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तारिक रहमान के दौरे पर क्यों नहीं बनी सहमति ढाका के फैसलों पर उठे सवाल

Ratna Netam
24 Aug 2026 7:17 PM IST
तारिक रहमान के दौरे पर क्यों नहीं बनी सहमति ढाका के फैसलों पर उठे सवाल
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नई दिल्ली। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा को लेकर शुरू हुई हलचल अब थम गई है। जिस दौरे को भारत-बांग्लादेश संबंधों में सुधार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा था, वह फिलहाल टल गया है। इस घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक समीकरणों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
तारिक रहमान की दिल्ली यात्रा ऐसे समय में प्रस्तावित थी, जब भारत और बांग्लादेश के रिश्ते पिछले कुछ समय से तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की कोशिशें चल रही थीं और माना जा रहा था कि उच्च स्तरीय बातचीत से कई मुद्दों पर आगे बढ़ने का रास्ता निकल सकता है। लेकिन यात्रा की अनिश्चितता ने एक बार फिर रिश्तों की जटिलताओं को सामने ला दिया है।
आखिर क्यों टली दिल्ली यात्रा?
रिपोर्ट्स के अनुसार, तारिक रहमान की भारत यात्रा को लेकर अंतिम सहमति नहीं बन पाई। बांग्लादेश सरकार की ओर से भी कहा गया कि यात्रा को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर बातचीत जारी थी, लेकिन दौरे की तारीख और एजेंडे को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।
इस मामले में सबसे बड़ा मुद्दा पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से जुड़ा विवाद माना जा रहा है। बांग्लादेश सरकार लगातार भारत से शेख हसीना और अन्य लोगों के प्रत्यर्पण की मांग करती रही है। यही मुद्दा दोनों देशों के बीच बातचीत में एक संवेदनशील विषय बना हुआ है।
राष्ट्रपति भवन के बयान से बढ़ी हलचल
तारिक रहमान की संभावित यात्रा को लेकर तब और चर्चा तेज हो गई, जब राष्ट्रपति भवन की ओर से एक कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी सामने आई और बाद में उसे वापस ले लिया गया। इससे यात्रा को लेकर कई तरह की अटकलें लगने लगीं।
हालांकि, आधिकारिक तौर पर यात्रा रद्द होने की पूरी वजह सार्वजनिक नहीं की गई है। दोनों देशों की ओर से कूटनीतिक भाषा में ही बयान दिए गए हैं और बातचीत के रास्ते खुले रखने की बात कही गई है।
बांग्लादेश की रणनीति पर उठे सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे पड़ोसी देश के साथ संबंधों को संभालना बांग्लादेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, ऊर्जा और क्षेत्रीय सहयोग जैसे कई मुद्दे जुड़े हुए हैं।
ऐसे में अगर किसी भी राजनीतिक मांग को प्राथमिकता देते हुए बातचीत की प्रक्रिया धीमी होती है तो इसका असर दोनों देशों के संबंधों पर पड़ सकता है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि ढाका को अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाए रखने की जरूरत है।
भारत के लिए क्यों अहम है बांग्लादेश?
भारत के लिए बांग्लादेश केवल पड़ोसी देश नहीं बल्कि रणनीतिक साझेदार भी है। पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी, सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से बांग्लादेश का महत्व काफी अधिक है।
वहीं बांग्लादेश के लिए भारत एक बड़ा व्यापारिक साझेदार और क्षेत्रीय सहयोगी है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से कई क्षेत्रों में सहयोग होता रहा है। इसलिए उच्च स्तर की बातचीत दोनों देशों के हित में मानी जाती है।
क्या फिर शुरू होगी बातचीत?
हालांकि तारिक रहमान की यात्रा फिलहाल टल गई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों देशों के बीच बातचीत बंद हो गई है। कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से संपर्क जारी रहने की उम्मीद है।
भारत और बांग्लादेश दोनों जानते हैं कि लंबे समय तक तनाव किसी के हित में नहीं है। ऐसे में आने वाले समय में किसी नए कार्यक्रम या बैठक के जरिए दोनों देश संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिश कर सकते हैं।
BRICS और क्षेत्रीय राजनीति पर भी असर
तारिक रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा को क्षेत्रीय राजनीति के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा था। भारत और बांग्लादेश दोनों दक्षिण एशिया में अपनी भूमिका मजबूत करना चाहते हैं।
अगर दोनों देशों के बीच उच्च स्तर की मुलाकात होती तो कई आर्थिक और कूटनीतिक मुद्दों पर चर्चा संभव थी। लेकिन यात्रा टलने से फिलहाल इन चर्चाओं पर विराम लग गया है।
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