सम्पादकीय

काश, माननीय प्रधानमंत्री ऐसा कहें…

Subhi
21 Aug 2022 4:36 AM GMT
काश, माननीय प्रधानमंत्री ऐसा कहें…
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भाइयो और बहनो! पचहत्तर साल पहले आज के दिन भारत को जीवन और आजादी मिली थी। हमारे पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के शब्दों में हमने नियति के साथ मुलाकात की, जो पहले से तय होती है।

पी. चिदंबरम; भाइयो और बहनो! पचहत्तर साल पहले आज के दिन भारत को जीवन और आजादी मिली थी। हमारे पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के शब्दों में हमने नियति के साथ मुलाकात की, जो पहले से तय होती है। बाद की सरकारों ने हमारे संविधान को संरक्षित और सुरक्षित रखने, अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा, अपनी अर्थव्यवस्था को तेजी से बढ़ाने और अपने लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार तथा मदद के लिए सर्वोत्कृष्ट काम किया। निश्चित ही इसमें खामियां और नाकामियां भी रहीं, लेकिन जब भी हम लड़खड़ाए और गिरे, अपने को फिर से खड़ा किया और अपनी यात्रा जारी रखी।

लोकतंत्र हमारी गलतियों को सुधारने और नाकामियों से उबारने में सक्षम था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि लोकतंत्र के रास्ते पर दृढ़ता के साथ बढ़ने के अपने संकल्प को हम हर साल इस दिन दोहराते रहे।

लाल किले की प्राचीर से मैंने आपको आठ बार संबोधित किया है। मैंने एक प्रधानमंत्री और एक पार्टी नेता के रूप में अपनी बात कही है। आज मैं एक अलग मुद्दे पर बात करना चाहता हूं। जब मैं आपसे एक सरकार प्रमुख के तौर पर बात करता हूं तो एक साथी-नागरिक के रूप में भी बात करना चाहता हूं, जो आपके दुख-दर्द, चिंताओं, उम्मीदों और आकांक्षाओं को समझ सके और उसे साझा कर सके। जब मैं सच बता रहा हूं जो कुछ मामलों में पीड़ादायक भी है, तो कृपया मेरी बात ध्यान से सुनें।

पिछले आठ सालों में मेरी सरकार ने ऐसी गलतियां की हैं, जिनसे हमारी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है। पहली गलती नोटबंदी थी। मुझे सलाह दी गई थी कि नोटबंदी से कालाधन खत्म हो जाएगा, भ्रष्टाचार में कमी आएगी और आतंकवाद खत्म हो जाएगा। मैंने रिजर्व बैंक के गवर्नर की चेतावनियों पर ध्यान नहीं दिया।

नोटबंदी का एक भी लक्ष्य हासिल नहीं हुआ। इसके उलट, नोटबंदी से वृद्धि दर को धक्का लगा, इस वजह से बड़ी संख्या में रोजगार चले गए और लाखों छोटे उद्यम बंद होते गए।

अगली गलती जीएसटी कानून थे, जो बेहद खराब तरीके से और जल्दबाजी में बनाए गए थे। मैं चाहता तो मुख्य आर्थिक सलाहकार और विपक्षी नेताओं की सलाह मान लेता और संतुलित व एक दर वाला जीएसटी लागू करता।

हमने खुद अपने को एक ऐसे कानून में फंसा पाया, जिसमें केंद्र सरकार को मनमानी शक्तियां दे दी गर्इं, जिसने राज्यों और केंद्र के बीच अविश्वास पैदा कर डाला और जिसने व्यापारी और कारोबारी समुदाय का भारी उत्पीड़न किया और महंगाई को बढ़ा दिया।

मैं महसूस करता हूं कि मैंने शेर की सवारी कर ली है, जिसे छोड़ नहीं सकता। मैं मशहूर अर्थशास्त्रियों और विपक्षी नेताओं से सलाह कर मौजूदा जीएसटी की जगह दूसरा जीएसटी (जीएसटी 2.0) लाना चाहता हूं।

