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इस साल हम 75वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। इस दिन हर भारतीय उत्साह से भरा हुआ नजर आता है
इस साल हम 75वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। इस दिन हर भारतीय उत्साह से भरा हुआ नजर आता है और पूरा देश देशभक्ति की भावना में सराबोर रहता है. वैसे तो ये तारिख किसी किसी और दिन के मुकाबले भारतीयों के लिए ज्यादा खास है लेकिन क्या आप जानते हैं भारतीय नहीं चाहते थे 15 अगस्त 1947 को आजादी नहीं चाहते थे!
दरअसल फरवरी 1947 में नए चुनकर आए ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लेमेंट रिचर्ड एटली ने घोषणा की थी कि उनकी सरकार तीन जून 1948 से भारत को पूर्ण आत्म प्रशासन का अधिकार प्रदान कर देगी. लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि हमें तय समय से 10 महीने पहले ही आजादी मिल गई.
तारीख बदलने के पीछे ये थी वजह
फरवरी 1947 अंग्रेजी हुकूमत ने अपने आखिरी वायसराय लुई माउंटबेटन को ये जिम्मेदारी थी कि वह व्यवस्थित तरीके से भारत को सत्ता हस्तांतरित कर दें. देश का वायसराय बदले ही आजादी की तारिख भी बदल गई. इतिहासकारों के मुताबिक इसके पीछे दो वजह थी.
पहली ये कि माउंटबेटन ब्रिटेन के लिए 15 अगस्त की तारीख को शुभ मानता था. ऐसा इसलिए क्योंकि सेकंड वर्ल्ड वॉर में 15 अगस्त 1945 को जापानी सेना ने आत्मसमर्पण किया था, इसलिए माउंटबेटन ने ब्रिटिश प्रशासन के सामने यह बात रखी किभारत को सत्ता हस्तांतरित करने की तिथि 3 जून 1948 से 15 अगस्त 1947 कर दी जाए.
तारिख बदलने की पीछे इतिहासकार दूसरी वजह यह भी मानते हैं कि ब्रिटिशों को इस बात की खबर लग गई थी कि पाकिस्तान के स्थापंक मोहम्मद अली जिन्ना जिनको कैंसर है. जिस कारण वह ज्यादा दिनों तक जिंदा नहीं रह पाएंगे और फिर माहात्मा गांधी देश का बंटवारा कद्दापी नहीं होने देंगे, यहीं वजह थी कि माउंटबेटन ने 15 अगस्त 1947 को ही आजादी की तारीख तय कर दी.
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