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- भाजपा की नई चुनौतियाँ...

दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी नई टीम की घोषणा कर दी है . उन्होंने कुछ मोहरे कुछ प्यादे बदल कर नई तैयारियां शुरू कर दी है.उनका का सबसे पहला इम्तेहान हिमालयनुमा उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव हैं . उत्तर प्रदेश में भाजपा के लिए फ़तह हासिल करना नामुमकिन नहीं मुश्किल ज़रूर है. बहरहाल,भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने पद संभालने के 209 दिन बाद 65 सदस्यों की कार्यकारिणी का जो ऐलान किया है उसमें राम माधव को उपाध्यक्ष और स्मृति ईरानी को महासचिव बनाकर वापसी कराई है.भाजपा आईटी सेल के प्रभारी अमित मालवीय की ज़िम्मेदारी दीपक म्हस्के को सौंपी है. राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष अपने पदों पर बने रहेंगे. नितिन नवीन की टीम में 12 महिलाएं हैं। यूपी से दो मुस्लिम चेहरे तारिक मंसूर और बासित अली को शामिल किया गया है. टीम में 13 उपाध्यक्ष, 8 महासचिव, 16 सचिव और 28 सदस्य शामिल हैं.
नितिन नवीन अभी 45 के हैं उनमें नया जोश है और उनके पास नया मैनेजमेंट भी है. बिहार के बांकीपुर में जो शिकस्त मिली है उसने उनके दुर्बल हो चुके हौसलों को नई उड़ान दी है.कहावत है कि इंसान ठोकर खाकर ही ठाकुर बनता है और आने वाले समय में नितिन अपने को साबित भी करेंगे.औसत उम्र कम होने से पता चलता है कि भाजपा की दूसरी पीढ़ी के नेतृत्व को मजबूत करने की सोची-समझी कोशिश की गई है. युवा पदाधिकारी नए विचार, संगठन में ज्यादा ऊर्जा और युवा वोटरों के साथ बेहतर जुड़ाव ला सकते हैं. साथ ही, उनकी मौजूदगी भविष्य के लिए नेतृत्व की एक मजबूत क़तार भी तैयार करती है.लेकिन असली चुनौती भी यहीं से शुरू होती है. अलग-अलग क्षमताओं और महत्वाकांक्षाओं वाले नेताओं को एक सूत्र में बांधना, राज्यों में गुटबाजी को नियंत्रित करना, डिजिटल नैरेटिव को विपक्ष के हमलों के सामने प्रभावी बनाना, संगठन और सरकार के बीच तालमेल कायम रखना और आगामी चुनावों में इन नियुक्तियों के जरिये साधे गये सामाजिक समीकरणों को वास्तविक वोटों में बदलना आसान नहीं होगा। नितिन नवीन ने टीम तो बना ली है अब इसे नतीजों में तब्दील कर राजनीतिक ताकत में बदलना उनका सबसे कठिन इम्तेहान होगा.
राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की नई संगठनात्मक टीम में युवा, महिलाओं की भागीदारी और राजनीतिक अनुभव का खास मेल देखने को मिलता है. उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस बदलाव का मक़सद एक ज्यादा ऊर्जावान और सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाला नेतृत्व ढांचा तैयार करना है. इसी में महिलाओं हिस्साभी एक और अहम पहलू है. संगठन के 65 पदों में से 12 पद महिलाओं को मिले हैं, जिनमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के 13 पदों में से छह पद शामिल हैं। वसुंधरा राजे, स्मृति ईरानी और डी. पुरंदेश्वरी जैसी प्रमुख नेताओं को शामिल करने से पार्टी के वरिष्ठ निर्णय लेने वाले ढांचे में महिलाओं की मौजूदगी और मजबूत हुई है. बीते कुछ सालों में क्योंकि महिला वोटर चुनावी लिहाज से एक बहुत महत्वपूर्ण वर्ग बन गई हैं.
संसद के मॉनसून सत्र के दौरान गृह मंत्री अमित शाह सदन में दिखाई नहीं दिए लेकिन संसद के अंदर ही कई राउंड की हाई-लेवल बैठकें कीं, जबकि विपक्ष के हंगामे ने सदन की कार्यवाही रोक दी. जबकि कैबिनेट में फेरबदल की अफवाहें शुरू में राज्यसभा चुनाव के बाद सामने भी आयीं , कई सियासी पंडितों का दावा है कि नीट प्रदर्शनों के चलते कुछ बदलाव ठन्डे बस्ते में डाल दिए थे वे अब पार्टी में दिखाई देने लगे हैं .
नितिन नवीन के आने के बाद, इस स्ट्रेटेजिक बदलाव का मक़सद टॉप मंत्रियों के साथ-साथ युवा और महिला नेताओं की बड़ी संख्या को शामिल करके, पुराने अनुभव और नए नज़रिए के बीच संतुलन बनाना है, ताकि 2029 के लिए रास्ता तैयार किया जा सके. यानी एक बार पार्टी की नई लाइनअप तय हो जाने के बाद, मंत्री मंडल में फेरबदल होने की संभावना है.इन बदलाव में दीपक म्हस्के को भाजपा ने पार्टी के आईटी सेल का नया प्रमुख बनाकर भी नया सन्देश दिया है. खास बात यह है कि म्हास्के की पहचान सिर्फ राजनीतिक संगठनकर्ता के तौर पर नहीं है.वे केमिस्ट्री के प्रोफेसर रह चुके हैं और चुनावी डेटा एनालिसिस, कृषि, सरकारी योजनाओं और पब्लिक सेक्टर में काम का अनुभव रखते हैं.आईटी और सोशल मीडिया सेल की कमान अब छत्तीसगढ़ के दीपक म्हास्के को दी गई है वहीं अनिल बलूनी मीडिया प्रभारी की अपनी जिम्मेदारी पर कायम हैं यानी भाजपा ने डिजिटल मोर्चे पर चेहरे में बदलाव किया है, लेकिन मीडिया प्रबंधन के मौजूदा ढांचे में निरंतरता बनाए रखी है.
