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DUSU नतीजों के बाद BJP और कांग्रेस में जुबानी जंग

Ratna Netam
19 Sept 2026 8:33 PM IST
DUSU नतीजों के बाद BJP और कांग्रेस में जुबानी जंग
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नई दिल्ली।दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026 के नतीजों के बाद छात्र राजनीति के साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने चार केंद्रीय पदों में से तीन पर जीत दर्ज की है। अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद पर ABVP के उम्मीदवार विजयी हुए, जबकि उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने बाजी मारी। कांग्रेस समर्थित नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) इस बार चारों केंद्रीय पदों में से कोई भी पद नहीं जीत सकी।
नतीजे आने के बाद भाजपा नेताओं ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और उनके हालिया छात्र संवाद कार्यक्रम ‘छात्रों की गूंज’ को निशाने पर लिया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी के कार्यक्रम के नाम पर तंज करते हुए कहा कि उन्हें ‘गूंज’ तो सुनाई नहीं दी, लेकिन ‘धमाका’ जरूर सुनाई दिया। उनका इशारा DUSU चुनाव में ABVP के प्रदर्शन की ओर था।
भाजपा के कई अन्य नेताओं ने भी चुनाव परिणाम को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर राजनीतिक हमला किया। कुछ भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को ‘झूठ की गूंज’ तक बताया। भाजपा ने DUSU परिणामों को युवाओं के बीच ABVP को मिले समर्थन के रूप में पेश किया है। हालांकि DUSU का चुनाव दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच हुआ है और इसके नतीजों को पूरे देश के युवाओं की राजनीतिक राय का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि मानना उचित नहीं होगा।
तीन पदों पर ABVP का कब्जा
DUSU चुनाव के नतीजों में अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास ने जीत दर्ज की। उन्हें कुल 24,576 वोट मिले। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी NSUI के विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले। इस तरह यश डबास ने 2,053 वोटों के अंतर से अध्यक्ष पद अपने नाम किया।
अध्यक्ष पद का मुकाबला काफी करीबी रहा। मतगणना के अलग-अलग दौर में दोनों प्रमुख उम्मीदवारों के बीच बढ़त बदलती रही, लेकिन अंतिम परिणाम में यश डबास ने जीत हासिल की।
सचिव पद पर भी ABVP को सफलता मिली। संगठन की उम्मीदवार रिया छाबड़ी ने 21,650 वोट हासिल कर चुनाव जीता। उनके मुकाबले NSUI उम्मीदवार को 14,869 वोट मिले।
संयुक्त सचिव पद पर ABVP के लक्ष्य राज सिंह विजयी रहे। उन्हें 16,615 वोट मिले। इस पद पर समाजवादी छात्र सभा के विशेष यादव 15,778 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि NSUI के गोपाल चौधरी को 15,206 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे।
उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन की जीत
चार केंद्रीय पदों में उपाध्यक्ष का नतीजा सबसे अलग रहा। इस सीट पर न ABVP जीती और न ही NSUI। निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने 30,615 वोट हासिल कर बड़ी जीत दर्ज की।
दीपांशु शौकीन पहले NSUI से जुड़े रहे थे, लेकिन संगठन से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। उनके मुकाबले ABVP के ईशु मौर्य को 16,910 वोट मिले, जबकि NSUI के वीर चतरथ को 4,313 वोट मिले।
इस तरह चार केंद्रीय पदों में ABVP को तीन और एक पद निर्दलीय उम्मीदवार को मिला। NSUI को इस बार केंद्रीय पैनल में कोई पद नहीं मिला।
राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ पर तंज
DUSU चुनाव परिणाम के दिन ही राहुल गांधी का छात्र-युवा संवाद कार्यक्रम भी राजनीतिक चर्चा में रहा। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ‘छात्रों की गूंज’ नाम से छात्रों से जुड़े मुद्दों को उठाने का अभियान शुरू किया है। इसमें शिक्षा व्यवस्था, परीक्षाओं से जुड़ी समस्याएं, बेरोजगारी और युवाओं की आय जैसे मुद्दे उठाए जा रहे हैं।
इसी कार्यक्रम के नाम को आधार बनाकर भाजपा नेताओं ने DUSU परिणाम के बाद राहुल गांधी पर निशाना साधा। जेपी नड्डा की ‘गूंज नहीं, धमाका जरूर सुना’ वाली टिप्पणी इसी राजनीतिक संदर्भ में सामने आई।
भाजपा नेताओं ने दावा किया कि DUSU के नतीजे कांग्रेस की छात्र राजनीति और राहुल गांधी की युवा पहुंच को लेकर सवाल खड़े करते हैं। यह भाजपा का राजनीतिक आकलन है; चुनाव परिणाम अपने आप में दिल्ली विश्वविद्यालय के इस छात्रसंघ चुनाव तक सीमित जनादेश है।
अमित शाह ने ABVP कार्यकर्ताओं को दी बधाई
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी ABVP की जीत पर संगठन के कार्यकर्ताओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह परिणाम ABVP की ‘राष्ट्र प्रथम’ विचारधारा और छात्र कल्याण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता में युवाओं के विश्वास को दर्शाता है।
