सम्पादकीय

बीजेपी का मास्टर स्ट्रोक

Subhi
1 July 2022 8:29 AM IST
बीजेपी का मास्टर स्ट्रोक
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करीब दस दिन की जद्दोजहद के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बुधवार रात दिए इस्तीफे से जिस घटनाक्रम का एक चरण पूरा हुआ, उसी का अगला चरण गुरुवार को शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे के सीएम पद के शपथ ग्रहण पर जाकर समाप्त हुआ।

नवभारत टाइम्स: करीब दस दिन की जद्दोजहद के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बुधवार रात दिए इस्तीफे से जिस घटनाक्रम का एक चरण पूरा हुआ, उसी का अगला चरण गुरुवार को शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे के सीएम पद के शपथ ग्रहण पर जाकर समाप्त हुआ। आखिरी पलों तक यही माना जा रहा था कि बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री होंगे और एकनाथ शिंदे उपमुख्यमंत्री। लेकिन एकदम नाटकीय घटनाक्रम के तहत राजभवन में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में देवेंद्र फडणवीस ने शिंदे के अगला मुख्यमंत्री होने की घोषणा करके सबको चौंका दिया। बीजेपी के इस मास्टरस्ट्रोक ने प्रदेश में राजनीति की बिसात पर अब तक चली जा रही सभी चालों को निरस्त कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे कह चुके हैं कि अगर मेरे बाद कोई शिवसैनिक मुख्यमंत्री हुआ तो मुझे खुशी होगी। उस घोषणा के पीछे भी यही आकलन था कि बड़ी पार्टी होने के नाते बीजेपी मुख्यमंत्री पद अपने पास ही रखेगी। बागी विधायकों के पास अधिक से अधिक उपमुख्यमंत्री का पद ही आएगा। दलील यह थी कि आखिर शिवसेना और बीजेपी के अलगाव का मूल कारण भी मुख्यमंत्री पद ही था। बीजेपी अधिकारियों के अनौपचारिक बातचीत में दिए गए एक कथित वादे का हवाला देते हुए शिवसेना मुख्यमंत्री पद मांग रही थी जबकि बीजेपी का कहना था कि ऐसा कोई वादा किया ही नहीं गया था और ज्यादा विधायकों वाली पार्टी के नाते इस पद पर उसका हक है।

मगर इन तमाम दलीलों को गलत साबित करते हुए बीजेपी ने शिंदे को मुख्यमंत्री पद देकर एक तीर से कई शिकार कर लिए हैं। तात्कालिक तौर पर ठाकरे परिवार जिस विक्टिम कार्ड पर सबसे ज्यादा भरोसा कर रहा था, वह लगभग बेअसर हो चुका है। बीजेपी कह सकती है कि हमने तो शिवसैनिक को ही सत्ता सौंपी है। बागी विधायकों का समूह भी उद्धव ठाकरे के पहले के बयान का हवाला देते हुए उनसे समर्थन देने की अपील कर सकता है। बाला साहब ठाकरे के हिंदुत्व को आगे ले जाने की शिंदे की घोषणा अब आम शिवसैनिकों के लिए अविश्वसनीय नहीं रह जाएगी। वह विभाग प्रमुख, जिला प्रमुख और शाखा प्रमुख के स्तर तक शिवसैनिकों को खुद से जोड़ने या दूसरे शब्दों में पार्टी संगठन पर कब्जा करने का प्रयास करेंगे। दूसरी तरफ, उद्धव भी कार्यकर्ताओं को अपने साथ बनाए रखने के लिए पूरा जोर लगाएंगे। बीजेपी की रणनीति की बात करें तो उसका मकसद राज्य में पार्टी का विस्तार है, जो हिंदुत्व की राजनीति करने वाली शिवसेना की कीमत पर ही हो सकता है। ऐसा नहीं लगता कि बीजेपी इसे लेकर बहुत जल्द आक्रामक रुख अपनाएगी क्योंकि इससे शिंदे के साथ संबंधों पर आंच आ सकती है। यह देखना होगा कि लंबी अवधि में हिंदुत्व की राजनीति के विस्तार के लिए राज्य में पार्टी क्या करती है। इससे भी बड़ी बात यह है कि महाराष्ट्र में विपक्ष के हाथ से सत्ता छीनकर बीजेपी ने अगले लोकसभा चुनाव से पहले उसे बड़ा झटका दिया है।


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