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हुकुमदास ने 55 बार दी 10वीं की परीक्षा, पास होते ही 12वीं की परीक्षा के लिए किया आवेदन

Bharti sahu
13 Jan 2022 2:04 PM GMT
हुकुमदास ने 55 बार दी 10वीं की परीक्षा, पास होते ही 12वीं की परीक्षा के लिए किया आवेदन
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दिल में जुनून हो तो कुछ भी संभव है और इसका जीता जागता उदाहरण है

दिल में जुनून हो तो कुछ भी संभव है और इसका जीता जागता उदाहरण है राजस्थान (Rajasthan) का एक आदमी. यह साबित करते हुए कि किसी के सपनों को पूरा करने में कभी देर नहीं होती. जालोर (Jalore) के 77 वर्षीय रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी हुकुमदास वैष्णव (Hukumdas Vaishnav), जिन्होंने 55 बार दसवीं कक्षा की परीक्षा दी, अब बारहवीं कक्षा की परीक्षा के लिए नामांकित हो गए हैं. वैष्णव ने दसवीं की परीक्षा 56वीं कोशिश में पास की. 70 के दशक में पढ़ाई करने वाले इस व्यक्ति की कहानी कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है.

सन् 1945 में जन्मे हुकुमदास ने 55 बार दी 10वीं की परीक्षा
जालोर (Jalore) के सरदारगढ़ गांव में 1945 में जन्मे हुकुमदास ने तीखी गांव (Teekhi Village) से पहली से आठवीं कक्षा पास की. 1962 में पहली बार मोकलसर में दसवीं की परीक्षा बाड़मेर के एक केंद्र पर दी. जहां उन्हें पहली परीक्षा में सप्लीमेंट्री मिली, वहीं दूसरी बार फेल हो गए. उसके दोस्तों ने चुनौती दी कि वह कभी भी दसवीं कक्षा की परीक्षा पास नहीं कर पाएगा. चुनौती स्वीकार करते हुए, हुकुमदास ने वादा किया कि वह एक दिन अपनी दसवीं कक्षा की परीक्षा पास करेगा.
2019 में 10वीं की परीक्षा सेकेंड डिवीजन से पास की
हुकुमदास वैष्णव (Hukumdas Vaishnav) का कहना है कि वे भू-जल विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बने. इसके बाद, उन्होंने नियमित पढ़ाई छोड़ दी और एक वॉलेंटियर के रूप में परीक्षाओं में शामिल होने लगे. 2005 में, वह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में ट्रेजरी विभाग से रिटायर हुए. 2010 तक, वह माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित दसवीं कक्षा की परीक्षा में 48 बार उपस्थित हुए. उसके बाद उन्होंने स्टेट ओपन बोर्ड से कोशिश की और आखिरकार 2019 में उन्होंने 10वीं की परीक्षा सेकेंड डिवीजन से पास की. उसके बाद उन्होंने 2021-22 सत्र में कक्षा 12 में दाखिला लिया और अब परीक्षा में शामिल होंगे.
अब 12वीं की परीक्षा के लिए किया आवेदन
बीते मंगलवार को हुकुमदास वैष्णव ने गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल में 12वीं कला वर्ग की परीक्षा से आवेदन किया, जो जालोर शहर में स्टेट ओपन का संदर्भ केंद्र है. दिलचस्प बात यह है कि उनके पोते ने भी स्कूली शिक्षा पूरी कर ली है.
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