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कांवड़ यात्रा को लेकर योगी का बड़ा हमला, अखिलेश यादव पर लगाए गंभीर आरोप

Ratna Netam
2 Nov 2026 3:05 PM IST
कांवड़ यात्रा को लेकर योगी का बड़ा हमला, अखिलेश यादव पर लगाए गंभीर आरोप
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नई दिल्ली। दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित इंडिया ब्लॉक की महारैली के बाद विपक्षी दलों में उत्साह का माहौल है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा 'मोना' ने रैली में शामिल हुए लोगों और कार्यकर्ताओं की भारी भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि कल इतिहास रचा गया। उन्होंने इसे लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट हुई जनता की ताकत बताया। उनके इस बयान के बाद इंडिया गठबंधन की रैली और उसमें जुटी भीड़ को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।1 नवंबर 2026 को आयोजित इस रैली में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत इंडिया गठबंधन के कई घटक दलों के नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। रैली का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), कथित वोट चोरी और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष की आपत्तियां थीं। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था और मतदाताओं के मतदान के अधिकारों की रक्षा के लिए सभी विपक्षी दलों का एक मंच पर आना जरूरी है।
आराधना मिश्रा ने कार्यकर्ताओं की एकजुटता को बताया बड़ी ताकत
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा 'मोना' ने रैली से पहले ही इसके महत्व को रेखांकित किया था। उन्होंने कहा था कि यह लड़ाई देश के लोकतंत्र और संविधान को बचाने की है। इसमें कांग्रेस का हर कार्यकर्ता, आम नागरिक और इंडिया गठबंधन के सहयोगी दल एकजुट होकर राहुल गांधी तथा अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ खड़े हैं।उन्होंने कहा था कि देश के नागरिक अपने मताधिकार की सुरक्षा को लेकर जागरूक हो रहे हैं। कांग्रेस लगातार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है। आराधना मिश्रा ने यह भी कहा था कि यदि वह इस्तीफा नहीं देते हैं, तो उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की मांग उठाई जाएगी।रैली के बाद उनके 'कल इतिहास रचा गया' वाले बयान को इसी राजनीतिक अभियान और विपक्षी एकजुटता के संदर्भ में देखा जा रहा है। उनके मुताबिक, बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने लोकतंत्र और संविधान से जुड़े सवालों को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है।
रामलीला मैदान में 20 से अधिक विपक्षी दलों ने लिया हिस्सा
इंडिया गठबंधन की इस महारैली में देशभर के 20 से अधिक विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य विपक्षी नेताओं की भागीदारी ने कार्यक्रम को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया।रैली से पहले कांग्रेस ने इसमें करीब 10 लाख लोगों के जुटने का दावा किया था। देश के अलग-अलग हिस्सों से कार्यकर्ता बसों, निजी वाहनों और अन्य माध्यमों से दिल्ली पहुंचे थे। भारतीय युवा कांग्रेस ने भी अपने हजारों कार्यकर्ताओं की भागीदारी का दावा किया था।रामलीला मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम का नाम 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रखा गया था। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के जरिए लोगों के मतदान के अधिकार को प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने चुनाव आयोग से इस मामले में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना
रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं के जरिए मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को लेकर अपनी लड़ाई जारी रखेगा।राहुल गांधी ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कथित वोट चोरी के मामले में जिम्मेदार लोगों को जवाब देना होगा। कांग्रेस नेता ने चेतावनी दी कि इस मामले को लेकर कानूनी और राजनीतिक स्तर पर संघर्ष जारी रहेगा।वहीं, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी विपक्षी एकजुटता की जरूरत पर जोर दिया। अन्य नेताओं ने भी मतदाता सूची में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया।
भाजपा ने रैली की भीड़ पर उठाए सवाल
इंडिया गठबंधन की महारैली के बाद भाजपा ने कांग्रेस के भीड़ संबंधी दावों पर सवाल खड़े किए। भाजपा सांसद और प्रवक्ता संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने रैली में 10 लाख लोगों के पहुंचने का दावा किया था, लेकिन रामलीला मैदान में इतनी बड़ी भीड़ नजर नहीं आई।पात्रा ने दावा किया कि मैदान में करीब 28 हजार कुर्सियां लगाई गई थीं, जिनमें से 5 से 7 हजार कुर्सियां दोपहर 3:30 से 4 बजे के बीच खाली थीं। उन्होंने रैली स्थल के वीडियो और तस्वीरें साझा करते हुए लगभग 40 प्रतिशत जगह खाली रहने का दावा किया। भाजपा ने इस आयोजन को विपक्ष का असफल शक्ति प्रदर्शन बताया।इसके अलावा केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि रैली में भीड़ दिखाने के लिए सोशल मीडिया पर एआई से तैयार तस्वीरें साझा की गईं। इस आरोप के बाद भी रैली की तस्वीरों और वास्तविक भीड़ को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई। हालांकि, रैली में शामिल लोगों की कुल संख्या का कोई स्वतंत्र और आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
लोकतंत्र और वोट के अधिकार पर जारी रहेगी लड़ाई
आराधना मिश्रा ने रैली में शामिल लोगों के उत्साह और विपक्षी दलों की एकजुटता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए जनता की भागीदारी जरूरी है। कांग्रेस का मानना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और हर योग्य नागरिक का नाम सूची में बनाए रखना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है।वहीं भाजपा विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक अभियान का हिस्सा बता रही है। ऐसे में SIR और कथित वोट चोरी का मुद्दा आने वाले दिनों में भी राजनीतिक बहस के केंद्र में रहने की संभावना है।रामलीला मैदान की रैली के बाद कांग्रेस इसे जनता की एकजुटता और लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई के रूप में पेश कर रही है, जबकि भाजपा भीड़ के दावों पर सवाल उठा रही है। इस तरह एक ही आयोजन को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं। फिलहाल आराधना मिश्रा का 'कल इतिहास रचा गया' बयान विपक्षी गठबंधन के उत्साह और रैली के राजनीतिक संदेश को दर्शाता है।
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