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अंतरराष्ट्रीय महंगाई का बोझ किसानों पर नहीं डालेंगे: शिवराज सिंह

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी, अल-नीनो की आशंका और मानसून में कमी के बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि केंद्र सरकार हर संकट में उनके साथ खड़ी है। राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026-27 के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि किसानों को खाद, बीज और वित्तीय संसाधनों की कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतें बढ़ने का बोझ किसानों पर नहीं डाला जाएगा।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि रबी सीजन की तैयारी किसी भी स्तर पर प्रभावित न हो। इसके लिए राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाया जा रहा है और खाद-बीज की उपलब्धता पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर कीमतों में बढ़ोतरी और मौसम संबंधी चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन किसानों को इनके सीधे असर से बचाने के लिए केंद्र आवश्यक कदम उठाएगा।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मानसून में करीब 12 फीसदी कमी दर्ज होने से कई राज्यों में कृषि क्षेत्र के सामने चुनौती पैदा हुई है। कुछ क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम रही है, जबकि कुछ स्थानों पर वितरण असमान रहा। ऐसी स्थिति में रबी की बुआई के लिए मिट्टी की नमी, सिंचाई और बीज की उपलब्धता महत्वपूर्ण हो जाती है। केंद्र ने राज्यों से कहा है कि वे जिला स्तर पर स्थिति का आकलन कर वैकल्पिक फसल योजना तैयार रखें।
उन्होंने कहा कि अल-नीनो की आशंका को भी हल्के में नहीं लिया जा सकता। मौसम में बदलाव का असर वर्षा, जल उपलब्धता और फसल उत्पादन पर पड़ सकता है। इसी वजह से सरकार राज्यों के साथ मिलकर ऐसी रणनीति बना रही है, जिसमें कम पानी वाली फसलों, सूखा सहन करने वाली किस्मों और वैज्ञानिक खेती को प्राथमिकता दी जा सके।
कृषि मंत्री ने किसानों के लिए उर्वरक उपलब्धता को लेकर भी आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया, डीएपी और अन्य उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि देश के किसानों को इसका अतिरिक्त बोझ न उठाना पड़े। इसके लिए सब्सिडी और आपूर्ति प्रबंधन के माध्यम से स्थिति को नियंत्रित किया जाएगा।
चौहान ने कहा कि किसानों को खाद की कमी का सामना न करना पड़े, इसके लिए आयात, घरेलू उत्पादन और राज्यवार वितरण की निगरानी की जा रही है। रबी सीजन में मांग बढ़ने से पहले ही आवश्यक भंडारण और आपूर्ति व्यवस्था पर काम किया जा रहा है। उन्होंने राज्य सरकारों से भी कहा कि वे वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता रखें और जमाखोरी या कालाबाजारी पर सख्ती करें।
कृषि मंत्री ने बीज की उपलब्धता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अच्छी गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीज किसानों तक समय पर पहुंचना जरूरी है। यदि किसान सही समय पर बुआई नहीं कर पाए तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसलिए राज्यों को अग्रिम रूप से बीज वितरण की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि मौसम की अनिश्चितता के कारण किसानों को फसल विविधीकरण की ओर भी बढ़ना होगा। ऐसे इलाकों में जहां पानी की कमी की संभावना है, वहां कम सिंचाई वाली फसलों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। दलहन, तिलहन और मोटे अनाज जैसी फसलें कई क्षेत्रों में बेहतर विकल्प बन सकती हैं।
चौहान ने कहा कि सरकार केवल इनपुट उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। खेती के लिए जरूरी ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड और अन्य वित्तीय योजनाओं के माध्यम से किसानों को समय पर पूंजी उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी प्राकृतिक या बाजार संकट की स्थिति में किसानों की आय और उत्पादन पर असर कम से कम हो, इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने अधिकारियों से फील्ड स्तर पर निगरानी बढ़ाने और वास्तविक स्थिति के आधार पर निर्णय लेने को कहा।
राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026-27 में विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों, अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। सम्मेलन में आगामी रबी सीजन की तैयारियों, खाद और बीज की उपलब्धता, सिंचाई, मौसम संबंधी जोखिम और किसानों को वित्तीय सहायता जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राज्य सरकारों को अपने यहां उपलब्ध जल संसाधनों और मिट्टी की नमी का आकलन कर फसल योजना तैयार करनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान देने की जरूरत बताई, जहां मानसून सामान्य से कम रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि खेती में जोखिम कम हो और उत्पादन बना रहे। इसके लिए तकनीक, मौसम पूर्वानुमान और कृषि विज्ञान केंद्रों की मदद भी ली जाएगी। किसानों तक समय पर सलाह पहुंचाने पर भी जोर दिया गया है।
चौहान ने दोहराया कि सरकार किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार की महंगाई से बचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका कहना था कि किसानों को महंगा खाद खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा और आवश्यक सब्सिडी व्यवस्था जारी रखी जाएगी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार किसानों के हितों को प्राथमिकता दे रही है। किसी भी आपदा, सूखा, कम बारिश या कीमतों में बढ़ोतरी की स्थिति में सरकार किसानों के साथ खड़ी रहेगी।
रबी सीजन को लेकर केंद्र की तैयारियां अब तेज हो गई हैं। राज्यों से रिपोर्ट मांगी जा रही है और खाद, बीज तथा सिंचाई की स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है। सरकार का दावा है कि किसी भी क्षेत्र में आवश्यक कृषि इनपुट की कमी नहीं होने दी जाएगी।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा की रीढ़ हैं। इसलिए सरकार की जिम्मेदारी है कि उन्हें हर जरूरी संसाधन समय पर मिले और वैश्विक संकट का असर उनके खेत और आय पर कम से कम पड़े।





