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- सुधार की उम्मीद

जब देश की लोकसभा में करीब 43 प्रतिशत सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले घोषित रूप से दर्ज हों, तब किसी भी पार्टी की ओर से आगे बढ़कर यह कहना स्वागतयोग्य है कि हम किसी माफिया या बाहुबली को चुनाव में नहीं उतारेंगे। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने शुक्रवार को कहा है कि उनकी पार्टी अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बाहुबलियों या माफिया उम्मीदवारों को मैदान में नहीं उतारेगी। मायावती की इस घोषणा को जेल में बंद गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी और उनके भाई से जोड़कर अगर देखा जा रहा है, तो भी यह घोषणा अपने आप में उम्मीद जगाती है। ऐसे ही एक-एक दागी या अपराधी का टिकट कटना चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि दुनिया को दिखाने के लिए बाहुबलियों का विरोध किया जाए और पिछले दरवाजे से उनको तरजीह मिलती रहे। दरअसल, यही होता आया है, कोई एक पार्टी अगर बाहुबलियों को बाहर का रास्ता दिखाती है, तो वे पहले से भी ज्यादा आक्रामकता के साथ किसी अन्य पार्टी के टिकट पर या किसी पार्टी के सहयोग से चुनाव जीतकर आ जाते हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश में ऐसे अनेक दागी हैं, जो दो से तीन दलों को अपनी सेवाएं दे चुके हैं और उनके लिए लगभग हर पार्टी का दरवाजा कमोबेश खुला ही रहता है।





