सम्पादकीय

सत्ता के 20 साल : गुजरात को "ब्रैंड गुजरात" बनाकर नरेंद्र मोदी ने की प्रशासनिक पारी की शुरुआत

Gulabi
7 Oct 2021 9:02 AM GMT
सत्ता के 20 साल : गुजरात को ब्रैंड गुजरात बनाकर नरेंद्र मोदी ने की प्रशासनिक पारी की शुरुआत
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गुजरात को "ब्रैंड गुजरात"

पंकज कुमार।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) ने साल 2001 में गुजरात (Gujarat) के सीएम की कुर्सी पर बैठते ही प्रशासनिक कुशलता की अपनी छाप छोड़ दी थी. गुजरात का मुख्यमंत्री बनते ही नरेंद्र मोदी ने कुछ ऐसे कार्य किए जो बाद में मोदीनॉमिक्स के नाम से पूरे देश में चर्चित हुआ. इसके बाद नरेंद्र मोदी ने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा और राज्य की जनता उन्हें लगातार साल 2001 से 2014 तक राज्य की बागडोर सौंपती रही. राज्य में मिली बेमिसाल लोकप्रियता की वजह से साल 2014 में देश की जनता ने नरेन्द्र मोदी को देश का पीएम बना दिया और तबसे अब तक देश की सत्ता उनके हाथों में ही मौजूद है.


ये मोदी शासन का ही कमाल है कि पिछले दो दशकों से गुजरात विकास का पर्याय बन चुका है. मोदी के शासनकाल में विकास किसी एक सेक्टर में नहीं बल्कि कई अन्य सेक्टर्स में हुआ, जिसे संतुलित विकास का नाम दिया गया. सर्विस सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर या फिर कृषि आधारित विकास के शानदार आंकड़ों ने संतुलित विकास में भरपूर योगदान दिया. गुजरात का औसत वर्षिक विकास दर साल 2004-2005 और 2011-12 के बीच 10.08 फीसदी था जो शासन की सफलता की कहानी बखूबी बयां कर रहा था.
गुजरात को विकास का पर्याय बनाने का श्रेय मोदी को क्यों ?
साल 2005-06 में गुजरात में रिकॉर्ड ग्रोथ रेट दर्ज हुई थी जो 15 फीसदी के करीब थी. इस दरमियान तीन बेहतरीन ग्रोथ रेट वाले राज्यों पर ध्यान दें तो महाराष्ट्र का ग्रोथ रेट 10.75 फीसदी, तमिलानडु का 10.27 फीसदी और बिहार का 11.42 फीसदी था. कहा जाता है कि बिहार का ग्रोथ बेहद निचले स्तर पर था इसलिए 11.42 फीसदी का ग्रोथ स्वाभाविक था. जबकि महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्य लंबे समय से विकसित राज्यों में गिने जाते रहे हैं. मोदी राज में अपनाए गए बेहतरीन आर्थिक नीति को दुनिया "मोदीनॉमिक्स" के नाम से पुकारने लगी.

साल 2000 से लेकर 2012 तक राज्य में 3 हजार रूरल रोड प्रोजेक्ट्स पूरी की गईं वहीं 2004-05 से 2013-14 के बीच बिजली प्रत्येक इंसान की खपत के लिए 41 फीसदी ज्यादा उपलब्ध थी. गुजरात के आर्थिक तरक्की का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2000 से 2010 के बीच सर्विसेज और गुड्स के वैल्यू की वजह से जीएसडीपी 9.8 फीसदी हो गई. जबकि देश का आंकड़ा 7.7 फीसदी था. ज़ाहिर है देश के औसत आंकड़े से गुजरात कहीं आगे निकल चुका था, इसलिए राज्य के संतुलित विकास की चर्चा देश ही नहीं दुनिया में होने लगी.
इन्वेस्टर्स को लुभाने का सफल प्रयास
मोदी ने साल 2003 में वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल इन्वेस्टर्स सम्मेलन करा पूरी दुनिया का ध्यान खींचा. वाइब्रेंट गुजरात के जरिए नरेन्द्र मोदी 'ब्रांड गुजरात' बनाने में सफल साबित हुए. साल 2003 में 76 एमओयू के जरिए 66 हजार से बढ़कर साल 2011 में 8,380 एमओयू में परिवर्तित हुआ. ज़ाहिर है साल 2011 में इन्वेस्टर्स के बीच भरोसा बढ़ाने में कामयाब रहे मोदी 21 लाख करोड़ के विनिवेश के लिए उद्योगपतियों को राजी कर चुके थे. इन्वेस्टर्स गुजरात में बिजेनस फ्रेंडली एनवायर्नमेंट की वजह से आकर्षित हो रहे थे जहां बेहतरीन इंफ्रस्ट्रक्चर की वजह से विनिनेश बढ़ाने में सहूलियत हो रही थी.

