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महंगाई के बीच RBI की मौद्रिक नीति समीक्षा शुरू
मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक सोमवार, 5 अक्टूबर से शुरू हो रही है। बैठक 7 अक्टूबर तक चलेगी और अंतिम दिन RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा मौद्रिक नीति के फैसलों की घोषणा करेंगे। इस बार सबसे ज्यादा नजर रेपो रेट पर है, क्योंकि बढ़ती महंगाई, ऊंची कच्चे तेल की कीमतें, रुपये पर दबाव और वैश्विक केंद्रीय बैंकों के रुख के बीच ब्याज दर बढ़ने की चर्चा तेज है।
फिलहाल RBI की रेपो रेट 5.25 प्रतिशत है। केंद्रीय बैंक ने पिछली चार मौद्रिक नीति समीक्षाओं में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। इससे पहले 2025 के दौरान RBI ने कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती करते हुए रेपो रेट को 6.50 प्रतिशत से घटाकर 5.25 प्रतिशत किया था। अगस्त की बैठक में भी MPC के सभी छह सदस्यों ने दर को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने के पक्ष में मतदान किया था।
इस बार तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे रही है। अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82 प्रतिशत पहुंच गई थी। यह लगातार तीसरा महीना था जब महंगाई RBI के 4 प्रतिशत के मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर रही। इसके साथ कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी केंद्रीय बैंक के सामने चुनौती बनी हुई हैं।
बाजार और अर्थशास्त्रियों का बड़ा वर्ग इस बैठक में रेपो रेट बढ़ने की संभावना देख रहा है। Reuters के सर्वे में 61 में से 35 अर्थशास्त्रियों ने 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है। यदि ऐसा होता है तो रेपो रेट 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो जाएगी। यह फरवरी 2023 के बाद RBI की पहली रेपो रेट बढ़ोतरी होगी। हालांकि अंतिम फैसला MPC की बैठक में ही लिया जाएगा।
रेपो रेट में बदलाव का सीधा संबंध बैंकों की उधारी लागत से होता है। यदि RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंक भी कुछ प्रकार के कर्ज पर ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं। इसका असर होम लोन, कार लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की EMI या लोन अवधि पर पड़ सकता है। दूसरी तरफ ऊंची ब्याज दरों के माहौल में फिक्स्ड डिपॉजिट करने वाले ग्राहकों को बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बन सकती है।
बैठक में केवल रेपो रेट ही मुद्दा नहीं रहेगा। MPC देश में महंगाई की स्थिति, आर्थिक विकास, घरेलू मांग, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, कच्चे तेल के भाव और रुपये की चाल जैसे कई संकेतकों की समीक्षा करेगी। बाजार की नजर RBI के महंगाई और GDP वृद्धि से जुड़े अनुमानों में संभावित बदलाव पर भी रहेगी।
भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि फिलहाल मजबूत बनी हुई है। अप्रैल-जून तिमाही में अर्थव्यवस्था ने 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। मजबूत विकास दर के बीच महंगाई बढ़ने से RBI के सामने मूल्य स्थिरता और आर्थिक वृद्धि के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती है।
वैश्विक स्तर पर भी ब्याज दरों का माहौल बदल रहा है। अमेरिका और जापान सहित कुछ प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने हाल में ब्याज दरें बढ़ाई हैं। इससे वैश्विक पूंजी प्रवाह और मुद्रा बाजार पर असर पड़ सकता है। ऐसे में RBI के फैसले पर घरेलू परिस्थितियों के साथ अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का भी प्रभाव रहेगा।
तीन दिनों की चर्चा के बाद 7 अक्टूबर को सुबह 10 बजे RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा मौद्रिक नीति के फैसले की घोषणा करेंगे। आम लोगों, बैंकों, कारोबारियों और निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि RBI रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखता है या महंगाई के दबाव को देखते हुए ब्याज दर बढ़ाने का फैसला करता है।
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