सम्पादकीय

सेना और हथियार-1

Rani Sahu
8 Oct 2021 7:00 PM GMT
सेना और हथियार-1
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पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने आजादी का अमृत महोत्सव मनाया और उसमें सरकार द्वारा किए गए कामों का व्याख्यान किया

पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने आजादी का अमृत महोत्सव मनाया और उसमें सरकार द्वारा किए गए कामों का व्याख्यान किया, पर जिस क्षेत्र में इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा था उससे कुछ ही दूर लखीमपुर खीरी में उससे एक दिन पहले एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के समूह पर गाड़ी चढ़ा दी गई जिससे कुछ किसानों को जान से हाथ धोना पड़ा तो कुछ गंभीर रूप से घायल हो गए। किसानों का आरोप है कि इस गाड़ी को चलाने वाला शख्स केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा का बेटा आशीष मिश्रा था। हादसे के बाद सरकार ने व्यवस्था को नियंत्रण करने के लिए आनन-फानन में किसानों द्वारा रखी गई मांगों को पूरा करते हुए मुआवजा देने की शर्तें मान ली, पर प्रश्न यह उठता है कि इस घटना को अंजाम देने वाला मानसिक रूप से रोगी व्यक्ति जो भी हो, उसकी गिरफ्तारी अभी तक नहीं हो पाई है। विपक्ष ने जब इस पर प्रश्न उठाना शुरू किए और पीडि़त परिवारों से मिलने की इच्छा जताई तो सरकार ने उनको जगह-जगह पर हिरासत में लेना शुरू कर दिया। इस सारे घटनाक्रम में विपक्षी नेता श्रीमती प्रियंका गांधी ने जिस तरह की परिपवक्ता और दृढ़ निश्चय का परिचय दिया है, उससे मनमानी कर रही सरकार पर कुछ अंकुश लगा। स्थिति की गंभीरता को समझना इसलिए भी जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट को इस घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए नामजद आरोपियों से पूछताछ करने की बात कहनी पड़ी और खबर यह भी आ रही है कि मुख्य आरोपी शायद देश छोड़कर बाहर जा चुका है और अगर यह सच है तो पिछले छह दिन से सरकार का आरोपी के प्रति ढुलमुल या ढीला रवैया इसके लिए जिम्मेदार है।

इसके लिए सरकार की जवाबदेही बनती है। प्रश्न यह नहीं कि गलती किसकी थी, प्रश्न यह भी नहीं कि मुख्य आरोपी किसी विशेष विचारधारा का था, प्रश्न यह है कि उसकी मानसिक स्थिति कितनी वीभत्स और विकृत होगी, जो आदमी जिंदा इंसानों पर गाड़ी चला सकता है और ऐसा मुख्यता व्यक्ति तभी करता है जब वह या तो मानसिक रोगी हो या फिर सत्ता के नशे में चूर हो। प्रत्यक्षदर्शियों का मानना है कि गाड़ी चढ़ाने के बाद मुख्य आरोपी अपने हाथ में हथियार लिए गोलियां चलाते हुए उस भीड़ से बाहर निकला है। बात जब हथियार की हो रही हो तो हमारे देश में जिस संस्था को सबसे ज्यादा हथियारों की जरूरत है, वह है भारतीय सेना। आज जो अंतरराष्ट्रीय स्थिति बन रही है, जब हमारे पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान, अफगानिस्ता में तालिबान को जिस तरह से प्रोत्साहित कर रहे हैं, उससे उनके अगले मंसूबे का भली-भांति अंदाजा लगाया जा सकता है। इसके लिए बड़ा जरूरी है कि सरहदों पर डटे हमारे सैनिकों को आधुनिक और अच्छे हथियार उपलब्ध करवाए जाएं। इसी कड़ी में भारत और रूस के बीच हुए एस-400 हथियारों के सौदे से भारत की ताकत में हुए इजाफे के साथ-साथ रूस के साथ संबंध सुदृढ़ होने की बात चल रही है, तो यह सौदा अमरीका को नहीं भा रहा है। -क्रमशः
कर्नल (रि.) मनीष धीमान
स्वतंत्र लेखक


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