सम्पादकीय

बड़ा 'हथियार' बन कर उभरी कोरोना की वैक्सीन, चीन को कई मोर्चों पर मात दे सकता है भारत

Gulabi
22 Jan 2021 12:59 PM GMT
बड़ा हथियार बन कर उभरी कोरोना की वैक्सीन, चीन को कई मोर्चों पर मात दे सकता है भारत
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भारत में बने कोरोना वायरस के टीके की मांग पूरे विश्व में बढ़ती जा रही है.

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। भारत में बने कोरोना वायरस के टीके की मांग पूरे विश्व में बढ़ती जा रही है. 92 देशों ने भारत से पुणे स्थित सीरम इंस्टिट्यूट निर्मित कोविशील्ड और हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक द्वारा निर्मित कोवैक्सीन टीके की मांग की है. फिलहाल ज्यादा मांग कोविशील्ड की है. भारत ने पिछले शनिवार से देश में टीकाकरण की प्रक्रिया की शुरुआत की है जिसके पहले चरण में कोरोना वॉरियर्स यानी डॉक्टर, स्वास्थ्कर्मी, पुलिस और ऐसे लोग जिनका कोरोना के मरीजों से संपर्क होता है, उन्हें टीका लगाया जा रहा है. दूसरे चरण में 50 वर्ष के अधिक उम्र के लोगों को टीका लगाया जाएगा जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके अनेक सहयोगी मंत्रियों की बारी आएगी.


जहां कई देश भारत से कोरोना वायरस के टीके को खरीदने का आर्डर दे रहे हैं, भारत ने अपने स्तर पर कई पड़ोसी देशों को मुफ्त में टीका मुहैया करना शुरू कर दिया है. इसमें नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, मालदीव और सेशल्स आदि देश शामिल हैं. भारत को यूं ही नहीं विश्व का वैक्सीन कैपिटल कहा जाता है. भारत में दुनिया के किसी देश के मुकाबले सबसे ज्यादा वैक्सीन का निर्माण होता है, जिसके गुणवत्ता पर कभी ऊंगली नहीं उठी है. यही बात भारत में निर्मित कोरोना वैक्सीन पर भी लागू हो रही है. अभी तक टीकाकरण से हुए कोई निगेटिव रिपोर्ट की खबर नहीं आई है.


वैक्सीन डिप्लोमेसी
अच्छी बात है कि अभी तक किसी विपक्षी दल ने मोदी सरकार की इस बात के लिए आलोचना नहीं की है कि क्यों भारत को दूसरे देशों के नागरिकों की ज्यादा चिंता है, जबकि अभी स्वयं भारत में ही करोड़ों लोगों को टीका लगाने की जरूरत है. राजनीति से कहीं ऊपर देश हित होता है जिसमें कूटनीति की अहम भूमिका होती है. जहां पूरा विश्व भारत में बनी वैक्सीन पर विश्वास जाता रहा है, वहीं चीन में निर्मित सीनोवैक वैक्सीन की गुणवत्ता पर उंगलियां उठनी शुरू हो गई हैं. ऐसे कई देश उन 92 देशों की सूची में शामिल हैं जिन्होंने चीन से वैक्सीन खरीदी थी पर अब वे भारत में बनी वैक्सीन पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं.

जहां चीन के लिए कोरोना महामारी पैसे कमाने का एक जरिया बन गया, भारत इसका इस्तेमाल कूटनीति के तहत कर रहा है. इसमें कोई शक नहीं कि भारत को वैक्सीन के निर्यात से खासा आर्थिक फायदा भी होगा. सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि भारत ने पाकिस्तान और चीन को भी भारत में बनी वैक्सीन देने की पेशकश की है, जो जले पर नमक छिड़कने जैसा है.

चीन को जवाब
लंबे अर्से से चीन भारत के पड़ोसी देशों को भारत के खिलाफ इस्तेमाल करता रहा है. नेपाल इसका ताजा उदाहरण है जिसने चीन के उकसाने पर भारत की सीमा के अंदर उत्तराखंड के कई गांवों पर अपना दावा ठोक दिया है. पाकिस्तान तो हमेशा से भारत के खिलाफ रहा है. बांग्लादेश को भी चीन बांग्लादेश में बने सामान का अधिक निर्यात करके और सुनहरे सपने दिखा कर भारत के खिलाफ भड़काने की कोशिश कर रहा है. श्रीलंका ने भी अब सबक सीख लिया है कि चीन सिर्फ व्यापार और अपने हित की चिंता करता है, वह किसी का दोस्त नहीं हो सकता.

श्रीलंका में चीन
श्रीलंका के हम्बंटोटा बंदरगाह पर अब चीन का कब्ज़ा है. 2009 में श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने देश में कोलंबो के अलावा दूसरे बंदरगाह बनाने की सोची. भारत सहित कई देशों ने इस पर लोन देने से मना कर दिया. कारण था इस बंदरगाह की उपयोगिता पर संदेह. पर चीन ने श्रीलंका को पैसा दिया, बंदरगाह का निर्माण किया. व्यापारिक दृष्टि से हम्बंटोटा बंदरगाह विफल साबित हुआ. चीन भी इस बात को जानता था. पर चीन कर्ज की राजनीति के लिए विख्यात है. जब लोन वापसी का समय आया तो श्रीलंका के पास पैसे नहीं थे. बदले में चीन ने 99 वर्षों के पट्टे पर हम्बंटोटा अपने नाम करवा लिया. कर्ज तो माफ हो गया पर, हम्बंटोटा और उसके साथ के 15,000 एकड़ जमीन पर चीन का कप्जा हो गया.

श्रीलंका की बस एक ही शर्त थी कि बंदरगाह और 15,000 एकड़ जमीन का इस्तेमाल सैन्य कारणों के लिए नहीं होगा. पर श्रीलंका अभी भी चीन के कर्ज के बोझ से डूबा है. चीन कर्ज माफ करने को तैयार है बशर्ते कि हम्बंटोटा बंदरगाह के सैन्य इस्तेमाल पर पाबंदी श्रीलंका वापस ले ले. यानी भारत को चीन दक्षिण से भी घेरने की कामयाब हो जाए. ऐसे में अगर भारत श्रीलंका को आर्थिक मदद देता है या मुफ्त में कोरोना वैक्सीन देता है तो यह भारत के हित में होगा. और अगर श्रीलंका भारत का गुणगान करता नजर आए तो यह भारत की कूटनीति और विदेश नीति की सफलता कही जाएगी.

हथियार से कम नहीं वैक्सीन
कोरोना वायरस का वैक्सीन भारत के लिए बहुत बड़ा हथियार बन कर उभरा है जिसके सही उपयोग से भारत पूरे विश्व का दिल जीत सकता है और साथ ही साथ इसके निर्यात से भारत की अर्थव्यवस्था भी सुधरेगी. कोरोना भारत के लिए एक अवसर बन कर आया है कि भारत विश्व के अग्रणी देशों में अपनी जगह पक्की कर ले, जो संभव है क्योंकि अंग्रेजी में एक कहावत है A friend in need is a friend indeed यानी सच्चा मित्र वही जो समय पर काम आए. अवसर है भारत के लिए विश्व मित्र बन कर उभरने का और चीन से बिना बंदूक से गोली चलाए बदला लेने का.


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