सम्पादकीय

CBSE Board Exam 2021 : लाखों बच्चों को कोरोना के मुंह में क्यों धकेलना चाहता है CBSE?

Gulabi
13 April 2021 1:55 PM GMT
CBSE Board Exam 2021 : लाखों बच्चों को कोरोना के मुंह में क्यों धकेलना चाहता है CBSE?
x
कोरोना के मामले देश में तेजी से ऊपर जा रहे हैं, गूगल पर कोरोना का ग्राफ देखिए तो लगता है कि

संयम श्रीवास्तव। कोरोना के मामले देश में तेजी से ऊपर जा रहे हैं, गूगल पर कोरोना का ग्राफ देखिए तो लगता है कि फोन से निकलकर अब आसमान बस छूने ही वाला है. पिछले सात दिनों से देश में लगातार एक लाख से ज्यादा कोरोना के मामले सामने आए हैं. आज 13 अप्रैल को 1,61,736 नए मामले सामने आए. वहीं बीते 24 घंटे में कोरोना ने 879 लोगों को मौत की नींद सुला दिया. लेकिन CBSE जाग गई है, अब वह इस महामारी के समय में लाखों बच्चों के जीवन से खेलने पर अमादा है. शायद CBSE को भी नेताओं की तरह कोरोना ने सपने में कहा होगा कि 'देखिए साहब हम जैसे चुनावी राज्यों में नहीं गए वैसे ही स्कूलों में बच्चों के पास भी नहीं जाएंगे.' हालांकि आंकड़े बताते हैं कि चुनावों के दौरान बंगाल में कोरोना 10 गुना तेजी से बढ़ा है. अन्य चुनावी राज्यों का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा. अब अगर CBSE ने बच्चों पर जोर देकर उन्हें परिक्षा के लिए स्कूल बुलाया तो बेशक यहां भी ऐसे ही आंकड़े देखने को मिल सकते हैं.


भारत में अभी बच्चों के लिए कोरोना का कोई टीका नहीं बना है और बना भी होता तो क्या, यहां तो लोग टीका लगाकर भी संक्रमित हो रहे हैं. ऐसे में मां-बाप पेरशान हैं कि कैसे बच्चों को स्कूल भेज दें और उनकी जिंदगी को दांव पर लगा दें. लेकिन CBSE है कि उसने साफ फरमान सुना दिया है कि परीक्षा तो 10वीं 12वीं की ऑफलाइन ही होगी और तय समय पर ही होगी, चाहे बच्चों के हाथ में एडमिट कार्ड की जगह कोरोना कार्ड ही क्यों ना देना पड़े. CBSE की माने तो वह 10वीं और 12वीं की परीक्षा 4 मई से 10 जून के बीच होगी और 15 जुलाई तक उसके नतीजे सामने आएंगे. लेकिन वह यह नहीं बता रही है कि जो इस वक्त हर रोज कोरोना के नतीजे सामने आ रहे हैं उसका क्या करना है.

सोशल मीडिया के माध्यम से परीक्षा रद्द कराने की मांग
हॉस्पिटलों और मेडिकल सुविधाओं की स्थिति किसी से छुपी नहीं है. हालात हर दिन बद से बदतर होते जा रहे हैं. कोरोना मरीजों को बेड नहीं मिल पा रहा है और जिन्हें बेड मिल रहा है उन्हें इलाज नहीं मिल पा रहा है. वैक्सीन की कमी हर दिन तेजी से बढ़ रही है. तमाम राज्य केंद्र से वैक्सीन जल्द उपलब्ध कराने के मांग कर रहे हैं. और केंद्र के पास सिवाय आश्वासनों के कुछ नहीं है. देश की ऐसी हालत देख कर छात्र डरे हुए हैं. वह सोशल मीडिया के माध्यम से त्राहिमाम-त्राहिमाम कर रहे हैं. पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर Cancel Board Exam ट्रेंड कर रहा है. बच्चे CBSE और सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि किसी भी तरह से परीक्षा को कैंसिल किया जाए या फिर उसे ऑनलाइन लिया जाए. बच्चों की मांग इन हालातों में बिल्कुल उचित है CBSE जब पिछले एक साल से ऑनलाइन क्लास ले सकती है तो उसे ऑनलाइन परीक्षा लेने में क्या दिक्कत है.

शिक्षा मंत्रालय से मांगा जा रहा है जवाब
चेंज डॉट ओआरजी पर लगातार पीटिशन फाइल हो रहे हैं और शिक्षा मंत्रालय से तीखे सवाल पूछे जा रहे हैं. लोग जानना चाहते हैं कि जब देश भर में कोरोना की स्थिति इतनी भयावह है तो किस हिसाब से CBSE बच्चों की परीक्षा कराने पे तुली हुई है. बच्चों के अभिभावक जानना चाहते हैं कि अगर बच्चों को कुछ हो गया तो क्या शिक्षा मंत्रालय या फिर CBSE उसकी कोई जिम्मेदारी लेगी या फिर आखिरी में उनसे बस 'सॉरी' बोल दिया जाएगा. CBSE की इस गैर-जिम्मेदाराना हरकत पर प्रियंका गांधी का भी एक ट्वीट आया है जो बच्चों की मांग का समर्थन करता है.

