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सड़क और मेट्रो में बदसलूकी से परेशान महिलाएं, सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
nidhi
2 Oct 2026 8:57 AM IST

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छेड़छाड़ के डर से बदला सफर
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक अध्ययन ने चिंताजनक तस्वीर सामने रखी है। सार्वजनिक परिवहन, मेट्रो, बसों और सड़क पर महिलाओं को छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। इसका असर इतना गंभीर है कि कई महिलाओं ने अपने आने-जाने का रास्ता, समय और यहां तक कि सफर का साधन तक बदल दिया है।
अध्ययन में 330 महिलाओं का सर्वे किया गया, जबकि 20 महिलाओं के विस्तृत अनुभव भी शामिल किए गए। इसमें शामिल महिलाओं की उम्र 18 से 45 वर्ष के बीच थी। सर्वे में 38.78 प्रतिशत महिलाओं ने बताया कि उन्होंने सार्वजनिक परिवहन में खुद यौन उत्पीड़न का सामना किया है। वहीं 30.30 प्रतिशत महिलाओं ने दूसरी महिलाओं के साथ ऐसी घटनाएं होते देखने की बात कही।
रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं को सबसे ज्यादा गलत तरीके से छूने और लगातार घूरने जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ा। 64.91 प्रतिशत मामलों में महिलाओं ने गलत तरीके से छूने की शिकायत की, जबकि 64.04 प्रतिशत महिलाओं ने लगातार घूरने की बात कही। 44.74 प्रतिशत महिलाओं ने पीछा किए जाने और 40.35 प्रतिशत ने फब्तियां कसने का अनुभव साझा किया।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि महिलाओं के लिए मेट्रो भी पूरी तरह सुरक्षित महसूस होने वाला स्थान नहीं है। 54.39 प्रतिशत घटनाएं मेट्रो में सामने आईं, जबकि 51.75 प्रतिशत मामलों में बसों का जिक्र किया गया। पैदल चलते समय 42.11 प्रतिशत और बस स्टॉप या मेट्रो स्टेशन पर 41.23 प्रतिशत महिलाओं ने उत्पीड़न से जुड़े अनुभव बताए। समय के हिसाब से शाम का वक्त महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा असुरक्षित सामने आया। शाम में 142 घटनाएं दर्ज की गईं। इसके बाद रात में 96, दोपहर में 86 और सुबह 64 घटनाएं सामने आईं। इसी वजह से कई महिलाएं देर शाम यात्रा करने से बचने लगी हैं और अपने काम या पढ़ाई के समय में भी बदलाव करती हैं।
यौन उत्पीड़न का असर सिर्फ यात्रा तक सीमित नहीं है। अध्ययन में 30.70 प्रतिशत पीड़ित महिलाओं ने तनाव और एंग्जायटी की शिकायत की, जबकि 20.18 प्रतिशत ने आत्मविश्वास कम होने की बात कही। डर के कारण कुछ महिलाएं भीड़भाड़ वाले या अकेले रास्तों से बचती हैं और अधिक खर्च होने के बावजूद दूसरे परिवहन साधन चुनती हैं। शोधकर्ताओं ने सार्वजनिक परिवहन को सुरक्षित बनाने के लिए कई सुझाव भी दिए हैं। इनमें व्यस्त समय में बसों और मेट्रो की संख्या बढ़ाने, सुनसान इलाकों और अंडरपास में सीसीटीवी लगाने, पुलिस और मार्शल की तैनाती बढ़ाने तथा महिलाओं की शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई करने की जरूरत बताई गई है।
अध्ययन यह भी बताता है कि महिला सुरक्षा का मुद्दा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है। लगातार उत्पीड़न और उसके डर का सीधा असर महिलाओं की पढ़ाई, नौकरी, सामाजिक जीवन और आवाजाही की स्वतंत्रता पर पड़ रहा है। दिल्ली जैसे बड़े महानगर में जहां लाखों महिलाएं रोजाना मेट्रो, बस और पैदल यात्रा करती हैं, वहां सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन उनकी स्वतंत्रता और रोजमर्रा की जिंदगी से सीधे जुड़ा मुद्दा है। इसलिए केवल निगरानी बढ़ाना ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर व्यवहार में बदलाव और शिकायतों पर जवाबदेही तय करना भी जरूरी माना गया है।
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