दिल्ली-एनसीआर

CJP प्रदर्शन में पहुंचे युवा, बच्चों को घर ले जाने पहुंचे अभिभावक

Saba Naaz
22 July 2026 9:48 PM IST
CJP प्रदर्शन में पहुंचे युवा, बच्चों को घर ले जाने पहुंचे अभिभावक
x

नई दिल्ली। दिल्ली में 'संसद मार्च' में शामिल हुए छात्र-छात्राओं और नौकरीपेशा युवाओं के घायल होने की खबर के बाद उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है। देश के अलग-अलग राज्यों से कई अभिभावक अपने बच्चों का हाल जानने के लिए दिल्ली पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि प्रदर्शन में शामिल होना युवाओं का अधिकार हो सकता है, लेकिन जिस तरह हालात बिगड़े और कई युवा घायल हुए, उसके बाद माता-पिता की चिंता स्वाभाविक है।

संसद मार्च में शामिल युवाओं में बड़ी संख्या ऐसे छात्र-छात्राओं और नौकरीपेशा लोगों की थी, जो अपने घरों से दूर दिल्ली में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं या निजी कंपनियों में काम कर रहे हैं। इनमें बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड समेत कई राज्यों के युवा शामिल थे। इसके अलावा दिल्ली के स्थानीय युवा भी बड़ी संख्या में प्रदर्शन में पहुंचे थे।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और युवाओं के घायल होने की जानकारी सामने आने के बाद कई परिवारों ने अपने बच्चों से संपर्क करना शुरू किया। कुछ अभिभावक फोन पर जानकारी लेने के बाद तुरंत दिल्ली के लिए रवाना हो गए। अब वे अस्पतालों, पीजी और प्रदर्शन स्थल के आसपास जाकर अपने बच्चों का हाल जान रहे हैं।

कई अभिभावकों का कहना है कि यदि बच्चों ने पहले बताया होता कि वे प्रदर्शन में जाने वाले हैं तो वे उन्हें समझाते और रोकने की कोशिश करते। हालांकि कुछ माता-पिता शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन करते हैं, लेकिन उनका मानना है कि किसी भी आंदोलन में शामिल होने से पहले युवाओं को अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए।

अस्पतालों और जंतर-मंतर के आसपास ऐसे कई अभिभावक दिखाई दिए, जो अपने घायल बच्चों को घर वापस ले जाने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि फिलहाल उनकी प्राथमिकता बच्चों की सुरक्षा है। वे नहीं चाहते कि उनके बच्चे दोबारा ऐसी स्थिति का सामना करें, जहां उनकी जान या भविष्य खतरे में पड़े।

लखनऊ से आए मुकेश कुमार ने बताया कि उनका बेटा मुखर्जी नगर में रहकर सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी कर रहा है। उसने घर पर बिना बताए दोस्तों के साथ प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। प्रदर्शन के दौरान भगदड़ में उसके पैर में चोट लग गई। मुकेश ने कहा कि वह बेटे को अपने साथ वापस ले जा रहे हैं और माहौल शांत होने के बाद ही उसे दोबारा दिल्ली भेजेंगे।

वहीं राजस्थान के जयपुर से आए सुरेंद्र ठाकुर अपनी बेटी को लेने दिल्ली पहुंचे। उनकी बेटी दिल्ली में एक आईटी कंपनी में काम करती है और दोस्तों के साथ जंतर-मंतर पहुंच गई थी। प्रदर्शन के दौरान एक दोस्त के घायल होने के बाद वह अस्पताल गई थी। सुरेंद्र ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद वह घबरा गए और तुरंत दिल्ली पहुंचे। अब उन्होंने बेटी को कुछ समय के लिए घर ले जाने का फैसला किया है।

चंडीगढ़ से आई कुसुम ने बताया कि उनकी बेटी दिल्ली में निजी कंपनी में नौकरी करती है। उन्हें प्रदर्शन में बेटी के शामिल होने की जानकारी घटना के बाद मिली। उन्होंने कहा कि अपनी बात रखना गलत नहीं है, लेकिन बच्चों को किसी भी ऐसे कार्यक्रम में जाने से पहले परिवार को जानकारी देनी चाहिए।

बिहार के दरभंगा से आए तरुणपाल ने बताया कि उनका बेटा मुखर्जी नगर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता है। बेटे ने घर पर केवल दोस्तों से मिलने जाने की बात कही थी, लेकिन बाद में सोशल मीडिया और फोन के जरिए पता चला कि वह संसद मार्च में शामिल था। उन्होंने कहा कि अब वह बेटे को समझाएंगे कि भविष्य की पढ़ाई और करियर सबसे महत्वपूर्ण हैं।

अभिभावकों का कहना है कि युवा अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा सकते हैं, लेकिन उन्हें किसी भी परिस्थिति में अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करना चाहिए। फिलहाल कई परिवार अपने बच्चों को साथ लेकर वापस लौट रहे हैं और चाहते हैं कि हालात सामान्य होने के बाद ही वे दोबारा दिल्ली आएं।

Next Story