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नवरात्रि समग्र सोच
देवी ही ईश्वर हैं। वह त्रिगुणात्मिका हैं। वह पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती—तीनों का एक ही रूप हैं। वह हमारे मन, वाणी और कर्म को नियंत्रित करती हैं। दूसरे शब्दों में, वह हमारे विचारों, हमारी बोली और हमारे द्वारा किए जाने वाले कार्यों का संचालन करती हैं। 'पक्ष' का अर्थ है पखवाड़ा (15 दिनों की अवधि)। 'देवी पक्ष' वह पखवाड़ा है जो ठीक पितृ पक्ष के बाद आता है। पहले पितरों की पूजा की जाती है, और उसके बाद देवी की महिमा का गुणगान किया जाता है।
देवी पक्ष के नौ दिनों के दौरान नवरात्रि मनाई जाती है। दसवें दिन विजय दशमी का पर्व मनाया जाता है। इसके बाद भी पाठ और जप जारी रहते हैं, और पूर्णिमा के दिन देवी पक्ष का समापन होता है।
'देवी' शब्द 'दिव' धातु से बना है, जिसका अर्थ है 'चमकना'। जो स्वयं चमकती है और दूसरों को भी चमकने में मदद करती है, वही स्त्री रूप में 'देवी' है। पुरुष रूप में इसे 'देव' कहा जाता है। 'अर्धनारीश्वर' स्वरूप में, देव और देवी एक ही प्रत्यक्ष रूप में विद्यमान होते हैं। दाईं ओर का पुरुष रूप 'शिव तत्व' को दर्शाता है। बाईं ओर स्त्री शक्ति है, जो पार्वती के रूप में प्रकट होती है।
शरीर विज्ञान के अनुसार, शरीर का बायां हिस्सा दाईं ओर से और दायां हिस्सा बाईं ओर से नियंत्रित होता है। इस प्रकार, तार्किक और गणनात्मक पक्ष—जो मस्तिष्क के बाएं हिस्से से जुड़ा है—वह दाईं ओर पुरुष रूप में स्थित है। हृदय का वह हिस्सा, जो अधिक दयालु और करुणा से भरा होता है, बाईं ओर स्थित है। मस्तिष्क का दायां हिस्सा समग्र सोच (holistic thinking) और प्रेरणा से जुड़ा है। देवी पक्ष हमें अधिक समग्र, दयालु और सबको साथ लेकर चलने वाला (inclusive) बनने के लिए प्रेरित करता है। यही सच्ची 'विजय' है। और इसके साथ ही लक्ष्मी का आगमन भी होता है।
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