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नई दिल्ली। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अगले महीने नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, तैयारियों से जुड़े भारतीय सूत्रों ने बताया है कि शी जिनपिंग के साथ चीन का करीब 400 अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल भारत आ सकता है। अगर यह यात्रा होती है, तो करीब सात साल बाद चीनी राष्ट्रपति का भारत दौरा होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, शी जिनपिंग के 12 और 13 सितंबर को भारत आने की उम्मीद है। इस दौरान वह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। हालांकि, यात्रा और प्रतिनिधिमंडल से जुड़ी अंतिम जानकारी आधिकारिक घोषणा के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।
सात साल बाद भारत आने की उम्मीद
🇨🇳🇮🇳 Chinese President Xi Jinping is expected to visit India for the September 12–13 BRICS Summit, alongside a 400-member delegation.
— Asia Nexus (@nexusasian) August 24, 2026
The visit would be Xi’s first to India in seven years and comes amid efforts to stabilize bilateral ties.
India and China are seeking progress… pic.twitter.com/SZswFH68mA
शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा को दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले वह वर्ष 2019 में भारत आए थे। उस समय उन्होंने चेन्नई के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अनौपचारिक शिखर बैठक में हिस्सा लिया था।
करीब सात वर्ष बाद संभावित यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत और चीन के बीच सीमा विवाद सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत जारी है। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में संबंधों में तनाव भी देखने को मिला है।
ऐसे में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संभावित बातचीत को काफी अहम माना जा रहा है।
400 अधिकारियों का दल होने की चर्चा
रॉयटर्स की रिपोर्ट में भारतीय सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि शी जिनपिंग के साथ आने वाले चीनी प्रतिनिधिमंडल में करीब 400 अधिकारी हो सकते हैं। यह संख्या वर्ष 2019 में उनकी भारत यात्रा के दौरान आए चीनी दल के मुकाबले दोगुने से भी अधिक बताई जा रही है।
2019 में शी जिनपिंग के साथ भारत आए चीनी प्रतिनिधिमंडल में 200 से कम अधिकारी थे। इस बार बड़े प्रतिनिधिमंडल की संभावित मौजूदगी से ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान चीन की व्यापक भागीदारी का संकेत मिलता है।
हालांकि, प्रतिनिधिमंडल में किन-किन विभागों के अधिकारी शामिल होंगे और उनकी सटीक संख्या कितनी होगी, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
सीमा विवाद पर भी नजर
शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से जुड़े मुद्दे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
पूर्वी लद्दाख में लंबे समय तक चले सैन्य गतिरोध के बाद दोनों देशों ने सैन्य और राजनयिक स्तर पर कई दौर की बातचीत की है। दोनों पक्षों ने तनाव कम करने और सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए विभिन्न स्तरों पर संवाद जारी रखा है।
ऐसे में शी जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के रास्तों पर चर्चा होने की संभावना पर नजर रहेगी।
व्यापार और आर्थिक संबंध भी अहम
भारत-चीन संबंधों में सीमा विवाद के अलावा व्यापार भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। दोनों देशों के बीच बड़े पैमाने पर व्यापार होता है, हालांकि व्यापार असंतुलन और चीनी आयात को लेकर भारत में समय-समय पर चिंता जताई जाती रही है।
ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंच पर दोनों देशों के नेता वैश्विक अर्थव्यवस्था, विकासशील देशों की भूमिका, व्यापार और वित्तीय सहयोग जैसे विषयों पर भी चर्चा कर सकते हैं।
ब्रिक्स के विस्तार के बाद संगठन का महत्व और बढ़ा है। ऐसे में भारत में होने वाला शिखर सम्मेलन सदस्य देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है।
मोदी-शी मुलाकात पर भी निगाहें
शी जिनपिंग के भारत आने की स्थिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी संभावित मुलाकात पर भी विशेष नजर रहेगी। दोनों नेताओं के बीच बैठक में द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों नेताओं के बीच अलग से औपचारिक द्विपक्षीय बैठक होगी या नहीं। सम्मेलन से पहले और उसके दौरान होने वाली राजनयिक गतिविधियों के आधार पर इसका कार्यक्रम तय होगा।
भारत और चीन के शीर्ष नेताओं के बीच संवाद को दोनों देशों के संबंधों में स्थिरता लाने के प्रयासों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
फिलहाल शी जिनपिंग की संभावित यात्रा और उनके साथ आने वाले प्रतिनिधिमंडल की संख्या को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। रॉयटर्स की रिपोर्ट में तैयारियों से जुड़े भारतीय सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है।
यदि शी जिनपिंग 12-13 सितंबर को नई दिल्ली पहुंचते हैं, तो यह वर्ष 2019 के बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी। सात साल के अंतराल के बाद होने वाली यह यात्रा ऐसे समय में होगी जब भारत और चीन अपने संबंधों को स्थिर करने की दिशा में संवाद जारी रखे हुए हैं।
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान शी जिनपिंग की संभावित मौजूदगी और करीब 400 अधिकारियों के बड़े प्रतिनिधिमंडल की चर्चा ने भारत-चीन संबंधों को लेकर कूटनीतिक हलकों में उत्सुकता बढ़ा दी है। अब सभी की नजर आधिकारिक यात्रा कार्यक्रम और दोनों देशों के नेताओं के बीच संभावित बातचीत पर होगी।





