वैलेंटाइन डे खराब करने का आरोप इस कंपनी पर, लोग बोले- ना गिफ्ट मिला ना रिफंड

बीती 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे था. दुनियाभर में कई लोग इसे 'प्यार का त्योहार' मानते हैं. आमतौर पर इसे युवा प्रेमी जोड़ों का दिन माना जाता है. वे वैलेंटाइन डे पर एक-दूसरे को तोहफे देते हैं. कुछ लोग अपने दोस्तों, माता-पिता, परिवार और अन्य करीबियों को भी इस दिन गिफ्ट भेजते हैं. खबर वैलेंटाइन डे पर गिफ्ट भेजने की इस रिवायत से जुड़ी है.
दरअसल इस साल कई लोगों का वैलेंटाइन डे प्लान धरा का धरा रह गया. इसकी वजह WINNI नाम की एक वेबसाइट बताई जा रही है, जो वैलेंटाइन डे के मौके पर गिफ्ट, केक जैसे ऑर्डर लेने और उनकी डिलीवरी करवाने का काम करती है. हुआ ये कि इस वैलेंडाइन डे पर कई लोगों ने फुल एडवांस पेमेंट के साथ WINNI को ऑर्डर तो दे दिए, लेकिन कंपनी ने ऑर्डर पूरा नहीं किया. मतलब गिफ्ट, केक वगैरा की डिलीवरी नहीं की. लोगों का आरोप है कि उन्होंने रिफंड के लिए कंपनी से बात करने की कोशिश की तो उसकी तरफ से फोन ही नहीं उठाया जा रहा.
ट्विटर पर सामने आए कई पीड़ित
ट्विटर पर हमें ऐसे कई लोग मिले जो इस तरह की शिकायत कर रहे थे. सीमा नारायण ने 14 फरवरी को फूल और केक का ऑर्डर किया था, जो उन्हें नहीं मिला. उन्होंने ट्विटर पर लिखा,
WINNI FLORIST एक बड़ा फ्रॉड है. ये मेरा पैसा लेकर गायब हो गए. इन्होंने नई-नई कहानी बनाकर सिर्फ झूठे वादे किए. मुझे यकीन है, ना ही मुझे केक और फूल मिलेंगे और ना ही मेरे पैसे वापस. यहां से कुछ ऑर्डर ना करें.
WINNI FLORIST A BIG FRAUD . Took away the money and vanished . All fake promises .New story every time. I m sure tat neither the cake and flowers will reach nor the money . Don't even try You will get stuck& embarrassed . pic.twitter.com/OSKR99Mnjf
— SEEMA NARAYAN (@SEEMANARAYAN8) February 14, 2022
WINNI को ऑर्डर देने वाले एक और शख्स राजू रमन ने लिखा,
ये लोगों को बेवक़ूफ़ बनाकर इंटरनेट पर फ्रॉड कर रहे हैं. इस कंपनी से ऑर्डर करने से बचें. मैंने सुबह करीब 5-6 बजे यहां से ऑर्डर किया. डिलीवरी का टाइम 2 से 6 चुनकर ऑनलाइन पेमेंट कर दी थी. लेकिन मुझे इसकी डिलीवरी नहीं मिली. मैंने नहीं सोचा था कि ये लोग मुझे बेवक़ूफ़ बनाएंगे.
@Winnicakes These guys is doing fraud over internet,they're fooling people,beware of ordering from these guys,Today I ordered in morning around 5-6am , and chosen delivery between 2-6pm and paid online money ,I didn't thought they'll make fool of me order is not delivered yet. pic.twitter.com/8fdXeVnokW
— Raju Raman (@rajuraman45) February 14, 2022
ऐसे और ट्वीट देखने के बाद हमने पड़ताल की. कई सवाल थे. क्या कंपनी वाले पैसे लौटाने से इन्कार कर रहे हैं? डिलीवरी नहीं देने का क्या कारण है? कंपनी का कस्टमर केयर क्या बोल रहा है? वगैरा-वगैरा. पहले हमने इस कथित फ्रॉड का शिकार हुए कुछ लोगों से बात की. उनमें से एक परीक्षित ने हमें बताया,
मैंने अपनी वाइफ के लिए केक और बुके WINNI नाम की वेबसाइट से ऑर्डर किए थे. लेकिन मुझे कोई डिलीवरी नहीं मिली. जब कस्टमर केयर को फोन किया तो उनके नम्बर्स लगातार व्यस्त बता रहे थे. अब इसका रिफंड कैसे मिलेगा इसका कोई आइडिया नहीं है. उनकी साइट पर एक कस्टमर केयर चैट का ऑप्शन भी दिया गया है. लेकिन वो ऑटो रिप्लाई के लिए रखा गया है. उसका भी कोई फायदा नहीं.
इसी तरह की कहानी अंशुमन ने हमें बताई. उन्होंने अपनी वाइफ के लिए कुछ गिफ्ट मंगवाए थे. पैसे तुरंत पे कर दिए, लेकिन डिलीवरी नहीं मिली. अंशुमन के मुताबिक अब ना WINNI का कस्टमर केयर फोन उठा रहा, ना चैट वाले ऑप्शन से मदद मिल रही. ऐसे में अब वो भी ट्विटर के जरिये मदद मांग रहे हैं.
WINNI वालों का क्या कहना है?
ये जानने के लिए हमने कंपनी से संपर्क करने की कोशिश की. कई बार कॉल किया, लेकिन उनका नम्बर लगातार व्यस्त बता रहा था. आरोपों पर कंपनी से जवाब मांगने की कोशिश में हमें इंदौर की The RJ's Bakery का पता मिला. इन्होंने एक ट्वीट में WINNI कंपनी के साथ अपनी पार्टनरशिप का ज़िक्र किया हुआ था. हमने उनके नंबर पर कॉल कर इस कथित फ्रॉड की जानकारी मांगने की कोशिश की. The RJ's Bakery के राहुल ने हमें बताया,
हम WINNI कंपनी के साथ एक वेंडर के रूप में काम करते हैं. वहां से ऑर्डर आता है और हम उसको डिलीवर करते हैं. ये सब काम ईमेल के ज़रिये होता है. 14 फरवरी को एक साथ बहुत बड़ी संख्या में ऑर्डर आ जाने की वजह से ऐसा हुआ होगा. हालांकि हमने अपने इलाके के सभी ऑर्डर समय पर पहुंचाने की कोशिश की थी. 3-4 ऑर्डर ऐसे थे जिनको कस्टमर की तरफ से ही कैंसिल किया गया था.
हमने लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों पर जवाब मांगने के लिए कंपनी को एक मेल भी लिखा था. लेकिन ये रिपोर्ट लिखे जाने तक उसका भी जवाब हमारे पास नहीं आया.





