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दूसरी लहर को लेकर व्यर्थ का दोषारोपण: महामारी के लिए केंद्र को कठघरे में खड़ा कर रहे राज्यों को अपने अंदर भी झांकना होगा

जनता से रिश्ता वेबडेस्क | [ संजय गुप्त ]: कोविड महामारी की दूसरी लहर के चरम पर पहुंचने के बाद ऐसा प्रतीत हो रहा है कि वह धीरे-धीरे ही सही, थम रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का आकलन है कि यह लहर कम तो हो रही है, पर इसके निष्क्रिय होने में समय लगेगा और इसीलिए तमाम शहरों में लॉकडाउन बरकरार रखना पड़ेगा। भारत जैसे विकासशील देश में लॉकडाउन लंबे समय तक बरकरार रखना बेहद चुनौतीपूर्ण है। ध्यान रहे कि पिछले साल कोविड महामारी ने आर्थिक तौर पर देश की कमर तोड़ कर रख दी थी। जब अर्थव्यवस्था पटरी पर आ रही थी, तब महामारी की दूसरी लहर आ गई, जो कि अनुमान से बहुत तेज निकली। इस दूसरी लहर में संक्रमण इतना भयंकर है कि पिछले साल जनता जो हौसला दिखा रही थी, वह इस बार नहीं दिखा पा रही। इस बार अन्य लोगों की तरह कारोबार जगत के भी कई लोग संक्रमण की भेंट चढ़ गए हैं। स्वजनों, कर्मियों और दोस्तों को खोने की पीड़ा झेल रहे कारोबारी समुदाय को अपने हौसले को बनाए रखना होगा और जैसे ही स्थितियां सामान्य होती दिखें, तेजी से सक्रिय होना होगा।





