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कभी सोचा है? चांद-मंगल पर अगर इंसान बीमार पड़ जाएंगे तो...NASA ने ढूंढा जवाब

Gulabi
23 Jun 2021 3:49 PM GMT
कभी सोचा है? चांद-मंगल पर अगर इंसान बीमार पड़ जाएंगे तो...NASA ने ढूंढा जवाब
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NASA ने ढूंढा जवाब

NASA Prepares to 3D Print Artificial Organs in Space: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने मंगल ग्रह की खोज में अब तक कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कर ली हैं. अब एजेंसी 3डी प्रिंटिंग तकनीक पर काम कर रही है, जिससे अन्य ग्रहों पर भी वो सर्जरी की जा सकेंगी, जो किसी की जिंदगी बचाने के लिए धरती पर की जाती हैं. मंगल ग्रह (Mars Mission) के लिए नासा का पहला क्रू मिशन 2030 में लॉन्च किया जाएगा. वहीं अरबपति एलन मस्क का कहना है कि वह 2050 तक मंगल पर इंसानी बस्तियां बसाना चाहते हैं.

ऐसे में अगर इंसान मंगल और चंद्रमा पर बस जाते हैं, तो उन्हें बीमार पड़ने पर इलाज की भी जरूरत पड़ेगी. भविष्य की इसी संभावित समस्या पर वैज्ञानिकों ने काम करना शुरू कर दिया है और वह 3डी प्रिंटेड मानव अंगों पर काम कर रहे हैं. जिसकी मदद से दूसरी दुनिया में ट्रांसप्लांट और अन्य मेडिकल इलाज संभव हो पाएगा (Treatment on Mars). इस हफ्ते नासा ने अपने वैस्कुलर टिशू चैलेंज के नतीजों की घोषणा भी की है. चैलेंज की शुरुआत 2016 में हुई थी, जिसका उद्देश्य लैब में लीवर टिशू बनाना था. ताकि डीप स्पेस मिशन में संभावित रूप से भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए ट्रांसप्लांट किए जाने वाले अंग प्रदान किए जा सकें.
वैज्ञानिकों की टीम को मिली बड़ी रकम
वैस्कुलर टिशू चैलेंज में वैज्ञानिकों की जो टीम पहले स्थान पर आई है, उसे अपनी रिसर्च को आगे बढ़ाने के लिए नासा से पुरस्कार के तौर पर 300,000 डॉलर मिले हैं. इन्हें जल्द ही अपनी रिसर्च अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (International Space Station) तक पहुंचाने का मौका भी होगा. कुछ सिंथेटिक टिशू रिसर्च पर आईएसएस में पहले ही काम हो चुका है (NASA 3D Printed Human Organs). साल 2019 में एस्ट्रोनॉट क्रिस्टीना कोच ने एक डिवाइस का इस्तेमाल किया था. जिसे अमेरिकी कंपनी टेकशॉट ने तैयार किया था. इसकी सहायता से माइक्रोग्रैविटी में ऑर्गेनिक टिशू प्रिंट किए जा सकते हैं.
विचार पुराना लेकिन नए तरीके से शोध शुरू
वैज्ञानिकों का ऐसा मानना है कि सिंथेटिक अंगों का निर्माण कम ग्रैविटी वाले वातावरण जैसे ऑर्बिट या भविष्य के मून बेस में किया जा सकता है (Mars Mission Details). येल यूनिवर्सिटी में एनेस्थीसिया और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग की प्रोफेसर लॉरा निकलसन ने कहा, सिंथेटिक मानवीय अंगों का लैब में निर्माण करने का विचार वैसे तो दशकों पुराना है, लेकिन अंतरिक्ष यात्रा को जोड़ते हुए इसपर नए तरीके से शोध किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अब दुनिया निजी और व्यवसायिक अंतरिक्ष यात्रा की ओर देख रही है. कम ग्रैविटी के बायोलॉजिल प्रभाव काफी ज्यादा जरूरी होने वाले हैं और उसे समझने के लिए ये एक बेहतर उपकरण है.
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