सम्पादकीय

रियलिटी टीवी पसंद करने वालों के लिए विज्ञान की बड़ी खुशखबरी

nidhi
9 Aug 2026 8:45 AM IST
रियलिटी टीवी पसंद करने वालों के लिए विज्ञान की बड़ी खुशखबरी
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विज्ञान की बड़ी खुशखबरी
रियलिटी टीवी को अक्सर लोग ऐसा मनोरंजन मानते हैं जिसे देखने के बाद थोड़ा अपराधबोध महसूस होता है। डेटिंग शो, टैलेंट हंट, सेलिब्रिटी ड्रामा या प्रतियोगिता आधारित कार्यक्रमों में घंटों बिताने पर कई लोग खुद से सवाल करते हैं कि आखिर उन्हें ऐसी चीजें इतनी पसंद क्यों हैं। लेकिन अगर आपको रियलिटी टीवी देखना पसंद है, तो इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है। मनोविज्ञान और मीडिया रिसर्च के नजरिए से यह मनोरंजन मानव स्वभाव से जुड़ी कई सामान्य जिज्ञासाओं और सामाजिक प्रवृत्तियों को संतुष्ट करता है।
आखिर रियलिटी टीवी इतना आकर्षक क्यों लगता है?
रियलिटी टीवी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें वास्तविक जीवन जैसे रिश्तों, संघर्षों और भावनाओं को कहानी के केंद्र में रखा जाता है। दर्शक प्रतियोगियों के बीच दोस्ती, झगड़े, रोमांस, प्रतिस्पर्धा और भावनात्मक उतार-चढ़ाव देखते हैं।
मानव मस्तिष्क स्वाभाविक रूप से दूसरे लोगों के व्यवहार और सामाजिक रिश्तों को समझने में रुचि रखता है। इसी वजह से किसी समूह के अंदर चल रही बातचीत या विवाद को देखना दिलचस्प लग सकता है।
'गिल्टी प्लेज़र' क्यों कहते हैं?
'गिल्टी प्लेज़र' का मतलब ऐसी चीज से है जिसे व्यक्ति पसंद तो करता है, लेकिन उसे लगता है कि शायद इसे पसंद करना बहुत गंभीर या प्रतिष्ठित नहीं माना जाएगा। रियलिटी टीवी को भी कई लोग इसी श्रेणी में रखते हैं। उन्हें शो देखने में मजा आता है, लेकिन वे दोस्तों या परिवार के सामने इसे स्वीकार करने में झिझक सकते हैं।
हालांकि किसी मनोरंजन को पसंद करने के लिए खुद को जज करने की जरूरत नहीं है। अगर कोई कार्यक्रम आपको तनाव से दूर करता है, आराम देता है या कुछ समय के लिए आपका ध्यान दूसरी चीजों से हटाता है, तो उसका आनंद लेना सामान्य मनोरंजन व्यवहार का हिस्सा हो सकता है।
ड्रामा हमारी दिलचस्पी क्यों बढ़ाता है?
रियलिटी शो में अक्सर विवाद और अप्रत्याशित घटनाओं को प्रमुखता दी जाती है। किसी प्रतियोगी का अचानक बाहर होना, दो लोगों के बीच बहस या रिश्ते में बदलाव दर्शकों को अगले एपिसोड तक जोड़े रख सकता है।
इंसानी दिमाग को अनिश्चितता और सामाजिक घटनाओं को समझने में स्वाभाविक रुचि होती है। जब कहानी में यह पता नहीं होता कि आगे क्या होगा, तो दर्शक अगले घटनाक्रम को देखने के लिए उत्सुक रहता है। यही कारण है कि रियलिटी टीवी में क्लिफहैंगर और लगातार बदलते रिश्ते प्रभावी साबित होते हैं।
क्या दूसरों की जिंदगी देखना सामाजिक सीख भी है?
रियलिटी टीवी पूरी तरह वास्तविक जीवन का प्रतिबिंब नहीं होता। इसमें एडिटिंग, प्रोडक्शन और कहानी कहने की तकनीकों की बड़ी भूमिका होती है। फिर भी दर्शक इसमें लोगों के व्यवहार, बातचीत और रिश्तों को देखकर सामाजिक संकेतों को समझने की कोशिश कर सकते हैं। किसी व्यक्ति का किसी स्थिति में कैसे व्यवहार करना, संघर्ष के दौरान क्या कहना या किसी रिश्ते में किस तरह प्रतिक्रिया देना—ये सब दर्शक के लिए सामाजिक अनुभव की तरह काम कर सकते हैं।
पसंदीदा प्रतियोगियों से जुड़ाव
रियलिटी टीवी का एक और आकर्षण प्रतियोगियों से भावनात्मक जुड़ाव है। दर्शक किसी प्रतिभागी को पसंद करने लगते हैं और उसकी सफलता या असफलता से खुद को जोड़ लेते हैं। यह एक तरह का एकतरफा भावनात्मक संबंध हो सकता है, जिसमें दर्शक किसी ऐसे व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से जाने बिना उसके बारे में काफी कुछ जानने और उसके जीवन में रुचि लेने लगते हैं। सोशल मीडिया ने इस जुड़ाव को और मजबूत कर दिया है। अब दर्शक शो खत्म होने के बाद भी प्रतियोगियों की पोस्ट, इंटरव्यू और रोजमर्रा की गतिविधियों से जुड़े रह सकते हैं।
तनाव से राहत भी हो सकती है वजह
दिनभर काम, पढ़ाई या दूसरी जिम्मेदारियों के बाद लोग अक्सर ऐसा मनोरंजन चाहते हैं जिसमें उन्हें ज्यादा मानसिक मेहनत न करनी पड़े। रियलिटी टीवी इस जरूरत को पूरा कर सकता है। दर्शक आराम करते हुए शो देख सकते हैं और कुछ समय के लिए अपनी वास्तविक जिंदगी की चिंताओं से ध्यान हटा सकते हैं। इसलिए किसी हल्के-फुल्के रियलिटी शो को देखना अपने आप में कोई नकारात्मक आदत नहीं है।
लेकिन हर चीज की तरह संतुलन जरूरी
रियलिटी टीवी देखना सामान्य है, लेकिन अगर मनोरंजन की कोई भी आदत रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगे तो उस पर ध्यान देना जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति लगातार कई घंटे शो देखने के कारण नींद, काम, पढ़ाई, सामाजिक जीवन या दूसरी जिम्मेदारियों की अनदेखी करने लगे, तो समस्या शो की शैली से ज्यादा उसके इस्तेमाल के तरीके में हो सकती है।
क्या आपको इसके लिए अपराधबोध महसूस करना चाहिए?
अगर आप रियलिटी टीवी देखकर आनंद लेते हैं तो सिर्फ इसलिए खुद को दोषी महसूस करने की जरूरत नहीं है कि दूसरे लोग इसे 'गंभीर' मनोरंजन नहीं मानते। हर व्यक्ति की मनोरंजन पसंद अलग होती है। किसी को डॉक्यूमेंट्री पसंद आती है, किसी को खेल, किसी को फिल्में और किसी को रियलिटी शो। जब तक यह आपकी जिम्मेदारियों और स्वास्थ्यपूर्ण दिनचर्या में बाधा नहीं बन रहा, तब तक इसे सामान्य मनोरंजन की तरह देखा जा सकता है।

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