सम्पादकीय

विरासत की खातिर

Rounak Dey
12 Jan 2023 8:21 AM IST
विरासत की खातिर
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बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी नियोजित शहरीकरण का एक आदर्श उदाहरण रहा है।
यह न सिर्फ चंडीगढ़ को एक विरासत के रूप में बचाने की फिक्र है, बल्कि एक तरह से विकास के नाम पर चलने वाली उन गतिविधियों पर भी टिप्पणी है, जिसकी वजह से कोई शहर आम जनजीवन से लेकर पर्यावरण तक के लिहाज से बदइंतजामी का शिकार हो जाता है।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ शहर के फेज एक में एकल आवासीय इकाइयों को मंजिल आधारित अपार्टमेंट में बदलने पर रोक लगा दी है। अब इस इलाके में एक समान अधिकतम ऊंचाई के साथ मंजिलों की संख्या तीन तक सीमित रहेगी। पिछले कुछ दशकों से शहरों में विकास के नाम पर जिस तरह की बेलगाम गतिविधियां चल रही हैं, उसके मद्देनजर इस फैसले को दरअसल देश के पहले नियोजित शहर चंडीगढ़ की विरासत को बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम कहा जा सकता है। अदालत ने भी इसकी अहमियत का जिक्र करते हुए कहा कि यह रोक चंडीगढ़ की विरासत की स्थिति के साथ-साथ स्थिरता के मद्देनजर जरूरी है; सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक 'उचित संतुलन' बनाने की भी आवश्यकता है।
यह जगजाहिर तथ्य है कि देश भर के शहर-महानगर व्यवस्थागत स्तर पर जिस तरह की समस्याओं से दो-चार होते जाते हैं, उसका मुख्य कारण अनियोजित विकास होता है। चंडीगढ़ को इसीलिए अलग करके देखा जाता रहा है कि इस शहर को जिस स्वरूप में निर्मित किया गया था, उसमें न सिर्फ रिहाइश के स्तर पर आम लोगों को एक बेहतर जगह मिल सकी, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी नियोजित शहरीकरण का एक आदर्श उदाहरण रहा है।

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Source: jansatta

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