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धरती के सबसे एकांत स्थानों
दुनिया ने ऐसी तबाही कभी नहीं देखी थी, जैसी साल 2020 में कोरोना वायरस (Corona Virus Impact on World) की एंट्री का बाद देखी गई. दुनिया के नक्शे में शायद ही कोई जगह बची हो, जहां कोविड 19 (Covid 19 Free Place of the Earth) का असर नहीं देखा गया. ऐसी ही कुछ दुर्लभ जगहों में से एक है हिंद महासागर में मौजूद एकांत आइलैंड सेंटीनल आइलैंड ( North Sentinel Island). दावा किया जा रहा है कि यहां तक कोरोना वायरस नहीं पहुंच पाया, वैसे यहां पहुंच पाना हर किसी के बस की बात भी नहीं है.
Daily Star की रिपोर्ट के मुताबिक North Sentinel Island धरती के सबसे एकांत स्थानों में से एक है. यानि जिस सोशल डिस्टेंसिंग की बात कोरोना के दौरान की गई, वो दूरी पहले से ही इस आईलैंड के लोगों ने पूरी दुनिया से बना रखी है. अगर कोई यहां गलती से आ भी जाए, तो दुश्मनी से भरे यहां के लोग उन्हें वापस ज़िंदा नहीं जाने देते. आप ही बताइए, जब कोई यहां तक पहुंचेगा ही नहीं तो भला कोरोना वायरस कैसे आइलैंड में एंट्री पाएगा?
अजनबी देखते ही तीर चला देते हैं लोग
इस आइलैंड पर स्थानीय जनजाति के लोगों के अलावा कोई दूसरा नहीं रहता है. यहां कुल मिलाकर सिर्फ 350-400 लोग ही रहते हैं. इनकी खासियत ये है कि बाहर के किसी शख्स को देखते ही वे उसके तीर मार देते हैं. जी हां, आज भी इस जनजाति के लोग लड़ाई के लिए तीर-कमान का इस्तेमाल करते हैं. बताया जाता है कि इस आइलैंड पर जनजाति का वास पिछले 60 हज़ार सालों से भी ज्यादा वक्त से है. जो भी इस दौरान जनजाति के करीब आया, वो वापस नहीं लौटा या फिर उसके मरने की खबर आई. बताते हैं साल 2006 में दो लोग इनके आसपास के इलाके में मछली पकड़ रहे थे, जिन्हें जनजातीय लोगों ने तीर से मार दिया.
आइलैंड पर आना, मतलब मौत को दावत देना
सेंटीनल जनजाति से आबाद ये आइलैंड अंडमान द्वीप समूह का हिस्सा है और म्यांमार की सीमा से करीब 500 मील की दूरी पर है. इनके इलाके के 3 मील के एरिया में अगर कोई दिख जाए, तो ये उसे दुश्मन मान लेते हैं. अब ये कोई इंसान भी हो सकता है या फिर हेलीकॉप्टर या प्लेन भी. बताते हैं कि जनजाति के लोगों ने कई बार प्लेन और हेलीकॉप्टर पर भी पत्थर फेंके हैं और तीर छोड़े हैं. ये खुद को बाकी दुनिया से बिल्कुल अलग रखते हैं और यही वजह है कि कोरोना जैसी महामारी के दौरान भी यहां कोई बीमार नहीं हुआ.
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