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राहुल गांधी और अमित शाह में जुबानी जंग तेज, बहस को लेकर मचा घमासान
Ratna Netam
5 Nov 2026 2:19 PM IST

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नई दिल्ली। देश की राजनीति में एक बार फिर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर दोनों नेताओं के बीच सियासी टकराव बढ़ता जा रहा है। राहुल गांधी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली बहस की चुनौती दिए जाने के बाद अमित शाह ने भी कांग्रेस नेता को संसद में आमने-सामने चर्चा करने की चुनौती दी है। गृह मंत्री ने कहा कि सरकार विपक्ष के आरोपों पर चर्चा के लिए तैयार है और आवश्यकता पड़ने पर संसद का विशेष सत्र भी बुलाया जा सकता है।अमित शाह ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र में किसी भी मुद्दे पर बहस करने का सबसे उचित मंच संसद है। यदि कांग्रेस और उसके नेता चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं, तो उन्हें संसद में आकर अपने आरोपों के समर्थन में तथ्य प्रस्तुत करने चाहिए। शाह ने राहुल गांधी को खुली चुनौती देते हुए कहा कि वह संसद में चर्चा के लिए आएं और सरकार उनके सवालों का जवाब देने के लिए तैयार है।
गृह मंत्री ने कहा कि विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन आरोपों को साबित करने की जिम्मेदारी भी उसी की है। उन्होंने कांग्रेस पर चुनावी व्यवस्था को लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। शाह के मुताबिक, सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं और संसदीय व्यवस्था के तहत हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है।दरअसल, राहुल गांधी पिछले कुछ समय से चुनाव आयोग और मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार हमलावर हैं। कांग्रेस नेता का आरोप है कि मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों के कारण लोकतांत्रिक प्रक्रियाप्रभावित हो रही है। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, ये विपक्ष के आरोप हैं और इन्हें स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकताइस विवाद ने उस समय और अधिक राजनीतिक तूल पकड़ लिया, जब एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी दलों ने 'वोट बचाओ, देश बचाओ' प्रदर्शन आयोजित किया। इस दौरान राहुल गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग की।
इसके बाद दो नवंबर को हैदराबाद में अमित शाह ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के आरोपों का जवाब देते हुए राहुल गांधी को संसद में बहस करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय पर विशेष सत्र आयोजित करने के लिए भी तैयार है। उनका कहना था कि विपक्ष को सड़क पर प्रदर्शन करने के साथ-साथ संसद के भीतर भी अपनी बात रखनी चाहिए।वहीं, राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सार्वजनिक मंच पर आमने-सामने बहस करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसी भी स्थान और मंच का चयन कर सकते हैं। राहुल गांधी ने अपनी चुनौती दोहराते हुए केंद्र सरकार और भाजपा नेतृत्व से सीधे सवालों के जवाब देने की मांग की। तीन और चार नवंबर को भी उन्होंने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।हालांकि, दोनों नेताओं की चुनौतियों में एक महत्वपूर्ण अंतर है। राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सार्वजनिक बहस की मांग कर रहे हैं, जबकि अमित शाह ने राहुल गांधी को संसद में चुनावी प्रक्रिया और कथित वोट चोरी के आरोपों पर चर्चा करने का प्रस्ताव दिया है। ऐसे में शाह के बयान को प्रधानमंत्री की ओर से राहुल गांधी की चुनौती स्वीकार किए जाने के रूप में नहीं देखा जा सकता।अमित शाह ने विपक्ष की राजनीतिक रणनीति पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनावी हार के बाद लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करती है। गृह मंत्री का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर तथ्यात्मक और संसदीय चर्चा होनी चाहिए, ताकि जनता के सामने स्थिति स्पष्ट हो सके।
दूसरी ओर, कांग्रेस का कहना है कि चुनावी पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है। पार्टी लगातार इस मुद्दे पर सरकार और चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग कर रही है। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की अनियमितता की आशंका को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।इस बीच, भाजपा के सहयोगी दल जनता दल यूनाइटेड ने भी राहुल गांधी से अमित शाह की संसदीय बहस की चुनौती स्वीकार करने की अपील की है। पार्टी ने सवाल उठाया कि जब सरकार संसद में चर्चा के लिए तैयार है, तो विपक्ष इस अवसर का उपयोग क्यों नहीं करता।राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह विवाद केवल दो नेताओं के बीच बयानबाजी तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता, विपक्ष के आरोपों की जांच और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनता का भरोसा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी और अमित शाह संसद में इस मुद्दे पर सीधे आमने-सामने होंगे। फिलहाल विशेष सत्र की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं हुई है। ऐसे में दोनों नेताओं की चुनौती ने राजनीतिक माहौल जरूर गरमा दिया है, लेकिन वास्तविक बहस कब और किस मंच पर होगी, यह स्पष्ट होना बाकी है।
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