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YouTube देखकर बने फर्जी रंगबाज, 1 करोड़ की रंगदारी मांगने वाले गिरफ्तार

नई दिल्ली। सोशल मीडिया और यूट्यूब पर गैंगस्टरों की छवि देखकर अपराध की दुनिया में नाम कमाने की कोशिश करने वाले दो युवकों को पश्चिमी दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने कुख्यात नीरज बवाना और नवीन बाली गैंग के नाम का इस्तेमाल कर हरि नगर के एक कारोबारी से एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी थी। पुलिस की स्पेशल स्टाफ टीम ने कार्रवाई करते हुए महज 12 घंटे के भीतर दोनों आरोपियों को दबोच लिया। उनके पास से धमकी भरी कॉल करने में इस्तेमाल मोबाइल फोन और सिम कार्ड भी बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, हरि नगर निवासी बृजेंद्र एक ब्रांडेड डिटर्जेंट पाउडर के वितरक हैं। 26 जुलाई की रात करीब 9 बजकर 27 मिनट पर उनके मोबाइल पर व्हाट्सएप कॉल आई थी। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को नवीन बाली और नीरज बवाना गिरोह का सदस्य बताते हुए कारोबारी से एक करोड़ रुपये की मांग की। आरोपी ने धमकी दी कि अगर 27 जुलाई शाम तक रकम नहीं दी गई तो कारोबारी और उनके परिवार को जान से मार दिया जाएगा।
धमकी देने वाले आरोपी ने कारोबारी को डराने के लिए यह भी कहा कि उसे उनके परिवार और कारोबार से जुड़ी पूरी जानकारी है। इस घटना के बाद कारोबारी ने तुरंत हरि नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रंगदारी और जान से मारने की धमकी देने की धाराओं में केस दर्ज किया और जांच शुरू कर दी।
जांच की जिम्मेदारी पश्चिमी जिले की स्पेशल स्टाफ टीम को भी सौंपी गई। इंस्पेक्टर राजेश कुमार मौर्य के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तकनीकी जांच, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और अन्य माध्यमों से आरोपियों की तलाश शुरू की। जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों की गतिविधियों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिसके आधार पर मोहन गार्डन इलाके से 28 वर्षीय मोहम्मद मोनिश और 23 वर्षीय मोहम्मद असद को गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ में पुलिस को पता चला कि इस पूरी साजिश का मुख्य आरोपी मोहम्मद मोनिश पहले कारोबारी के यहां काम कर चुका था। उसे कारोबारी के व्यापार, आर्थिक स्थिति और परिवार से जुड़ी कई जानकारियां थीं। इसी जानकारी का फायदा उठाकर उसने अपने साथी मोहम्मद असद के साथ मिलकर रंगदारी की योजना बनाई।
पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों आरोपियों ने वारदात को अंजाम देने से करीब तीन दिन पहले करोल बाग स्थित गफ्फार मार्केट से नया मोबाइल फोन और सिम कार्ड खरीदा था। उन्होंने इस मोबाइल और सिम का इस्तेमाल कारोबारी को धमकी भरी कॉल करने के लिए किया, ताकि उनकी पहचान छिपी रहे।
पूछताछ के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि दोनों आरोपी इंटरनेट मीडिया पर गैंगस्टरों से जुड़े वीडियो देखते थे और उनकी गतिविधियों से प्रभावित थे। वे नीरज बवाना और नवीन बाली की आपराधिक छवि का इस्तेमाल कर लोगों में डर पैदा करना चाहते थे। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने गैंग के नाम का फर्जी इस्तेमाल कर कारोबारी को भयभीत करने की कोशिश की थी।
पुलिस अब दोनों आरोपियों के पुराने रिकॉर्ड, डिजिटल गतिविधियों, बैंक लेन-देन और सोशल मीडिया अकाउंट की जांच कर रही है। इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या आरोपी पहले भी किसी अन्य व्यक्ति को इसी तरह धमकी देकर पैसे ऐंठने की कोशिश कर चुके हैं या उनका किसी संगठित अपराध गिरोह से कोई संबंध है।
पश्चिमी दिल्ली पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से जहां कारोबारी को राहत मिली है, वहीं यह मामला उन युवाओं के लिए भी चेतावनी है जो इंटरनेट पर अपराधियों की चमकदार छवि देखकर गलत रास्ते पर जाने की कोशिश करते हैं। पुलिस का कहना है कि अपराध की दुनिया में नाम कमाने का भ्रम अंत में कानून के शिकंजे तक ही पहुंचाता है।





