सम्पादकीय

13वें राउंड की बातचीत के बाद चीन की घुड़की, भारत माने उसकी बात नहीं तो फिर संघर्ष का खतरा

Gulabi
11 Oct 2021 3:03 PM GMT
13वें राउंड की बातचीत के बाद चीन की घुड़की, भारत माने उसकी बात नहीं तो फिर संघर्ष का खतरा
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भारत माने उसकी बात नहीं तो फिर संघर्ष का खतरा

विष्णु शंकर।

भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में LAC पर चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए रविवार को 13वें राउंड को बातचीत बेनतीजा रही. बैठक चुशूल-मोल्डो बॉर्डर पोस्ट पर चीन की तरफ आयोजित की गई और लम्बी चली. कहानी यह नहीं है कि यह मुलाक़ात बेनतीजा रही, सच्चाई छिपी है उन बयानों में जो भारत और चीन ने बैठक के बाद दिए. भारत ने कहा कि LAC पर बनी स्थिति की वजह द्विपक्षीय समझौतों को नकारते हुए चीन के वे एकतरफा क़दम थे जिनकी वजह से वहां यथास्थिति को बदलने की कोशिश की गई.


भारत ने मीटिंग में कहा की स्थाई शांति बहाल करने के लिए LAC के पश्चिमी सेक्टर में चीन को बची हुई विवादित जगहों पर वो ज़रूरी क़दम उठाने की ज़रूरत है जिनसे यथास्थिति फिर की जा सके. भारत ने विवादित जगहों पर समाधान के लिए बैठक में कई रचनात्मक सुझाव दिए, लेकिन चीन ने इन्हें नहीं माना. इतना ही नहीं, भारत का कहना है कि खुद चीन के पास विवाद को सुलझाने के कोई प्रस्ताव नहीं थे इसलिए मीटिंग बेनतीजा रही.


लेकिन, जैसा हर ऐसी बैठक के बाद कहा जाता है, भारत ने अपने बयान में कहा कि दोनों पक्ष संवाद बनाए रखने और जमीन पर भी स्थिरता बनाए रखने को राजी हैं. भारत को उम्मीद है कि चीन दोनों देशों के आपसी संबंधों के महत्व को देखते हुए बाकी बचे हुए विवादित मुद्दों को जल्दी से जल्दी सुलझाने की कोशिश करेगा. ये तो हुआ भारत का नजरिया, अब जरा चीन का बयान भी सुन लीजिए.

अंग्रेजी अखबार ग्लोबल टाइम्स का धमकी भरा अंदाज
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के अंग्रेजी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने धमकी भरे अंदाज में इस बातचीत की रिपोर्टिंग की है और यहां तक कह दिया कि भारत ने बैठक में सोच समझ से परे यानी अनुचित मांगें रखीं, जिनसे एक नए संघर्ष का खतरा है. ग्लोबल टाइम्स ने चीनी फौज PLA के पश्चिमी थिएटर कमांड के सीनियर कर्नल लॉन्ग शाओहुआ के हवाले से आरोप लगाया कि भारत की मांगें अनुचित और अवास्तविक थीं और भारत ने LAC के पूर्वी हिस्से में हाल ही में नई घटनाओं को अंजाम दिया है.

शायद यह जिक्र उत्तराखंड से सटे LAC सेक्टर के बाराहोती इलाके में चीनी सैनिकों की घुसपैठ के बारे में था, जिसमें 30 अगस्त को 100 से ज़्यादा PLA फौजी भारतीय सीमा में घुस आए थे. वहां इन सैनिकों ने एक पुल और कुछ और संरचनाओं को नुकसान पहुंचाया और वापस लौट गए. इसी को कहते हैं उल्टा चोर कोतवाल को डांटे! ग्लोबल टाइम्स के अनुसार चीन ने पूरे मुद्दे पर फोकस करते हुए चाहा कि दो कदम चीन चले और दो कदम भारत, लेकिन अब चीन का धीरज टूट रहा है और उसे भारत के घमंड को चूर करना पड़ेगा. अब इसे धमकी नहीं तो और क्या कहेंगे.

अपनी रिपोर्ट के आखिर में ग्लोबल टाइम्स चेतावनी देता है कि अगर भारत आगे की बातचीत में चीन के रवैये की अनदेखी करता है और अपने "आक्रामक" रवैये को नहीं बदलता है, तो एक और घटना या संघर्ष की स्थिति बन सकती है. भारतीय सेना के इंटीग्रेटिड डिफेंस स्टाफ के उप प्रधान लेफ्टिनेंट जनरल पी जे एस पन्नू का कहना है कि भारत-चीन सीमा 3,500 किलोमीटर लम्बी है और अधिकतर हिस्सों में निर्धारित यानी सीमांकन नहीं है. सीमा कहां शुरू और खत्म होती है इस पर दोनों पक्षों की अपनी अपनी समझ है.

अपनी समझ के हिसाब से भारतीय और चीनी सैनिक इन सीमाओं पर पेट्रोलिंग करते हैं और फ्लैग मार्च निकालते हैं, लेकिन पेट्रोलिंग के बाद दोनों तरफ के सैनिक वापस लौट जाते हैं. अगर ऐसा नहीं होता है और चीनी सैनिक भारत के अनुसार उसकी सीमा में पाए जाते हैं तो उन्हें वहां से निकलने की कार्रवाई की जा सकती है, ऐसे में सैनिक संघर्ष का खतरा हो जाता है.

'भारत की अपनी नीतियां और अपने राष्ट्रीय हित हैं'
जनरल पन्नू के अनुसार, 12वें राउंड की बातचीत के बाद पूर्वी लद्दाख के गोगरा हाइट्स सेक्टर में पेट्रोलिंग पॉइंट 17 A से दोनों सेनाएं पीछे हटी थीं, लेकिन हॉट स्प्रिंग्स और देपसांग बुलगे इलाकों में ऐसा होना बाकी है. फरवरी 2021 में हुई सहमति के बाद पूर्वी लद्दाख के सभी सेक्टर्स से फौजों का पीछे हटना तय हुआ था, सिर्फ पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों से नहीं. लेकिन चीन ऐसा नहीं कर रहा है.

जनरल पन्नू मानते हैं कि अगर चीन फरवरी 2021 के समझौते को पूरा लागू नहीं करता है तो इसका मतलब होगा कि वह भारत को अपने तेवर दिखा कर यह संकेत देने की कोशिश कर रहा है कि वह अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दुनिया के दूसरे कोनों में भारत की नीति और रवैये से चिंतित और परेशान है. चीन चाहता है कि इन इलाकों में भारत अपने मित्र देशों की बजाय उसकी चिंताओं पर ध्यान दे और उसकी बात माने.

लेकिन, जनरल पन्नू मानते हैं कि भारत की अपनी नीतियां और अपने राष्ट्रीय हित हैं, जिनकी रक्षा करना भारत का कर्तव्य है. इसलिए यह बड़ा ज़रूरी है कि ये दोनों देश एक दूसरे की उम्मीदों को समझें और उनका सम्मान करें. सिर्फ भारत ही नहीं, चीन को भी ये बात अच्छे से समझने की जरूरत है. तभी बात आगे बढ़ पाएगी.


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