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राज्यसभा टिकट नहीं मिला तो क्या मंत्री बने रहेंगे हरदीप पुरी? संविधान में है छह महीने का नियम

Kavita2
6 Oct 2026 10:20 AM IST
राज्यसभा टिकट नहीं मिला तो क्या मंत्री बने रहेंगे हरदीप पुरी? संविधान में है छह महीने का नियम
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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित किए, लेकिन सूची में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा को जगह नहीं मिली। दोनों मौजूदा राज्यसभा सदस्य हैं और उनका कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त होने वाला है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर पुरी 25 नवंबर के बाद संसद के किसी भी सदन के सदस्य नहीं रहते हैं, तो क्या वह केंद्रीय मंत्री बने रह सकते हैं।

इस सवाल का जवाब भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(5) में मिलता है। संविधान के मुताबिक कोई व्यक्ति संसद के किसी भी सदन—लोकसभा या राज्यसभा—का सदस्य नहीं रहते हुए भी अधिकतम छह लगातार महीनों तक केंद्रीय मंत्री बना रह सकता है। अगर इस अवधि के भीतर वह किसी भी सदन का सदस्य नहीं बनता है, तो छह महीने पूरे होते ही उसे मंत्री पद छोड़ना होगा।

इसका मतलब है कि हरदीप सिंह पुरी का राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म होने के बाद भी उनका मंत्री पद स्वतः उसी दिन समाप्त नहीं होगा। यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें मंत्रिपरिषद में बनाए रखते हैं, तो वह संसद सदस्य न रहते हुए भी अधिकतम छह महीने तक पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री बने रह सकते हैं। इस दौरान उन्हें किसी दूसरी राज्यसभा सीट से निर्वाचित होना होगा या लोकसभा का सदस्य बनना होगा।

मौजूदा चुनाव उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए हो रहा है और मतदान 16 अक्टूबर को निर्धारित है। इनमें से आठ सीटें फिलहाल भाजपा के पास हैं। भाजपा ने इस बार अपने सभी आठ मौजूदा सदस्यों के स्थान पर नए उम्मीदवार उतारे हैं। पार्टी की सूची में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं।

हरदीप पुरी और बीएल वर्मा ही नहीं, भाजपा ने उत्तर प्रदेश से अपना कार्यकाल पूरा कर रहे अन्य मौजूदा राज्यसभा सदस्यों को भी दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया है। इनमें अरुण सिंह, गीता उर्फ चंद्रप्रभा, नीरज शेखर, बृजलाल और सीमा द्विवेदी जैसे नाम शामिल हैं। पार्टी के इस फैसले को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व के व्यापक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

सबसे ज्यादा चर्चा हालांकि पुरी और वर्मा को लेकर है क्योंकि दोनों केंद्र सरकार में मंत्री हैं। हरदीप सिंह पुरी कैबिनेट मंत्री के रूप में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय संभाल रहे हैं। बीएल वर्मा केंद्रीय राज्य मंत्री हैं। दोनों को टिकट न मिलने के बाद केंद्रीय मंत्रिपरिषद में संभावित फेरबदल को लेकर भी राजनीतिक अटकलें तेज हुई हैं। कुछ रिपोर्टों में पार्टी सूत्रों के हवाले से मंत्रिपरिषद में बदलाव की संभावना का जिक्र किया गया है, लेकिन सरकार या भाजपा ने अभी तक किसी फेरबदल की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

संवैधानिक व्यवस्था यह भी स्पष्ट करती है कि मंत्री बनने के लिए नियुक्ति के समय संसद सदस्य होना अनिवार्य नहीं है। किसी गैर-सांसद को भी केंद्रीय मंत्री बनाया जा सकता है, लेकिन उसे छह महीने के भीतर लोकसभा या राज्यसभा का सदस्य बनना जरूरी होता है। यही नियम उस मंत्री पर भी लागू होता है जिसकी संसद सदस्यता मंत्री रहते हुए समाप्त हो जाए और उसे तत्काल किसी दूसरे सदन की सदस्यता न मिले।

इसलिए पुरी के मामले में 25 नवंबर के बाद कई संभावनाएं खुली रहेंगी। भाजपा उन्हें किसी अन्य राज्य से होने वाले राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार बना सकती है। यदि किसी राज्यसभा सीट पर उपचुनाव होता है तो वहां से भी उन्हें संसद में लाया जा सकता है। लोकसभा की कोई सीट खाली होने और उपचुनाव की स्थिति में उस रास्ते से भी संसद सदस्यता हासिल की जा सकती है। हालांकि इनमें से किसी विकल्प को लेकर पार्टी ने अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

यह भी संभव है कि सरकार मंत्रिपरिषद में फेरबदल करे और पुरी या वर्मा की भूमिका बदल जाए। लेकिन फिलहाल केवल राज्यसभा टिकट नहीं मिलने के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि उनका मंत्री पद भी तत्काल समाप्त होने जा रहा है। राज्यसभा सदस्यता और मंत्री पद दो अलग संवैधानिक स्थितियां हैं।

अनुच्छेद 75 के मुताबिक केंद्रीय मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करते हैं। मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है। वहीं अनुच्छेद 75(5) गैर-सांसद मंत्री के लिए छह महीने की अधिकतम अवधि तय करता है। इस अवधि के भीतर संसद की सदस्यता हासिल नहीं होने पर मंत्री पद समाप्त करना पड़ता है।

उदाहरण के तौर पर यदि पुरी की राज्यसभा सदस्यता 25 नवंबर 2026 को समाप्त होती है और वह उसके बाद लगातार संसद सदस्य नहीं रहते हैं, तो संवैधानिक छह महीने की अवधि उसी बिंदु से प्रासंगिक होगी। हालांकि वास्तविक अंतिम तारीख नियुक्ति और सदस्यता की कानूनी स्थिति पर निर्भर करेगी, इसलिए किसी निश्चित तारीख का निष्कर्ष आधिकारिक अधिसूचनाओं के बिना निकालना उचित नहीं होगा।

भाजपा की उम्मीदवार सूची से यह जरूर स्पष्ट है कि पार्टी ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा में नए चेहरों को भेजने का फैसला किया है। लेकिन इस फैसले का हरदीप पुरी और बीएल वर्मा के केंद्रीय मंत्रिपरिषद में भविष्य पर क्या असर पड़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। पार्टी ने दोनों नेताओं की अगली भूमिका को लेकर कोई घोषणा नहीं की है।

फिलहाल संवैधानिक स्थिति साफ है—25 नवंबर को राज्यसभा सदस्यता खत्म होने से हरदीप सिंह पुरी का मंत्री पद अपने आप खत्म नहीं होगा। अगर वह किसी भी सदन के सदस्य नहीं रहते हैं, तो संविधान उन्हें अधिकतम छह लगातार महीनों तक मंत्री बने रहने की अनुमति देता है। उसके भीतर उन्हें लोकसभा या राज्यसभा की सदस्यता हासिल करनी होगी, अन्यथा मंत्री पद छोड़ना पड़ेगा।

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