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भारत पर 100% टैरिफ कानून का जेलेंस्की ने किया समर्थन

Kavita2
23 Sept 2026 9:55 AM IST
भारत पर 100% टैरिफ कानून का जेलेंस्की ने किया समर्थन
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नई दिल्ली। अमेरिका में रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े नए कानून पर हस्ताक्षर के बाद भारत पर संभावित टैरिफ को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 पर 18 सितंबर को हस्ताक्षर कर इसे कानून बना दिया। कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले कुछ प्रमुख देशों के सामान पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। भारत भी इस व्यवस्था के दायरे में आ सकने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। हालांकि, कानून अपने आप भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लागू नहीं करता; यह अमेरिकी राष्ट्रपति को ऐसी कार्रवाई का अधिकार देता है।

इस घटनाक्रम पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने कानून का खुलकर समर्थन किया है। न्यूयॉर्क में अमेरिकी सांसदों से मुलाकात के दौरान जेलेंस्की ने इसे सही कदम बताया और कहा कि कानून पूरी तरह लागू होने के बाद शांति और सुरक्षा के लक्ष्य करीब आ सकते हैं।

जेलेंस्की ने बताया सही कदम

जेलेंस्की लंबे समय से रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की वकालत करते रहे हैं। यूक्रेनी राष्ट्रपति का कहना है कि रूस की युद्ध क्षमता पर आर्थिक दबाव बढ़ाकर उसे बातचीत की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।

22 सितंबर को न्यूयॉर्क में अमेरिकी सांसदों के एक द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान जेलेंस्की ने अमेरिका की ओर से कानून पारित किए जाने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल सही कदम है और इसके पूरी तरह लागू होने के बाद शांति तथा सुरक्षा की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है।

जेलेंस्की इससे पहले भी इस कानून के समर्थन में सार्वजनिक रूप से अपनी बात रख चुके हैं। जुलाई में उन्होंने अमेरिकी सीनेट में कानून पर हुई प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए इसे रूस पर दबाव बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया था। उनके अनुसार रूस पर मजबूत प्रतिबंध उसे युद्ध समाप्त करने के लिए कूटनीतिक रास्ते की ओर धकेलने में मदद कर सकते हैं।

क्या है नया अमेरिकी कानून?

Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 रूस और ईरान से संबंधित अमेरिकी प्रतिबंधों को मजबूत करने वाला व्यापक कानून है। इसमें रूस के अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों, रक्षा क्षेत्र और रूसी तेल निर्यात से जुड़े तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ पर कार्रवाई के प्रावधान शामिल हैं।

कानून में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले कुछ देशों पर भी दबाव बनाने का प्रावधान है। अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पारित व्यवस्था के तहत राष्ट्रपति को रूस से तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों पर उनके अमेरिकी आयात पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया है।

इस कानून का उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय को प्रभावित करना और उसकी युद्ध गतिविधियों के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधनों पर दबाव बढ़ाना है।

भारत के लिए क्या मायने रखता है?

भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है और हाल के वर्षों में रूस भारतीय रिफाइनरियों के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में रहा है। अगस्त 2026 में भारत का रूस से तेल आयात लगभग 21 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, हालांकि यह जुलाई की तुलना में कम था। सितंबर में भी इसमें और कमी आने का प्रारंभिक अनुमान सामने आया है।

नए अमेरिकी कानून के कारण भारत के लिए स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि अमेरिकी प्रशासन कानून में दिए अधिकार का इस्तेमाल करता है तो भारतीय वस्तुओं पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। हालांकि अभी यह कहना सही नहीं होगा कि भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लागू हो चुका है। कानून केवल ऐसी कार्रवाई का अधिकार देता है और दर तथा कार्रवाई का निर्णय अमेरिकी प्रशासन के हाथ में है।

भारत ने ऊर्जा सुरक्षा पर दिया जोर

अमेरिकी कानून को लेकर भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने की बात कही है। नई दिल्ली की स्थिति रही है कि रूस से तेल खरीदना उसकी ऊर्जा सुरक्षा और बाजार परिस्थितियों से जुड़ा फैसला है।

रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिकी दबाव के बीच भारत ने अपने आयात स्रोतों में विविधता बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाए हैं। हाल के आंकड़ों के मुताबिक भारत ने रूस से कम तेल खरीदते हुए इराक, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य स्रोतों से आपूर्ति बढ़ाई है।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर भी असर

यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर बातचीत भी जारी है। इसलिए संभावित अतिरिक्त अमेरिकी टैरिफ का मुद्दा दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

कानून में राष्ट्रपति को व्यापक अधिकार मिलने के बावजूद इसका वास्तविक इस्तेमाल कब और किस देश के खिलाफ किस दर पर होगा, यह अमेरिकी प्रशासन के निर्णय पर निर्भर करेगा। विशेषज्ञों ने भी इस प्रावधान को एक ऐसे उपकरण के रूप में देखा है, जिसका इस्तेमाल रूस पर दबाव बढ़ाने के साथ-साथ संबंधित देशों के साथ बातचीत में किया जा सकता है।

रूस पर दबाव बढ़ाने की अमेरिकी कोशिश

नए कानून का व्यापक उद्देश्य रूस की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र पर दबाव बढ़ाना है। अमेरिका का तर्क है कि रूस की ऊर्जा से होने वाली आय उसके युद्ध प्रयासों को वित्तीय आधार देती है। इसी कारण रूसी तेल खरीदने वाले बड़े देशों पर भी दबाव बनाने की व्यवस्था की गई है।

कानून के तहत रूस से जुड़े सामान और संस्थाओं पर सीधे प्रतिबंधों के अलावा अन्य देशों पर संभावित द्वितीयक टैरिफ का विकल्प भी मौजूद है। अमेरिकी प्रशासन को इस व्यवस्था के तहत अलग-अलग परिस्थितियों में निर्णय लेने की गुंजाइश मिली है।

जेलेंस्की की प्रतिक्रिया क्यों महत्वपूर्ण?

जेलेंस्की का समर्थन यूक्रेन की उस रणनीति के अनुरूप है, जिसमें रूस पर आर्थिक और राजनयिक दबाव बढ़ाने की मांग की जाती रही है। यूक्रेन का मानना है कि रूस की ऊर्जा आय को प्रभावित करने वाले प्रतिबंध उसकी युद्ध क्षमता पर असर डाल सकते हैं।

हालांकि इस कानून का भारत पर वास्तविक आर्थिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी प्रशासन इसका इस्तेमाल करता है या नहीं और यदि करता है तो किस दर तथा किन वस्तुओं पर शुल्क लगाया जाता है। फिलहाल 100 फीसदी टैरिफ की संभावना कानून में मौजूद अधिकार है, लागू शुल्क नहीं।

इस बीच भारत रूस से अपने तेल आयात में कुछ कमी और अन्य देशों से खरीद बढ़ाकर आपूर्ति के विकल्पों को व्यापक कर रहा है। ऐसे में आने वाले समय में अमेरिकी नीति, भारत की ऊर्जा खरीद और दोनों देशों की व्यापार वार्ता इस पूरे मामले की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।

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