फोर्ड, सुजूकी और टाटा जैसी कंपनियों के लिए जटिल नौकरशाही की प्रक्रिया को मोदी ने बेहद आसान कर दिया और उद्योगपतियों की नजरों में बिजनेस फ्रेंडली प्रशासक के रूप में पहचाने जाने लगे. देश ही नहीं दुनिया में मोदी के शासन की धूम मची जब चंद दिनों में टाटा जैसे उद्योगपति को नैनो की फैक्ट्री लगाने के लिए पूरी तरह उन्होंने तैयार कर लिया. साल 2008 में बंगाल में नैनो के विरोध के लिए ममता आंदोलन कर रही थीं लेकिन नरेन्द्र मोदी ने इसे गुजरात के लिए अवसर में तब्दील किया जिसकी चर्चा दूर-दूर तक होने लगी. यही वजह बना कि गुजरात में होने वाला व्राइब्रेंट गुजरात समिट विनिवेश का शानदार माध्यम बना. इस कारण गुजरात उद्योगपतियों को अपनी ओर आकर्षित करने लगा
फूड डेफसिट राज्य से गुजरात बना फूड सरप्लस राज्य
नरेन्द्र मोदी का जोर कृषि के बढ़ावे पर भी उतना ही था जितना अन्य इंडस्ट्री सहित दूसरे सेक्टर पर. कृषि को उन्नत बनाने में बीटी कॉटन (जेनेटिकली मॉडिफाइड) को अपनाने पर जोर सहित, लघु सिंचाई,चेक डैम्स और 10 हजार छोटे कृषि मशीन कृषि की पैदावार बढ़ाने में बेहद कारगर साबित हुए. खाद्य पदार्थों की पैदावार में साल 2000 की तुलना में 100 फीसदी बढ़ गई. वहीं कपास के पैदावार में 200 फीसदी का इज़ाफा हुआ. बेहतरीन कृषि नीति की वजह से साल 2000 से 2010 तक गुजरात फूड डेफसिट से फूड सरप्लस राज्य बन पाने में कामयाब हुआ. राज्य में गेहूं की पैदावार 8 मिलियन टन से बढ़कर 40 मिलियन टन तक पहुंच गई, जबकि कपास की उपज पूरे देश के 40 फीसदी आंकड़े को पार कर चुकी थी.

दस वर्षों में डेढ़ लाख चेक डैम्स और न्यू इरीगेटेड एरिया साल 2000-01 में 31.4 फीसदी से बढ़कर 44.71 फीसदी 2006-07 में हो जाना गंभीर चुनौतियों से पार पाने जैसा था. जिसे मोदी सरकार अपनी नीतियों की वजह से पार पाने में कामयाबी हासिल की. राज्य में ग्रीन रिवॉल्यूशन कंपनी द्वारा सब्सिडी की वजह से पांच लाख हेक्टेयर जमीन को कवर किया जा सका जो राज्य को फूड डेफसिट से फूड सरप्लस बनाने में सहायक सिद्ध हुआ.
बिजली, सड़क और पानी जैसी समस्याओं से छुटकारा
बिजली की खपत और पैदावार किसी राज्य की समृद्धि का सूचकांक होती है. दस सालों में पावर जनरेशन और डिस्ट्रीब्यूशन में गुजरात में शानदार बढ़त देखी गई. राज्य में साल 2003-04 में 9 हजार मेगावाट से बढ़कर 2013 में 23 हजार 887 मेगावाट तक पहुंच जाना बिजली की पैदावार और खपत विकास की कहानी बखूबी बयां करती है. इस दरमियान मोदी सरकार ने ट्रांसमिशन लॉस पर ध्यान देकर उसको 35 फीसदी से घटाकर 15 फीसदी कर दिया और गुजरात को पावर सरप्लस राज्य बनाने में कामयाबी हासिल की.

