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महिला के पेट से निकला 47 किलो का ट्यूमर, 18 साल से जी रही थी इस ट्यूमर के साथ

Gulabi
16 Feb 2022 6:01 AM GMT
महिला के पेट से निकला 47 किलो का ट्यूमर, 18 साल से जी रही थी इस ट्यूमर के साथ
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महिला के पेट से निकला 47 किलो का ट्यूमर
अहमदाबाद (Ahmedabad) के अपोलो हॉस्पिटल में डॉक्टरों की टीम ने एक महिला के पेट से 47 किलो का ट्यूमर (47 Kg Tumor) निकालकर उसे नई जिंदगी दी है. ट्यूमर का वजन महिला के वजन के लगभग दोगुना हो गया था. सर्जरी के बाद महिला का वजन केवल 49 किलो ही रह गया है. ऑपरेशन थिएटर से जब महिला को निकाला गया, तो उसे लगा कि उसके शरीर से एक बड़ा बोझ हट गया है. बता दें कि 56 साल की शांति (बदला हुआ नाम) 18 साल से इस ट्यूमर के साथ जी रही थीं. वे देवगढ़ बरिया की रहने वाली हैं.
अपोलो हॉस्पिटल के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉक्टर चिराग देसाई ने कहा, सर्जरी से पहले मरीज का वजन करना मुश्किल था, क्योंकि वह ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही थी. लेकिन ऑपरेशन के बाद महिला का वजन 49 किलोग्राम रह गया था. डॉक्टर देसाई के मुताबिक, ट्यूमर सहित निकाले गए हिस्से का वजन महिला के असल वजन से ज्यादा था. ऐसे केस कम ही देखने को मिले हैं.
एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्यूमर से ग्रसित महिला के बड़े बेटे ने बताया कि उसकी मां 18 साल से इस ट्यूमर के साथ जी रही थी. शुरुआत में यह उतना बड़ा नहीं था. लेकिन फिर तेजी से इसका आकार बढ़ने लगा. पहले तो लगा कि गैस्ट्रिक परेशानी के चलते ऐसा हुआ होगा. फिर हमने आयुर्वेदिक और एलोपैथिक दवाएं लीं. लेकिन 2004 में सोनोग्राफी से पता चला कि मां के पेट में बैनाइन ट्यूमर है.
शांति के बेटे का कहना है कि उसी साल उनकी मां को सर्जरी के लिए अस्पताल ले जाया गया. लेकिन डॉक्टरों ने देखा कि ट्यूमर ने फेफड़े, गुर्दे, आंत सहित कई आंतरिक अंगों को जकड़ लिया है. ऐसे में डॉक्टरों ने सर्जरी को जोखिम भरा मानते हुए केवल उसे सिल दिया. शांति के बेटे के मुताबिक, इसके बाद उन्होंने कई डॉक्टरों से इसकी सलाह ली, लेकिन कोई भी सर्जरी करने के लिए तैयार नहीं हुआ.
बेटे ने बताया कि कोरोना महामारी के चलते दो साल मुश्किलों भरे रहे. इस दौरान ट्यूमर का साइज लगभग दोगुना हो गया था और मां को लगातार दर्द सहना पड़ रहा था. वह बिस्तर से भी उतर नहीं पा रही थी. इसके बाद शांति का परिवार अपोलो हॉस्पिटल गया, जहां डॉक्टरों ने चेकअप के बाद 27 जनवरी को सर्जरी करने का फैसला किया.
डॉक्टर देसाई का कहना है कि यह सर्जरी वाकई में खतरनाक थी, क्योंकि ट्यूमर से कई आंतरिक अंग प्रभावित हुए थे. ट्यूमर की वजह से महिला का रक्तचाप भी बढ़ गया था. ऐसे में ट्यूमर हटाने से डॉक्टरों को रक्तचाप में अचानक गिरावट का डर था. हालांकि, 4 घंटे चले इस ऑपरेशन को चार सर्जन समेत आठ डॉक्टरों की टीम ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया.
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