मैंने और भी गलतियां कीं, लेकिन थोड़े विरोध के बाद अपने कदम पीछे खींच लिए। नए भूमि अधिग्रहण कानून को कमजोर करने की कोशिश मैंने कुछ ही दिनों में छोड़ दी थी। इसी तरह, मुझे लगा कि तीनों कृषि कानून बुनियादी रूप से ही गलत थे और मुझे खुशी है कि मैंने उन्हें रद्द कर दिया।

ऐसे ही और भी गलतियां हैं, जो विस्फोटक स्थिति वाली रहीं, जैसे राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर), नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और हाल में घोषित की गई अग्निपथ योजना। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि मैं जल्द ही इनसे भी पीछे हट जाऊंगा, जो देश का ध्रुवीकरण कर रही हैं और टकराव को बढ़ा रही हैं।

मेरे साथी नागरिको! मैं वादा करता हूं कि पूजा-स्थल अधिनियम का दायरा सीमित करने या समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए कुछ हिस्सों से अपने पर पड़ने वाले दबाव के प्रभाव में नहीं आऊंगा। मैं वादा करता हूं कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने के लिए मैं फिर से संविधान संशोधन विधेयक पेश करूंगा।

मैं यह भी वादा करता हूं कि जीएसटी दरें, पेट्रोल और डीजल पर राज्यों के साथ साझा नहीं किए जाने वाले उपकरों और रसोई गैस के दाम घटाने के लिए निर्देश जारी करूंगा।

पूर्व में मेरे मंत्रियों और मैंने उन कई कदमों को लेकर दावे किए हैं, जो मेरी सरकार ने उठाए थे। मैंने हर नागरिक के बैंक खाते में पंद्रह लाख रुपए लाने का वादा किया था। मैंने यह भी कहा था कि हर साल दो करोड़ रोजगार पैदा किए जाएंगे। ये चुनावी जुमले थे। यहीं से मैंने दावा किया था कि 2022 तक किसानों की आय दुगनी हो जाएगी, हर परिवार के पास घर होगा और अर्थव्यवस्था पांच लाख करोड़ डालर के स्तर तक पहुंच जाएगी।

मैं स्वीकार करता हूं कि इन सब पर अभी काम चल रहा है। मैंने यह भी दावा किया था कि भारत खुले में शौच से मुक्त हो जाएगा और हर घर को बिजली मिल जाएगी। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 से यह सामने आया है कि 25.9 फीसद ग्रामीण परिवारों और छह फीसद शहरी परिवारों के पास शौचालय की सुविधा नहीं है।

सर्वे किए गए तीस राज्यों में एक भी खुले में शौच से मुक्त नहीं है। स्मार्ट पावर इंडिया और नीति आयोग ने 2020 में किए एक सर्वे में पाया था कि आबादी का तेरह फीसद हिस्सा या तो बिजली ग्रिड से जुड़ा नहीं था या उसने कभी किसी तरह से बिजली इस्तेमाल नहीं की। मैं वादा करता हूं कि मुख्यमंत्रियों से सलाह-मशविरा कर इन लक्ष्यों को हासिल करने की नई तारीखें तय करूंगा।

मेरी सबसे ज्यादा चिंता बढ़ते सांप्रदायिक विभाजन को लेकर है। कोई भी देश तब तक तरक्की नहीं कर सकता, जब तक कि उसके सारे लोग खासतौर से महिलाएं, दलित, मुसलमान और आदिवासी अपने को सुरक्षित महसूस न करें और तरक्की के लाभ में भागीदार न बनें।

मैं स्वीकार करता हूं कि मेरी पार्टी को अपने पूर्वाग्रहों से छुटकारा पाना है और विभाजनकारी ताकतों को खत्म करने, नफरत फैलाने वालों को सजा देने, भारत की विभिन्नता और बहुलवाद का सम्मान करने और हमारी सरकार और संस्थानों को ज्यादा व्यापक और उसमें समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए मेरी सरकार को काफी कुछ करना है।

भाइयो और बहनो, हमारी यह यात्रा लंबी होगी। मैं अपनी सेवाएं इस महान देश और भारत के लोगों की सेवा करने का प्रण करता हूं और आपसे अपील करता हूं कि मेरे साथ इस ऐतिहासिक यात्रा में शामिल हों।


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