- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- सिस्टम की कमजोरी बनी...
दिल्ली-एनसीआर
सिस्टम की कमजोरी बनी ठगों का हथियार, PAN के जरिए 50 करोड़ की धोखाधड़ी
nidhi
1 Oct 2026 9:15 AM IST

x
PAN कार्ड में फोटो बदलकर करोड़ों की ठगी
पूर्वी दिल्ली : दस्तावेजों और पहचान सत्यापन की कमजोरियों का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर ठगी करने का मामला सामने आया है। आरोपियों ने कथित तौर पर दूसरे लोगों के PAN नंबर का इस्तेमाल किया, लेकिन उस पर अपनी फोटो चस्पा कर फर्जी पहचान तैयार की। इसी तरीके से अलग-अलग वित्तीय प्रक्रियाओं का दुरुपयोग करते हुए करीब 50 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम देने का आरोप है।
ठगी का तरीका बेहद सुनियोजित बताया जा रहा है। आरोपियों ने पहले ऐसे PAN विवरण जुटाए, जिनका इस्तेमाल पहचान से जुड़ी प्रक्रियाओं में किया जा सके। इसके बाद मूल PAN धारक की जगह अपनी फोटो लगाकर दस्तावेज तैयार किए गए। इससे कागजों पर PAN नंबर किसी और व्यक्ति का रहता था, जबकि दस्तावेज दिखाने वाला व्यक्ति अलग होता था।
यही सबसे बड़ी खामी थी, जिसका फायदा कथित ठगों ने उठाया। यदि सत्यापन केवल PAN नंबर, नाम या बुनियादी दस्तावेजों के आधार पर किया जाए और फोटो तथा अन्य पहचान विवरण का गहराई से मिलान न हो, तो इस तरह की धोखाधड़ी की गुंजाइश बन सकती है। आरोप है कि इसी तकनीक का इस्तेमाल बार-बार किया गया और अलग-अलग पहचान के जरिए वित्तीय लाभ हासिल किए गए। कई मामलों में एक ही व्यक्ति अलग-अलग PAN विवरण के साथ सामने आ सकता था, जबकि फोटो उसकी अपनी होती थी। इससे सिस्टम में मौजूद पहचान संबंधी कमजोरियां लंबे समय तक पकड़ में नहीं आईं।
मामले में करीब 50 करोड़ रुपये की ठगी का आंकड़ा सामने आने के बाद जांच एजेंसियों का ध्यान इस बात पर भी है कि फर्जी दस्तावेज कहां तैयार किए गए और मूल PAN धारकों की जानकारी आरोपियों तक कैसे पहुंची। जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि क्या आरोपियों ने किसी अंदरूनी व्यक्ति की मदद ली थी या उन्होंने सार्वजनिक अथवा अवैध माध्यमों से PAN से जुड़ा डेटा हासिल किया। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि जिन संस्थानों के जरिए वित्तीय लेन-देन या लाभ लिया गया, वहां पहचान सत्यापन की प्रक्रिया कितनी मजबूत थी।
ऐसी ठगी में सबसे बड़ा खतरा निर्दोष PAN धारकों के लिए होता है। उनके नाम पर लेन-देन, कर्ज या अन्य वित्तीय गतिविधियां दर्ज हो सकती हैं, जबकि उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं होती। बाद में टैक्स, क्रेडिट रिकॉर्ड या जांच से जुड़े नोटिस आने पर असली व्यक्ति को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
यह मामला डिजिटल और दस्तावेजी सत्यापन के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत भी दिखाता है। केवल कागजी पहचान पर निर्भर रहने के बजाय फोटो, बायोमेट्रिक और अन्य विवरणों का क्रॉस-वेरिफिकेशन ऐसी धोखाधड़ी रोकने में महत्वपूर्ण हो सकता है। फिलहाल जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क, रकम के प्रवाह और इसमें शामिल लोगों की भूमिका खंगाल रही हैं। जांच पूरी होने के बाद यह साफ होगा कि 50 करोड़ रुपये की कथित ठगी कितने मामलों और कितनी फर्जी पहचान के जरिए की गई।
Next Story





