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महिला सुरक्षा मुद्दा: दिल्ली यूनिवर्सिटी में बढ़ता छात्रों का विरोध-प्रदर्शन

Tara Tandi
30 Sept 2026 6:19 PM IST
महिला सुरक्षा मुद्दा: दिल्ली यूनिवर्सिटी में बढ़ता छात्रों का विरोध-प्रदर्शन
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नई दिल्ली: दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों ने राजधानी में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों के मामलों को लेकर अपना विरोध तेज़ कर दिया है। वे पोस्टर और प्लेकार्ड लेकर सड़कों पर उतरे हैं, महिलाओं पर लगाई गई पाबंदियों को चुनौती दे रहे हैं और यौन हिंसा की घटनाओं के लिए जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
इन विरोध प्रदर्शनों ने अपने तीखे नारों और शब्दों के अनोखे इस्तेमाल की वजह से काफी ध्यान खींचा है। इनमें कई कॉलेजों के छात्र शामिल हुए हैं, जिनमें श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज फॉर विमेन, मिरांडा हाउस, लेडी श्रीराम कॉलेज (LSR), कमला नेहरू कॉलेज और गार्गी कॉलेज शामिल हैं।
यह विरोध प्रदर्शन इस महीने की शुरुआत में कालकाजी के आस्था कुंज पार्क के पास एक 17 साल की लड़की के साथ हुए गैंग-रेप की घटना के बाद हो रहा है। इस घटना ने दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा, खासकर बिना किसी डर के शहर में घूमने की उनकी आज़ादी को लेकर छात्रों के बीच लंबे समय से चली आ रही चिंताओं और गुस्से को फिर से जगा दिया है।
छात्रों ने अपने गुस्से का इज़हार करने और मौजूदा हालात पर सवाल उठाने के लिए मज़ाक, व्यंग्य और दिल्ली की आम बोलचाल की भाषा का भी इस्तेमाल किया है। जिन नारों ने लोगों का ध्यान खींचा है, उनमें से एक है, "1 कचौड़ी, 2 समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा"।
प्रदर्शनकारियों ने ऐसे प्लेकार्ड दिखाए और नारे लगाए जो व्यंग्यात्मक और रचनात्मक होने के साथ-साथ सीधे और कड़े भी थे, जैसे 'मेरा पसंदीदा मौसम पितृसत्ता का पतन होगा' और 'पितृसत्ता को खत्म करो'।
मीडिया से ​​बात करते हुए एक छात्र ने कहा कि इन विरोध प्रदर्शनों का मकसद सरकार से ज़्यादा ज़िम्मेदारी की मांग करना और सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं के आज़ादी और सुरक्षा के साथ घूमने के अधिकार की मांग करना है।
छात्र ने कहा, "हम चाहते हैं कि सरकार रेप के सभी मामलों की ज़िम्मेदारी ले। हम बाहर क्यों नहीं जा सकते? बाहर सुरक्षित रूप से घूमना हमारा अधिकार है, और हम इसी की मांग करने के लिए यहां आए हैं।"
एक और प्रदर्शनकारी ने कहा कि छात्र सड़कों पर इसलिए उतरे हैं क्योंकि वे सुरक्षा चाहते हैं और सवाल उठाते हैं कि यौन हिंसा के डर से महिलाओं को घर के अंदर रहने के लिए क्यों मजबूर किया जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारी ने कहा, "हम अपनी सुरक्षा के लिए सड़कों पर उतरे हैं। अगर लड़कियां यहां सुरक्षित होतीं, तो कालकाजी में गैंग-रेप की घटना नहीं होती। हम कब तक घर के अंदर रहेंगे? हमें घरों में ही क्यों कैद रहना चाहिए?" एक और छात्रा ने आरोप लगाया कि सरकार महिलाओं की सुरक्षा पक्की करने के लिए ठोस कदम उठाने में नाकाम रही है और कहा कि प्रदर्शनकारी यौन हिंसा के आरोपियों के खिलाफ़ सख़्त कार्रवाई चाहते हैं।
छात्रा ने कहा, "सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए कोई ठोस काम नहीं किया है। हम आज़ादी से घूमना-फिरना चाहते हैं। हम बलात्कारियों के खिलाफ़ सख़्त कार्रवाई चाहते हैं।"
शुरुआत में अलग-अलग महिला कॉलेजों में हुए प्रदर्शन तेज़ी से पूरे विश्वविद्यालय में छात्रों के एक बड़े आंदोलन में बदल गए।
28 सितंबर को सैकड़ों छात्र आर्ट्स फैकल्टी में जमा हुए, और बाद में हज़ारों छात्रों ने नॉर्थ कैंपस में मार्च निकाला। यह हाल के वर्षों में दिल्ली विश्वविद्यालय में महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर छात्रों का सबसे बड़ा जमावड़ा बन गया है।
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