सम्पादकीय

गुजरात में बदलाव

Rani Sahu
13 Sep 2021 6:46 PM GMT
गुजरात में बदलाव
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गुजरात को नए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल का नेतृत्व हासिल होने के बड़े सियासी मायने हैं

गुजरात को नए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल का नेतृत्व हासिल होने के बड़े सियासी मायने हैं। मुख्यमंत्री पद से विजय रूपाणी की विदाई की पहली जाहिर वजह यही है कि उनके नेतृत्व में भाजपा को आगामी विधानसभा चुनाव में जीत पर विश्वास न था। विजय रूपाणी ने अचानक शनिवार को इस्तीफा दिया और सोमवार को भूपेंद्र पटेल ने मुख्यमंत्री का कार्यभार संभाल लिया। यह सहज सत्ता हस्तांतरण भाजपा में केंद्रीय नेतृत्व की मजबूती और दलीय अनुशासन का भी प्रमाण है। पहली बार विधायक बने भूपेंद्र पटेल गुजरात के 17वें मुख्यमंत्री हैं। उनके शपथ ग्रहण समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अन्य भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पटेल को बधाई देने के लिए ट्विटर का भी सहारा लिया और उन पर विश्वास व्यक्त किया। साथ ही, प्रधानमंत्री ने विजय रूपाणी की भी तारीफ की है। गुजरात में नेतृत्व परिवर्तन कुल मिलाकर अनुकरणीय रहा है। एकाधिक अवसरों पर हम भाजपा में भी नेतृत्व परिवर्तन के समय खींचतान देख चुके हैं। लेकिन फिलहाल गुजरात पूरी भाजपा के लिए नाक का सवाल है और पार्टी का कोई नेता या कार्यकर्ता यह नहीं चाहेगा कि पार्टी इस राज्य में पिछड़ जाए।

भाजपा गुजरात में विजय रूपाणी को आगे करके ही 2017 का विधानसभा चुनाव लड़ी थी। रूपाणी को भी चुनावी वर्ष से एक साल पहले ही पार्टी को जिताने की कमान सौंपी गई थी और वह कामयाब रहे थे। हालांकि, भाजपा के नेता यह भूले नहीं हैं कि कांग्रेस से मुकाबला कितना कड़ा था। जहां भाजपा की 16 सीटें घटी थीं, वहीं कांग्रेस की 16 सीटें बढ़ गई थीं। आमतौर पर मत प्रतिशत में 38 के आसपास रहने वाली कांग्रेस 40 प्रतिशत के पार पहुंच गई थी। दोनों पार्टियों के बीच सात से आठ प्रतिशत मतों का अंतर कायम है, लेकिन राजनीति के जानकार सहज ही बता सकते हैं कि दो दशक से ज्यादा सत्ता में रहने वाली पार्टी को मत प्रतिशत के प्रति ज्यादा सजग रहना चाहिए। दो पार्टियों के वर्चस्व वाले गुजरात में कांग्रेस ही भाजपा के खिलाफ पूरे दमखम से सामने है, तीसरी पार्टी के लिए गुंजाइश नहीं है। इसलिए भाजपा के लिए ज्यादा जरूरी है कि वह गुजरात में खुद को मजबूत रखे और मजबूती दिखाए। भूपेंद्र पटेल पाटीदार (या पटेल) समुदाय से आते हैं। इस समुदाय के 12-14 प्रतिशत मतदाता हैं। यह समुदाय आर्थिक, राजनीतिक रूप से बहुत प्रभावी है, और पूरे राज्य में फैला हुआ है। पाटीदारों के वोट 182 विधानसभा क्षेत्रों में से कम से कम 70 में नतीजे तय करते हैं। भाजपा के लिए एक तिहाई विधायक अकेले इसी समुदाय से आते हैं। खैर, कहना न होगा, इस बदलाव से कांग्रेस का मनोबल बढ़ा होगा। कांग्रेस को पता है कि गुजरात में सत्ता मिली, तो 2024 के आम चुनाव की बुनियाद तैयार हो जाएगी। बहरहाल, सियासत से अलग हटकर देखें, तो हर राज्य में हमें यह सोचना चाहिए कि विगत दो वर्षों में हमारी सरकारें लोगों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरी हैं? क्या मात्र चेहरा बदलने से लोग खुश हो जाएंगे? असंतोष व कमियों की मूल बुनियाद में जाकर सरकारों को काम करना पड़ेगा। जो लोग निराश हैं, उन्हें राहत देने के उपाय करने पड़ेंगे। फर्क यही है कि यह काम गुजरात में पहले विजय रूपाणी के जिम्मे था और अब भूपेंद्र पटेल के जिम्मे है।

क्रेडिट बाय हिन्दुस्तन

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