रमुख टिम कर्टिस; राजा रवि वर्मा के वंशज राजा राम वर्मा; श्रुति फ़ाउंडेशन की चेयरपर्सन पद्मश्री गुरु शोवना नारायण; पद्मश्री गीता चंद्रन; INTACH के सदस्य सचिव रवींद्र सिंह मौजूद थे। और हेरिटेज ट्रांसपोर्ट म्यूज़ियम के फ़ाउंडर और फ़ाउंडेशन के ट्रस्टी तरुण ठकराल भी मौजूद थे। इस मौके पर “हैंडबुक ऑफ़ हेरिटेज कंज़र्वेशन: स्पेशल फ़ोकस: हवेलिस ऑफ़ शेखावाटी” भी जारी की गई।
केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत मुख्य अतिथि थे। शाम को “शेखावाटी — ऐतिहासिक गौरव से नई ऊंचाइयों तक” विषय पर एक पैनल चर्चा हुई और साथ ही प्रदर्शनी भी देखी गई।
शो के बारे में बात करते हुए पोद्दार ने कहा कि शेखावाटी को लंबे समय से अपनी फ़्रेस्को पेंटिंग के लिए सराहा जाता रहा है, लेकिन इसकी हवेलियों से जुड़ी कहानियों में और भी बहुत कुछ जानने को मिलता है। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी दिखाती है कि इस इलाके के लोगों ने बदलते भारत को कैसे महसूस किया और वह बदलाव उनके घरों, दीवारों और ज़िंदगी में कैसे आया।
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