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अनूठी परंपरा: माओरी समुदाय में संग्रहित की जाती हैं मरने वालों की खोपड़ियां

Gulabi
19 July 2021 1:09 PM GMT
अनूठी परंपरा: माओरी समुदाय में संग्रहित की जाती हैं मरने वालों की खोपड़ियां
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अनूठी परंपरा

दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न प्रकार की आदिवासी जनजातियां रहती हैं. अफ्रीका के घने जंगलों और रेगिस्तानों में रहने वाली जनजातियों से लेकर प्रशांत के द्वीपों पर रहने वाले समुदाय तक. हर आदिवासी समुदाय की अलग-अलग परंपराएं और रीति-रिवाज होते हैं. इन आदिवासियों की कुछ परंपराएं ऐसी होती हैं, जिन्हें जानकर आम लोग हैरान हो जाते हैं. ऐसा ही एक आदिवासी समुदाय है 'माओरी' (Maori), जो न्यूजीलैंड में बसा हुआ है. इस समुदाय की एक अनोखी परंपरा है, जिसके तहत मरने वाले लोगों के सिरों को संग्रहित किया जाता है. हालांकि, अब ये परंपरा बंद हो चुकी है.


मृतकों की इन संग्रहित खोपड़ियों को 'मोकोमोकई' कहा जाता था. न्यूजीलैंड में रहने वाले माओरी जनजाति पिछले सात सौ सालों से यहां रह रही है. इस समुदाय से आने वाले लोग अपने चेहरे पर एक खास तरह का टैटू बनवाते हैं. जिस तरह मिस्र में फराओं की मौत होने पर उनके शरीर को ममी के तौर पर संरक्षित कर रखने की परंपरा है. ठीक कुछ इसी तरह की परंपरा माओरी समुदाय की भी थी. माओरी समुदाय में ऊंचे पद वाले व्यक्ति की मौत होने पर उसके सिर को धड़ अलग कर दिया जाता था. इसके बाद खोपड़ी के भीतर मौजूद आंख और दिमाग जैसे अंगों को बाहर कर दिया जाता था.

कुछ इस तरह से संग्रहीत खोपड़ी को किया जाता था तैयार
माओरी समुदाय के लोग व्यक्ति के सिर को पानी में उबाल कर साफ कर लेते थे. फिर इसमें एक विशेष प्रकार के पदार्थ को डाला जाता था. इसके बाद फिर से उबाला या भट्टी की आंच पर पकाया जाता. वहीं, इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद खोपड़ियों को धूप में कई दिनों तक सूखने के लिए रख दिया जाता था. एक बार खोपड़ी सूख जाती थी तो फिर मृतक के चेहरे पर जिस तरह का टैटू बना हुआ होता था, ठीक वैसा ही टैटू फिर से खोपड़ी पर बनाया जाता था. इसके बाद इस पर शार्क का तेल लगाया जाता था. मृतक के परिवार के लोग इस खोपड़ी को संग्रहीत करके रखते थे और खास मौकों पर बाहर निकालते थे.

साल 1831 में खोपड़ियों की बिक्री पर लगाया गया बैन
माओरी समुदाय द्वारा संग्रहीत की जाने वाली इन खोपड़ियों की बिक्री यूरोप के बाजारों में होने लगी. इसके पीछे की वजह समुदाय द्वारा अपने प्रतिद्वंदी को अपमानित करना होता था. मस्कट युद्ध के दौरान इन खोपड़ियों की मांग बढ़ने लगी. इसके बाद 1831 में साउथ वेल्स के गवर्नर ने इन खोपड़ियों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया. इंग्लैंड की सेना के मेजर जनरल होरातियो गॉर्डन रोबले के पास भी इन खोपड़ियों का संग्रह था. टैटू आर्ट के दीवाने रोबले के पास ऐसे 35 सिर मौजूद थे. वहीं, आजकल मोकोमोकई यानी कि ये अनोखी खोपड़ियां कई संग्रहालयों में मौजूद हैं और उनकी शान बढ़ा रही हैं.


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