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अब सस्ती होगी चीनी? केंद्र सरकार ने लिया बड़ा फैसला, जानिए पूरी खबर
Triveni
19 Oct 2026 7:27 AM IST

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खरीद में अहम बदलाव
नई दिल्ली : देश में लगातार बढ़ रही चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने और घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने एथनॉल खरीद की नीति में बदलाव करते हुए सरकारी तेल कंपनियों की वर्ष 2026-27 की नई निविदा में गन्ने के रस, चीनी, चीनी के सिरप और बी-हेवी शीरे से तैयार एथनॉल को बाहर कर दिया है। इस फैसले का उद्देश्य गन्ने का अधिक उपयोग चीनी उत्पादन में करना और बाजार में आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों पर दबाव कम करना है। सरकार के इस फैसले से चीनी उद्योग, एथनॉल उत्पादकों और किसानों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, पेट्रोल में एथनॉल मिलाने का कार्यक्रम जारी रहेगा। इसके लिए मक्का, चावल और अन्य वैकल्पिक कच्चे माल का उपयोग किया जाएगा।
चीनी की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए बदली नीति
देश में चीनी के बढ़ते दाम और उत्पादन में संभावित कमी को देखते हुए सरकार ने एथनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की प्राथमिकताओं में बदलाव किया है। अब वर्ष 2026-27 की एथनॉल आपूर्ति निविदा में गन्ने के रस, चीनी के सिरप और बी-हेवी शीरे से बने एथनॉल के प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इस कदम के पीछे सरकार की मंशा घरेलू उपभोक्ताओं के लिए चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है।दरअसल, गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे से एथनॉल तैयार करने में ऐसे कच्चे माल का उपयोग होता है जिससे चीनी का उत्पादन किया जा सकता है। ऐसे में एथनॉल के लिए इनके उपयोग को सीमित करने से चीनी उत्पादन के लिए अधिक गन्ना उपलब्ध रह सकता है।
1100 करोड़ लीटर एथनॉल खरीद की निविदा
सरकारी तेल विपणन कंपनियों की ओर से, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने 16 अक्टूबर को लगभग 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल की खरीद के लिए एक टेंडर जारी किया। यह खरीद नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027 तक की आपूर्ति अवधि के लिए है। नई व्यवस्था के तहत, मक्का, खराब या टूटे हुए अनाज, भारतीय खाद्य निगम (FCI) से प्राप्त अतिरिक्त चावल, सी-हैवी मोलासेस (शीरा) और जैव-ईंधन नीति के अंतर्गत स्वीकृत अन्य कच्चे माल जैसे विभिन्न स्रोतों से इथेनॉल खरीदने का प्रावधान किया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम को बंद नहीं कर रही है; बल्कि, वह चीनी की उपलब्धता को प्राथमिकता देते हुए इथेनॉल उत्पादन के स्रोतों में विविधता ला रही है।
महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने की फसल प्रभावित
चीनी उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ने की एक बड़ी वजह प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां हैं। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में कमजोर बारिश से गन्ने की पैदावार प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। वहीं, कुछ अन्य क्षेत्रों में बाढ़, फसल रोग और कीटों की समस्या भी उत्पादन के लिए चुनौती बन सकती है। उद्योग के अनुमानों के अनुसार, 2026-27 के दौरान देश में चीनी का उत्पादन लगभग 280 लाख टन रहने की आशंका है। दूसरी ओर, घरेलू खपत लगभग 285 से 290 लाख टन के आसपास रहने का अनुमान है। पिछले आपूर्ति वर्ष में करीब 30 लाख टन चीनी के बराबर कच्चे माल का इस्तेमाल एथनॉल उत्पादन में किया गया था। ऐसे में सरकार इस बार चीनी उत्पादन में होने वाली संभावित कमी को रोकने की कोशिश कर रही है।
क्या आम लोगों को सस्ती मिलेगी चीनी?
सरकार के फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आने वाले दिनों में चीनी के दाम कम होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि एथनॉल उत्पादन में चीनी वाले कच्चे माल का उपयोग कम होता है, तो चीनी मिलों के पास अधिक मात्रा में गन्ना उपलब्ध रह सकता है। इससे घरेलू बाजार में चीनी की आपूर्ति बढ़ाने में मदद मिलने की संभावना है। हालांकि, कीमतों में वास्तविक कमी उत्पादन, बाजार की मांग, उपलब्ध स्टॉक और मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। इसलिए नई नीति से चीनी तत्काल सस्ती होने की गारंटी नहीं है, लेकिन यह बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण पाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
चीनी मिलों की कमाई पर पड़ सकता है असर
सरकार की नई व्यवस्था का असर चीनी मिलों के कारोबार पर भी देखने को मिल सकता है। पिछले कुछ वर्षों में कई चीनी मिलों ने एथनॉल उत्पादन को आय के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में विकसित किया है। गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे से एथनॉल बनाने वाली मिलों को अब उत्पादन तथा बिक्री की रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। इस फैसले से ऐसी मिलों की एथनॉल से होने वाली कमाई प्रभावित होने की आशंका है, जबकि चीनी उत्पादन की हिस्सेदारी बढ़ सकती है। इसके अलावा किसानों को गन्ने का भुगतान, चीनी की बाजार कीमत और मिलों की वित्तीय स्थिति भी इस बदलाव के प्रभाव को निर्धारित करेंगे।
पेट्रोल में एथनॉल मिलाने का कार्यक्रम जारी रहेगा
भारत सरकार लंबे समय से पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण को बढ़ावा दे रही है। इसका प्रमुख उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, विदेशी मुद्रा की बचत करना और वैकल्पिक ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहित करना है। देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए तेल कंपनियां एथनॉल की खरीद जारी रखेंगी। हालांकि, अब अनाज आधारित एथनॉल पर निर्भरता बढ़ने की संभावना है। मक्का और चावल से एथनॉल उत्पादन बढ़ने पर खाद्य आपूर्ति, पशुचारे की उपलब्धता और कृषि बाजार पर पड़ने वाले प्रभावों की निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी।
मक्का आधारित एथनॉल की कीमत में भी बदलाव
नई निविदा में मक्का आधारित एथनॉल के लिए खरीद मूल्य संबंधी प्रोत्साहन में भी कटौती की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, मक्का आधारित एथनॉल का खरीद मूल्य 71.86 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 68.86 रुपये प्रति लीटर किया गया है। इस बदलाव से एथनॉल उत्पादकों की लागत और मुनाफे की गणना प्रभावित हो सकती है।
सरकार के सामने दोहरी चुनौती
एक तरफ सरकार को घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करनी है, वहीं दूसरी तरफ पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण की जरूरतों को भी पूरा करना है। नई नीति इसी संतुलन को साधने की कोशिश है। फिलहाल 2026-27 की नई खरीद निविदा में चीनी आधारित कुछ प्रमुख स्रोतों से बने एथनॉल को बाहर कर दिया गया है। आने वाले महीनों में चीनी उत्पादन, बाजार की कीमतों और वैकल्पिक एथनॉल की आपूर्ति से इस फैसले का वास्तविक प्रभाव सामने आएगा।
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