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8 दिन बाद थमा सौर तूफान, नुकसान का पता लगाने में जुटे वैज्ञानिक

Gulabi
6 Nov 2021 10:01 AM GMT
8 दिन बाद थमा सौर तूफान, नुकसान का पता लगाने में जुटे वैज्ञानिक
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सूरज में उठा विशालकाय तूफान शांत होने के साथ ही पृथ्वी पर आने वाला बड़ा खतरा अब खत्म हो गया है

सूरज में उठा विशालकाय तूफान शांत होने के साथ ही पृथ्वी पर आने वाला बड़ा खतरा अब खत्म हो गया है और अब पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र भी शांत हो गया है। करीब 20 घंटे से ज्यादा वक्त तक तूफान की वजह से सूरज से आग का गोला लगातार निकलता रहा, जिसे वैज्ञानिक कोरोनल मास इजेक्शन कहा जाता है, उसका निकलना अब बंद हो चुका है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, सूरज पर उठे तूफान की वजह से पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र पर गहरा प्रभाव पड़ा है, लेकिन नुकसान का आकलन किया जाना अभी बाकी है।


सूरज का रौद्र रूप हुआ शांत

वैज्ञानिकों के मुताबिक, एक नवंबर से 5 नवंबर के बीच सूरज के ऊपर तीन बड़े धमाकों को देखा गया है और धमाकों की वजह से सूरज पर उठा तूफान शांत नहीं हो रहा था और इससे पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र पर लगातार असर हो रहा था, जिससे पृथ्वी के निचले अक्षांशों पर G3 श्रेणी के भू-चुंबकीय तूफान स्पाइकिंग ऑरोरस शुरू हो गए थे। सूरज में हुए विस्फोट की वजह से 583 किलोमीटर प्रति सेकंड की घातक स्पीड से सूरज का उष्मा पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर से टकराया था। Spaceweather.com के अनुसार, एक मजबूत G3 भू-चुंबकीय तूफान की चमक लगभग लॉस एंजिल्स तक फैल गई। एजेंसी ने बताया कि जिस सीएमई ने डिस्प्ले को स्पार्क किया वह एक विशेष "कैनिबल सीएमई" था जो एक ही बार में पृथ्वी से टकराने वाले कई सौर तूफान बादलों का मैशअप है।

अरबों टन आग का तूफान

यूएस के नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन के तहत आने वाले स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर के अनुसार, धमाके की वजह से सूरज से एक बार में प्लाज्मा और चुंबकीय शक्ति का निष्कासन सूरज के उष्मा के साथ होता है। इसकी वजह से अरबों टन कोरोनल सामग्री (सीएमई) सूरज से बाहर निकलते हैं। सीएमई सूर्य से 250 किलोमीटर प्रति सेकंड से धीमी गति से लगभग 3000 किमी/सेकेंड तक की गति से बाहर की ओर यात्रा करते हैं। सूरज से निकलने वाले सबसे तेज सीएमई को पृथ्वी तक पहुंचने में 15 से 18 घंटे तक का समय लग सकता है।
वैज्ञानिकों ने सूरज से निकलने वाली इस सीएमई को 'नरभक्षी' नाम दिया हुआ है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, जब सीएमई पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराता है, तो पूरे आकाश में प्रकाश पूंज निकलता है, जिसे अरोरा कहते हैं। पिछले एक हफ्ते से सूरज सक्रिय है और लगातार उससे तूफान निकलने की वजह से और सौर मंडल के नजदीकी ग्रहों के तरफ खतरनाक तूफानों को सक्रिय कर रहा है और वैज्ञानिकों का मानना है कि, पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को भी सूरज में उठे तूफान की वजह से काफी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, नुकसान का आकलन किया जाना बाकी है।
स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर ने चेतावनी दी थी कि, सूरज पर उठे तूफान की वजह से "इलेक्ट्रिक पावर ग्रिड में वोल्टेज की अनियमितताएं हो सकती हैं, कुछ सुरक्षा उपकरणों और कई सैटेलाइट नेविगेशन खराब हो सकते हैं। इस बीच अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) भी सतह पर चार्ज होने और पृथ्वी से आने और जाने वाले रेडियो संकेतों के साथ तूफान के मिलने से प्रभावित हो सकता है। वहीं, नासा ने अभी तक सूर्य से नरभक्षी विस्फोटों के प्रभाव का आकलन को लेकर रिपोर्ट जारी नहीं किया है।

कोरोनल मास इजेक्शन यानि, सीएमई गैस और चुंबकीय क्षेत्र के विशालकाय गोले होते हैं, जिन्हें सूर्य के धब्बों द्वारा अंतरिक्ष में बाहर फेंक दिया जाता है, जो सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र में फंस जाते हैं। इनमें से दो विस्फोट 1 और 2 नवंबर को सनस्पॉट AR2887 के कारण हुए थे। बाद में उस दिन 2 नवंबर को AR2891 नामक एक दूसरे सनस्पॉट पर भी तीसरे धमाके को वैज्ञानिकों ने रिकॉर्ड किया है। SpaceWeather.com मॉनिटर के अनुसार, सूरज के ऊपर जो तीसरा विस्फोट हुआ है, उसे वैज्ञानिकों ने 'नरभक्षी' नाम दिया है, जो पहले के दो विस्फोट के दौरान निकले आग के गोलों की तुलना में तेजी से पृथ्वी की तरफ बढ़ रहा है और इस वक्त ये तीसरा गोला, पहले गोले और दूसरे गोले के बीच पहुंच चुका है।
क्या है सौर तूफान

आपको बता दें कि, सौर तूफान को लेकर यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निंया की वैज्ञानिक संगीता अब्दू ज्योति ने पिछले दिनों बताया था कि, आने वाल भविष्य में धरती को बड़े सौर तूफान का सामना करना पड़ सकता है। सौर तूफान का मतलब सूरज से निकलने वाला कोरोनल मास है, जो बेहद नुकसानदायक और प्रयलकारी साबित हो सकता है। इस रिपोर्ट के मुताबिक इस सौर तूफान के कारण धरती पर इंटरनेट सर्विस ठप हो सकती है लया कई दिनों तक बंद हो सकती है। इसका असर बिजली आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। कई देशों में पावर ग्रिड फेल हो सकते हैं, जिसके कारण उन्हें कई दिनों तक अंधेरे में रहना पड़ सकता है। संगीता ने सिगकॉम 2021 डेटा कम्यूनिकेशन कॉन्फ्रेंस में अपनी स्टडी वैज्ञानिकों को दिखाई , जिसके बाद स वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है।
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