मोदी का ध्यान आधारभूत संरचना को मजबूत करने पर भी था इसलिए शहर से लेकर गांव तक की सड़कों को मजबूत करना मोदी सरकार की प्राथमिकताओं में था. सड़कों के तीन हजार रूरल प्रोजेक्ट्स इस कड़ी में पूरे किए गए जो सरकार की प्राथमिकताओं का बेहतरीन उदाहरण बने. गुजरात पावर सरप्लस स्टेट बन चुका था और बेहतरीन रोड इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से एक पोर्ट से दूसरे पोर्ट पर जाना एक दिन के भीतर आसानी से संभव था. तत्कालीन मोदी सरकार ने गुजरात में अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने को लेकर भी कई प्रयास किए जिनमें अहमदाबाद और गांधीनगर, सूरत और भरूच को डिवेलप करना शामिल था. इतना ही नहीं लोकल बॉडी के मजबूत फाइनेंशियल स्टेटस की वजह से शहरी आधारभूत संरचना बेहतर होती गई और गुजरात लगातार विकास के रास्ते पर आगे बढ़ता रहा.

मोदी के लिए सबसे बड़ी चुनौती गुजरात के सौराष्ट्र, कच्छ और उत्तरी गुजरात के गांवों तक पानी पहुंचाने का था. नर्मदा और नहर से जुड़ी योजना को धरातल पर उतारकर मोदी ऐसा कर पाने में कामयाब हुए. इसलिए गुजरात में मोदी भागीरथ के नाम से भी पुकारने जाने लगे. नर्मदा गुजरात राज्य की जीवनदायिनी मानी जाती है और उसके पानी को सुदूर गांवों तक पहुंचाकर राज्य की सरकार लोगों का दिल जीतनें में कामयाब रही. आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर काम कर बिजली, सड़क, पानी को मोदी सरकार ने प्राथमिकताओं में लिया. सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई को लेकर केंद्र से दो-दो हाथ करने में भी मोदी ने गुरेज नहीं किया. वहीं नर्मदा बचाओ आंदोलन का भी बखूबी सामना किया. नहरों के ज़रिए कच्छ के भगीरथ कहलाने वाले मोदी, सुजलाम सुफलाम योजना की मदद से गुजरात भर में पानी का इंतज़ाम करने में बखूबी सफल रहे.

समाज के विकास के लिए महिलाओं के उत्थान पर दिया जोर
नरेन्द्र मोदी ने सामाजिक विकास के लिए महिलाओं के उत्थान पर विशेष जोर दिया. साल 2004-2005 में महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर मोदी सरकार ने विशेष ध्यान देना शुरू किया. बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कन्या केलवणी योजना सहित शाला प्रवेशोत्सव अभियान चलाया, जिसमें अधिकारियों और मंत्रियों को गांवों तक भेजकर ज़मीन पर उतारने का सफल प्रयास किया. मोदी सरकार ने बेटी बचाओ अभियान के लिए लिंग अनुपात पर विशेष ध्यान दिया. इतना ही नहीं हर स्कूल में शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की ताकि लड़कियों की शिक्षा में आने वाली दिक्कतों को दूर किया जा सके. ज़ाहिर है विकास के तमाम आयाम को छूने और उसे सफल बनाकर राज्य को विकास के पथ पर आगे बढ़ाने में कामयाब मोदी गुजरात को विकास का पर्याय बनाने में पूरी तरह कामयाब रहे. इसलिए पिछले दो दशकों से गुजरात विकास का पर्याय बन चुका है और देश के लिए एक नजीर.
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