मोर्चों की कमान भी सामाजिक और चुनावी विस्तार को ध्यान में रखकर तय की गई है। युवा मोर्चा के अध्यक्ष डॉ. हेमंग जोशी, महिला मोर्चा की अध्यक्ष रूप कुमारी चौधरी, ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष अमरपाल मौर्य, किसान मोर्चा के अध्यक्ष बंसीलाल गुर्जर, एससी मोर्चा के अध्यक्ष शिवेश कुमार राम, एसटी मोर्चा के अध्यक्ष डॉ. मन्नालाल रावत और अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष कुंवर बसीत अली बनाए गए हैं. इससे भाजपा ने समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच संगठनात्मक पहुंच को मजबूत करने की कोशिश की है.वित्तीय मोर्चे पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष और राजस्थान के राजेश मंगल को संयुक्त कोषाध्यक्ष बनाया गया है. पीयूष गोयल के प्रशासनिक और आर्थिक अनुभव का लाभ संगठन के वित्तीय प्रबंधन को मिल सकता है. पीयूष गोयल पहले भी पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रह चुके हैं. यहां सवाल यह है कि अब देखना यह होगा कि 'एक व्यक्ति एक पद' के सिद्धांत को महत्व देने वाली भाजपा क्या पीयूष गोयल से केंद्रीय मंत्री का पद छोड़ने को कहती है या फिर वह दोनों पदों पर बने रहेंगे?कुल मिलाकर नितिन नवीन की टीम का संदेश साफ है कि भाजपा अब संगठन को केवल पदाधिकारियों की सूची के रूप में नहीं, बल्कि चुनावी मशीनरी के रूप में कसना चाहती है. राम माधव की रणनीतिक समझ, वसुंधरा राजे का जनाधार, स्मृति ईरानी की आक्रामक राजनीतिक शैली, सुनील बंसल का संगठनात्मक अनुभव, पीयूष गोयल की प्रशासनिक क्षमता और दक्षिण-पूर्वोत्तर से आए नेताओं का क्षेत्रीय अनुभव पार्टी के लिए अलग-अलग मोर्चों पर उपयोगी साबित हो सकता है.
इन बड़े बदलाव से भाजपा अहम राज्य विधानसभा चुनावों की तैयारियों को और तेज़ करेगी, खासकर उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राजनीतिक रूप से अहम राज्यों में. सरकार से पार्टी में होने वाले बदलावों के बारे में सुराग के लिए इस घोषणा पर करीब से नज़र रखी जाएगी: पार्टी इस काम में पार्टी के वरिष्ठों भूमिकाओं को भी ध्यान में रखेगी , जबकि पार्टी के अहम पदाधिकारियों को 2027 और 2029 से पहले क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, चुनावी संतुलन और नेतृत्व की लकीर को ठीक करने के लिए केंद्रीय मंत्रि मंडल में शामिल किया जा सकता है.इसके अलावा, स्मृति ईरानी की वापसी इस टीम का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश है.उन्हें उत्तर प्रदेश का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है. आक्रामक राजनीतिक शैली, संसदीय अनुभव और विपक्ष के खिलाफ मुखर राजनीतिक लड़ाई के लिए पहचाने जाने वाली स्मृति ईरानी को संगठन के शीर्ष स्तर पर लाना बताता है कि भाजपा उत्तर प्रदेश जैसे निर्णायक राज्य में राजनीतिक सक्रियता को और धार देना चाहती है. बंगाल चुनाव के बाद स्मृति और बिप्लब का कद बढ़ा स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है. 2024 में अमेठी लोकसभा चुनाव हारने के बाद वे केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर हुई थीं, लेकिन पार्टी के चुनावी अभियानों में सक्रिय रहीं. 2026 के पश्चिम बंगाल चुनाव में उन्होंने बंगाली में प्रचार किया. उनकी नई भूमिका को 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपने राष्ट्रीय संगठन में प्रदेश को खास तवज्जो देकर सियासी संदेश साफ कर दिया है. नवीन की नई टीम में उत्तर प्रदेश से आठ नेताओं को जगह मिली है.संगठन में प्रतिनिधित्व तय करते समय जातीय और क्षेत्रीय संतुलन के साथ पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक वोट बैंक पर भी पार्टी का फोकस साफ नजर आया है. इसे समाजवादी पार्टी के पीडीए समीकरण की काट के तौर पर भी देखा जा रहा है.नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश से दो राष्ट्रीय महामंत्री बनाए गए हैं. आठ राष्ट्रीय महामंत्रियों में दो उत्तर प्रदेश से हैं, जबकि अन्य राज्यों से एक-एक चेहरे को यह जिम्मेदारी मिली है. भाजपा ने इस बार संगठन में अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व को भी प्रमुखता दी है. प्रो. तारिक मंसूर और कुंवर बासित अली को राष्ट्रीय टीम में शामिल कर पार्टी ने मुस्लिम समाज तक राजनीतिक पहुंच मजबूत करने का संकेत दिया है.भाजपा में हर व्यक्ति पहले एक कार्यकर्ता है और पार्टी जरूरत के अनुसार कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपती है. बहरहाल ,भाजपा एक राष्ट्रीय पार्टी और दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है. यहां हर कोई कार्यकर्ता है और पार्टी ने यही सोच को आगे बढ़ाते हुए कुछ लोगों को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी है।
रफ़ीक़ विसाल
वरिष्ठ पत्रकार