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद पर ABVP उम्मीदवारों की जीत पर बधाई दी। उन्होंने संगठन के छात्र कल्याण, सेवा और राष्ट्र निर्माण से जुड़े कार्यों का उल्लेख किया।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी चुनाव परिणाम के बाद ABVP के विजयी उम्मीदवारों को शुभकामनाएं दीं। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यश डबास, रिया छाबड़ी और लक्ष्य राज सिंह को जीत की बधाई देते हुए इसे ABVP के मूल्यों के प्रति छात्रों के समर्थन के रूप में पेश किया।
ये सभी प्रतिक्रियाएं भाजपा नेताओं की राजनीतिक व्याख्याएं हैं। चुनावी आंकड़े यह स्थापित करते हैं कि ABVP ने चार में से तीन केंद्रीय पद जीते, जबकि व्यापक युवा मतदाताओं की राजनीतिक प्राथमिकताओं पर इससे अलग निष्कर्ष निकालने के लिए व्यापक आंकड़ों की जरूरत होगी।
NSUI के लिए निराशाजनक रहे नतीजे
NSUI के लिए इस बार DUSU चुनाव के नतीजे निराशाजनक रहे। पिछले चुनाव में संगठन को उपाध्यक्ष पद पर सफलता मिली थी, लेकिन इस बार वह केंद्रीय पैनल में कोई सीट हासिल नहीं कर सका।
अध्यक्ष पद पर विजय शंकर मीणा ने ABVP उम्मीदवार को कड़ी चुनौती दी और करीब दो हजार वोट के अंतर से चुनाव हारे। दूसरी ओर उपाध्यक्ष पद पर NSUI का प्रदर्शन कमजोर रहा और उसके पूर्व सदस्य दीपांशु शौकीन ने निर्दलीय चुनाव लड़कर बड़ी जीत हासिल की।
दीपांशु की जीत NSUI के लिए अलग राजनीतिक चर्चा का कारण बनी, क्योंकि वह संगठन से टिकट नहीं मिलने के बाद मैदान में उतरे थे।
40 फीसदी से ज्यादा मतदान
DUSU चुनाव में करीब 40.46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। दिल्ली विश्वविद्यालय के अलग-अलग कॉलेजों के विद्यार्थियों ने छात्र संघ के केंद्रीय पदों के लिए मतदान किया।
DUSU चुनाव को देश के सबसे चर्चित विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनावों में गिना जाता है। ABVP, NSUI और वाम छात्र संगठनों के अलावा कई अन्य संगठन और निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में उतरते हैं। राष्ट्रीय राजनीतिक दलों से वैचारिक रूप से जुड़े छात्र संगठनों की मौजूदगी के कारण इन चुनावों के परिणाम पर राष्ट्रीय राजनीति में भी प्रतिक्रियाएं आती हैं।
विजय जुलूस पर रोक
चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद विजयी उम्मीदवारों और उनके समर्थकों को विश्वविद्यालय परिसर या बाहर विजय जुलूस नहीं निकालने के निर्देश दिए गए। दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों के मद्देनजर विश्वविद्यालय प्रशासन ने उम्मीदवारों को इसका पालन करने को कहा।
मतगणना पूरी होने के बाद अध्यक्ष पद पर यश डबास, उपाध्यक्ष पद पर दीपांशु शौकीन, सचिव पद पर रिया छाबड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह की जीत की घोषणा हुई।
कैंपस के मुद्दे भी रहे चुनाव के केंद्र में
DUSU चुनाव प्रचार के दौरान छात्र सुरक्षा, हॉस्टल, पीजी, फीस, महिला छात्रों के लिए सुविधाएं और कैंपस की बुनियादी समस्याएं प्रमुख मुद्दों में शामिल रहीं। अलग-अलग छात्र संगठनों ने इन विषयों को लेकर अपने वादे किए।
ABVP के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार यश डबास ने चुनाव प्रचार के दौरान हॉस्टल और पीजी का सुरक्षा ऑडिट कराने, नए गर्ल्स हॉस्टल की मांग और छात्रों के लिए हेल्पलाइन जैसे मुद्दों को उठाया था। अब चुनाव जीतने के बाद निर्वाचित पदाधिकारियों के सामने इन वादों को छात्रसंघ के माध्यम से आगे बढ़ाने की चुनौती होगी।
नतीजों पर राष्ट्रीय राजनीति तेज
DUSU चुनाव के नतीजे सामने आते ही भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई। भाजपा ने ABVP की तीन सीटों की जीत को प्रमुखता से उठाते हुए राहुल गांधी के छात्र संवाद अभियान पर हमला किया।
राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम शिक्षा, परीक्षा और बेरोजगारी जैसे विषयों को लेकर छात्रों से संवाद पर केंद्रित है। भाजपा ने उसी नाम का इस्तेमाल करते हुए DUSU चुनाव परिणाम को कांग्रेस पर राजनीतिक हमले का माध्यम बनाया।
इस चुनाव का स्पष्ट तथ्य यह है कि ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पद जीते, निर्दलीय दीपांशु शौकीन उपाध्यक्ष बने और NSUI को केंद्रीय पैनल में कोई पद नहीं मिला। इन नतीजों के राजनीतिक मायने को लेकर भाजपा, कांग्रेस और दूसरे दल अपनी-अपनी व्याख्या कर सकते हैं, लेकिन DUSU का जनादेश दिल्ली विश्वविद्यालय के मतदान करने वाले छात्रों से संबंधित है।
फिलहाल नतीजों के बाद ABVP अपने तीन पदों की जीत का जश्न मना रही है, जबकि निर्दलीय दीपांशु शौकीन की उपाध्यक्ष पद पर जीत भी चर्चा में है। दूसरी ओर भाजपा के ‘गूंज नहीं, धमाका’ वाले तंज ने DUSU चुनाव के नतीजों को कैंपस की छात्र राजनीति से निकालकर राष्ट्रीय राजनीतिक बयानबाजी के केंद्र में ला दिया है।
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