विपक्ष की भी मांग रद्द हो परीक्षा
प्रियंका गांधी लिखती हैं कि 'CBSE बोर्ड इस स्थिति में जब कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं बच्चों को फोर्स करके परीक्षा के लिए बुला रही है जो बिल्कुल गलत है. इन परीक्षाओं को या तो रद्द किया जाना चाहिए या फिर कुछ समय के लिए टाल देना चाहिए. या फिर किसी ऐसे तरीके से परीक्षा कराई जाए जिससे बच्चे भीड़ का हिस्सा ना बनें.' प्रियंका गांधी की बात सौ फीसदी सही है क्योंकि इस वक्त देश की स्थिति ऐसी बिल्कुल नहीं है कि वह बच्चों को लेकर इतना बड़ा रिस्क उठा सके.

दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने भी CBSE और केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखी है और कहा है कि ऐसे वक्त में ऑफलाइन परीक्षा लेना बच्चों के लिए ठीक नहीं. इस परीक्षा के या तो टाल देना चाहिए या फिर कैंसल कर देना चाहिए. इस तरह की मांग सिर्फ बच्चे और उनके अभिभावक ही नहीं बल्कि राजनीतिक पार्टियों से जुड़े लोग भी अब खुल कर रहे हैं.

आपको याद होगा कि जब देश में कोरोना के मामले थोड़े कम हुए थे तो ज्यादातर राज्यों ने अपने यहां स्कूल और कॉलेज खोल दिए थे. लेकिन आपको जान कर हैरानी होगी जैसे ही स्कूल कॉलेज खुले, वैसे ही बच्चों में संक्रमण के मामले बढ़ने लगे. उसका सबसे बड़ा कारण था कि बच्चों को इतनी समझ नहीं होती कि वह कोरोना नियमों का पालन ठीक ढंग से कर सकें. अगर एक बच्चा या शिक्षक संक्रमित निकला तो वह कई लोगों को संक्रमण दे सकता है.

अब और तेजी से फैल रहा है संक्रमण
जब कोरोना का पहला दौर शुरू था तब एक संक्रमित केवल 30 से 40 फीसदी आदमी को संक्रमित कर सकता था. यानि एक व्यक्ति ज्यादा से ज्यादा 3 से 4 व्यक्ति को संक्रमित कर सकता था. लेकिन अब विशेषज्ञ बताते हैं कि कोरोना संक्रमण की दर 90 फीसदी तक पहुंच गई है, मतलब की अगर अब एक व्यक्ति संक्रमित होता है तो वह अपने साथ कई लोगों को संक्रमित कर सकता है और यह संक्रमण तेजी से फैल सकता है. CBSE को समझना चाहिए कि एक बच्चा अगर संक्रमित होगा तो वह अनजाने में अपने दोस्तों अपने परिवार वालों और न जाने कितने लोगों को संक्रमित करेगा.

दूसरे देशों में क्या कर रही हैं शिक्षण संस्थाएं
देश की शिक्षा व्यवस्था भले ही खस्ता हाल में पहुंच गई हो, लेकिन मनमाने फैसले लेने में यहां के शिक्षण संस्थानों का कोई जवाब नहीं. जहां अपने देश में CBSE बच्चों को कोरोना देने पर तुली हुई है, वहीं ब्रिटेन ने अपने यहां सभी हाई स्कूल और यूनिवर्सिटीज लेवल की परिक्षाओं पर रोक लगा दी है. फ्रांस ने भी अपने यहां हायर सेकेंड्री के A.B.C की परीक्षा को रद्द कर दिया है आपको जानकर हैरानी होगी कि ऐसा 1808 के बाद पहली बार हुआ है. इसके अलावा सऊदी अरब, कुवैत, मेक्सिको और नॉर्वे में भी कोरोना वायरस की वजह से परीक्षाएं टाल दी गई हैं. लेकिन हमारा CBSE महान है वह हर बच्चे का भविष्य इसी कोरोना काल में सोने से लिखेगा और उनके माता पिता से वादा करेगा कि इस कालजयी कोरोना वायरस के मुंह से अगर आपके बच्चे बच कर निकल जाते हैं तो वह अपने भविष्य में इस परीक्षा के जरिए बहुत ऊंचा मुकाम हासिल करेंगे और अगर उन्हें इस परीक्षा के दौरान कुछ हो गया तो हम तो हैं ही आपको सॉरी बोलने के लिए.


Next Story