सम्पादकीय

सीबीआई की सक्रियता

Triveni
27 Dec 2022 10:16 AM IST
सीबीआई की सक्रियता
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फाइल फोटो 

देश में अनियमितता के दो मामलों में सीबीआई की कार्रवाई चर्चा में है।

जनता से रिश्ता वेबडेस्क | देश में अनियमितता के दो मामलों में सीबीआई की कार्रवाई चर्चा में है। जहां एक मामले में इस केंद्रीय जांच एजेंसी ने वीडियोकॉन समूह के अध्यक्ष वेणुगोपाल धूत को आईसीआईसीआई ऋण मामले में गिरफ्तार किया है, तो वहीं दूसरे मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके कुछ परिजनों पर सीबीआई ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। पहले बात वेणुगोपाल धूत से जुड़े मामले की। सीधे शब्दों में अगर समझाएं, तो धूत की कंपनी ने बैंक से ऋण लिया था और बदले में आईसीआईसीआई बैंक की तत्कालीन सीईओ चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर को निवेश के जरिये आर्थिक लाभ दिया। 3,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण से जुडे़ इस मामले में चंदा कोचर को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया है, अब धूत की गिरफ्तारी से उद्योग जगत के साथ-साथ बैंकिंग क्षेत्र में कड़ा संदेश जाएगा। अगर किसी भी प्रकार से रिश्वत देते हुए किसी ने ऋण प्राप्त किया है, तो वह सजा का भागी है।

वैसे तो आम आदमी को दस लाख रुपये का ऋण मिलना भी बहुत बड़ी बात है, पर अमीर उद्योगपति बहुत आसानी से बैंक अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर अपना काम करा लेते हैं। जब एक बैंककर्मी रिश्वत लेता है, तो वह अपने बैंक और ग्राहकों को ही नहीं, देश की अर्थव्यवस्था को भी चूना लगाता है। चंदा कोचर जैसे बड़े बैंकर पर भी जब सवाल उठते हैं, तो बैंकिंग व्यवस्था से लोगों का विश्वास टूटता है। जितने दोषी विजय माल्या या नीरव मोदी जैसे कर्जदार उद्यमी हैं, उससे कहीं ज्यादा दोषी भ्रष्ट बैंकर हैं। सीबीआई अगर वाकई ऋण के भ्रष्ट तंत्र को जड़ से उखाड़ना चाहती है, तो उसे इस मामले को अंजाम तक पहुंचाना चाहिए। इसका फायदा देश को दिखना और होना चाहिए। बिना कड़ाई भ्रष्ट आचरण काबू में नहीं आ सकता।

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