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सम्पादकीय

अपराध का भूमंडलीकरण!

Triveni
11 Jun 2021 4:31 AM GMT
अपराध का भूमंडलीकरण!
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सूचना तकनीक और आधुनिक परिवहन की उन्नति के साथ अर्थव्यवस्था और लोगों के दुनिया भर से जुड़ने की एक नई सूरत बनी।

सूचना तकनीक और आधुनिक परिवहन की उन्नति के साथ अर्थव्यवस्था और लोगों के दुनिया भर से जुड़ने की एक नई सूरत बनी। लेकिन तब यह किसी ने नहीं सोचा था कि इसके साथ ही तमाम बुराइयों का भी ग्लोबनाइजेशन हो सकता है। आतंकवाद का जब ऐसा चेहरा देखने को मिला, तब दुनिया के कान खड़े हुए थे। लेकिन आतंकवादी फिर भी एक विचारधारा से प्रेरित होते हैं, भले यह कितनी ही पतित और भटकी हुई सोच क्यों ना हो। लेकिन विशुद्ध अपराधियों ने भी अपना ग्लोबलाइजेशन कर लिया है, इसका खुलासा अब हुआ है। ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका की केंद्रीय जांच एजेंसियों के अभियान- 'ऑपरेशन आयरनसाइड' में एएफपी और एफबीआई ने ऑस्ट्रेलिया, एशिया, दक्षिण अमेरिका और मध्य पूर्व में सक्रिय गिरोहों के सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया है। पश्चिमी देशों में ये खबर सुर्खियों में रही। इसकी घोषणा के साथ ही ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने एक सार्वजनिक बयान जारी कर कहा कि इस ऑपरेशन ने संगठित अपराध पर ऐसी चोट की है, जिसकी गूंज पूरी दुनिया के अपराध जगत में सुनाई देगी। ऑपरेशन में शामिल रही यूरोपीय एजेंसी यूरोपोल के मुताबिक यह ऑपरेशन दुनिया के चारों कोनों में अपराधियों की गतिविधियों को हिला देने वाला अब तक का सबसे बारीक प्रयास था। ऑस्ट्रेलिया की पुलिस के मुताबिक 224 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। न्यूजीलैंड पुलिस ने 35 लोगों को गिरफ्तार किया।

यह ऑपरेशन 2018 में ऑस्ट्रेलिया फेडरल पुलिस (एएफपी) और अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई ने मिलकर शुरू किया था। इसका जरिया आपराधिक गिरोहों के बीच प्रचलित संदेश भेजने वाली ऐप एनोम को हैक करना था। गिरोह समझते रहे कि यह ऐप सुरक्षित है, लेकिन पुलिस ने इसमें घुसपैठ कर ली और उनके बीच होने वाले संदेशों के आदान-प्रदान की निगरानी की। इससे पुलिस को मालूम हुआ कि वे कब और कहां मिल रहे हैं और उनमें से कौन क्या कर रहा है। जर्मनी में पुलिस के छापे हेसे और फ्रैंकफर्ट के इर्द गिर्द केंद्रित थे। सुरक्षा बलों ने वीजबाडेन में भी कुछ गिरफ्तारियां कीं। पुलिस के मुताबिक जिस एनोम ऐप का इस्तेमाल अपराधी कर रहे थे, बहुत उन्नत किस्म की थी। उसमें सिक्युरिटी के बेदह मजबूत इंतजाम थे। हर संदेश एनक्रिप्टेड था। कैमरे आदि के जरिए भी उसमें घुसपैठ की कोई गुंजाइश नहीं थी। लेकिन जैसा कि कहा जाता है कि अपराधी आखिरकार पकड़े जाते हैँ। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगभग तीन साल तक चले ऑपरेशन ने आखिरकार पुलिस को इस गिरोह तक पहुंचा दिया।


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