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इस शख्स ने दिखाया प्रकृति से प्यार, अकेले लगा दिए 8 लाख से ज्यादा पौधे

Gulabi
5 Jun 2021 1:31 PM GMT
इस शख्स ने दिखाया प्रकृति से प्यार, अकेले लगा दिए 8 लाख से ज्यादा पौधे
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प्रकृति से प्यार

ये कहते तो सब हैं कि पेड़ काटने की वजह से पर्यावरण को काफी नुकसान हो रहा है और इस वजह से काफी दिक्कतें भी हो रही हैं. लेकिन, बहुत ही कम लोग होते हैं, जीवन में लगातार पौधे रहते हैं और इस पर्यावरण के लिए अपनी ओर कुछ योगदान करते हैं. मगर कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने कम होती हरियाली को रोकने का प्रयास कर रहे हैं. इसी में एक नाम है राजस्थान के विष्णु लांबा. विष्णु लांबा बिना किसी स्वार्थ के पौधारोपण का काम कर रहे हैं और अभी तक लाखों पेड़ लगा चुके हैं और उनकी टीम ने मिलकर करोड़ों पेड़ों को बचाने का काम किया है.

विष्णु लांबा ने पर्यावरण के लिए काम करने के लिए ना सिर्फ अपना घर छोड़ दिया, बल्कि वो पिछले 25 सालों से प्रकृति को भगवान मानकर उसकी सेवा कर रहे हैं. विष्णु लांबा के पर्यावरण के प्रति काम को देखकर उन्हें लोग ट्रीमैन ऑफ इंडिया के नाम से जानते हैं. बता दें कि विष्णु लांबा बिना सरकारी सहयोग के अब तक करीब साढ़े आठ लाख पेड़ लगा चुके हैं और उन्होंने अपनी जान पर खेलकर करीब 13 लाख पेड़ों को बचाया है और 11 लाख से ज्यादा पौधे निःशुल्क बांट भी चुके हैं.
विष्णु लांबा ने राजस्थान के टोंक में एक छोटे से गांव अपने इस काम की शुरुआत की थी और अब उनकी मुहिम से देश के 22 राज्यों के लाखों युवा जुड़ चुके हैं. उन्होंने सिर्फ सात साल की उम्र से ही पौधे लगाने शुरू कर दिया थे और फिर उन्हें लगाने के लिए पौधे नहीं मिलते थे तो वो पौधे चुरा कर पौधे लगाने लगे. आज लोग उन्हें 'ट्री मैन ऑफ इंडिया' के नाम से जानते हैं.
उनका कहना है कि अगर कोई अपनी जिंदगी में पांच पेड़ नहीं लगाता है तो उसे चिता पर जलने का हक नहीं है. वो लगातार लोगों को पेड़ लगाने का संदेश दे रहे हैं. विष्णु लांबा के इन ऐतिहासिक कार्यों के बाद उन्हें राष्ट्रीय राजीव गांधी पर्यावरण पुरस्कार, अमृता देवी बिश्नोई पुरस्कार, डॉ एपीजे अब्दुल कलाम राष्ट्र निर्माण पुरस्कार, ग्रीन आइडल अवॉर्ड सहित 100 से ज्यादा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.
पौधे लगाने के अलावा किए कई ऐतिहासिक कार्य
लाखों पेड़ों को जान लेने वाले लांबा पक्षियों और खनन के खिलाफ भी कार्य करते रहते हैं. राजस्थान में कई खनन माफियाओं के खिलाफ भी उन्होंने आवाज भी उठाई है, जिससे उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा. विष्णु लाम्बा ने आजादी के बाद पहली बार देश के 22 राज्यों में भ्रमण कर 56 से अधिक क्रांतिकारियों के परिवारों को तलाश कर शहीदों के जन्म और बलिदान स्थलों पर पौधारोपण और परिण्डे जैसे कार्य कर देशभर में पर्यावरण का संदेश दिया. साथ ही ऋग्वेद काल के बाद पहला पर्यावरणीय विवाह करवाने का श्रेय भी उन्हें ही जाता है. साथ ही उन्होंने पक्षियों के लिए परिंडे बांधने का काम भी शुरू किया था और कई शहरों में लाखों परिंडे बांधे थे.
संस्थान ने कई पर्यावरण के लिए किया काम
विष्णु अब एक श्री कल्पतरू संस्थान' के माध्यम से पर्यावरण के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. यह संस्थान अब पिछले 15 साल से एक पौधा नियमित रूप से कहीं न कहीं लगाता आ रहा है. संस्थान लंबे समय से रेगिस्थान के जहाज ऊंट के संरक्षण व संवर्धन को लेकर अभियान चलाता रहा है, जिसे जुलाई 2014 में सरकार ने राज्य पशु का दर्जा दिया. 'जयपुर साहित्य महाकुम्भ' में संस्थान ने सभी मेहमानों को तुलसी का पौधा देकर स्वागत करने की अनूठी परम्परा कायम की थी.
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