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विकास लंगरपुरिया की अंतरिम जमानत खारिज

Ratna Netam
26 Sept 2026 9:58 PM IST
विकास लंगरपुरिया की अंतरिम जमानत खारिज
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नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने विकास गुलिया उर्फ विकास लंगरपुरिया को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने उसके पुराने रिकॉर्ड और आपराधिक इतिहास को देखते हुए राहत देने से मना किया। विकास ने अपनी मां की बीमारी का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उसकी याचिका स्वीकार नहीं की।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट की डिवीजन बेंच ने मामले पर सुनवाई करते हुए विकास लंगरपुरिया के पिछले रिकॉर्ड को महत्वपूर्ण माना। अदालत के सामने यह तथ्य भी रखा गया कि वह पहले जमानत पर रहने के दौरान कथित तौर पर फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल करके संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भाग गया था।
इसी पृष्ठभूमि को देखते हुए हाई कोर्ट ने उसे अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। विकास की ओर से अपनी मां की बीमारी को अंतरिम जमानत का आधार बनाया गया था। उसने अदालत से कुछ समय के लिए जमानत देने का अनुरोध किया था, लेकिन बेंच ने उसके पुराने आचरण और आपराधिक इतिहास को ध्यान में रखते हुए आवेदन मंजूर नहीं किया।मामले में विकास लंगरपुरिया का पिछला रिकॉर्ड अदालत के फैसले में अहम रहा। जानकारी के अनुसार, जमानत पर बाहर रहने के दौरान वह कथित तौर पर फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल कर UAE चला गया था। बाद में उसके खिलाफ जारी लुक आउट सर्कुलर (LOC) और रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर कार्रवाई की गई।
विकास को वर्ष 2019 में अबू धाबी में पकड़ा गया था। उसके खिलाफ LOC और रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद उसकी तलाश की जा रही थी। इसके बाद अबू धाबी में उसे पकड़ लिया गया। अदालत ने अंतरिम जमानत की मांग पर विचार करते समय इस पूरे घटनाक्रम को भी ध्यान में रखा।अंतरिम जमानत की मांग करते हुए विकास ने अपनी मां की स्वास्थ्य स्थिति का हवाला दिया। उसकी ओर से अदालत के सामने कहा गया कि मां की बीमारी के कारण उसे कुछ समय के लिए राहत दी जाए। हालांकि अदालत ने मामले से जुड़े पिछले तथ्यों और उसके रिकॉर्ड को देखते हुए जमानत देने के पक्ष में फैसला नहीं किया।
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट की बेंच ने मामले की परिस्थितियों पर गौर किया। अदालत के सामने सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में विकास का पहले जमानत पर रहते हुए देश छोड़कर जाना शामिल था। उसके कथित तौर पर फर्जी पासपोर्ट के जरिए UAE जाने के तथ्य को गंभीरता से लिया गया।किसी आरोपी या दोषी की अंतरिम जमानत की मांग पर अदालत मामले की परिस्थितियों और आवेदन में बताए गए कारणों पर विचार करती है। इस मामले में विकास ने पारिवारिक कारण के रूप में अपनी मां की बीमारी का उल्लेख किया था। इसके बावजूद अदालत ने उसके पिछले आचरण को देखते हुए राहत देना उचित नहीं माना।
विकास गुलिया को विकास लंगरपुरिया के नाम से भी जाना जाता है। अदालत के सामने उसके आपराधिक इतिहास का भी उल्लेख किया गया। बेंच ने इसी रिकॉर्ड और पहले की घटनाओं को देखते हुए अंतरिम जमानत की मांग खारिज कर दी।जानकारी के अनुसार, जमानत पर रहने के दौरान विकास के UAE भाग जाने के बाद उसके खिलाफ कार्रवाई की गई थी। उसे तलाशने के लिए LOC और रेड कॉर्नर नोटिस का सहारा लिया गया। आखिरकार वर्ष 2019 में उसे अबू धाबी में पकड़ लिया गया था।
दिल्ली हाई कोर्ट में अब उसने मां की बीमारी को आधार बनाकर अंतरिम राहत की मांग की। हालांकि उसके आवेदन पर सुनवाई के दौरान अदालत ने केवल मौजूदा परिस्थितियों को ही नहीं, बल्कि उसके पुराने रिकॉर्ड पर भी गौर किया। अदालत ने पाया कि पहले जमानत मिलने के दौरान उसके आचरण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।इसी वजह से कोर्ट ने उसकी अंतरिम जमानत की मांग को स्वीकार नहीं किया। बेंच के फैसले के बाद विकास लंगरपुरिया को फिलहाल इस आधार पर कोई राहत नहीं मिली है।
मां की बीमारी जैसे पारिवारिक कारण को लेकर दाखिल अंतरिम जमानत आवेदन के बावजूद अदालत ने उसके पिछले आचरण को अधिक महत्वपूर्ण माना। अदालत के सामने यह तथ्य था कि वह पहले भी जमानत पर रह चुका है और इसी अवधि में वह कथित तौर पर फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल करके विदेश चला गया था।इसके बाद उसे वापस पकड़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई की जरूरत पड़ी। LOC और रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर उसे अबू धाबी में पकड़ा गया था। इस पूरे घटनाक्रम को देखते हुए अदालत ने अंतरिम जमानत के दौरान उसके आचरण को लेकर भी विचार किया।
दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने इसी आधार पर विकास लंगरपुरिया को अंतरिम राहत देने से मना कर दिया। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट की बेंच ने उसके आवेदन पर सुनवाई की और मां की बीमारी के आधार पर मांगी गई जमानत को स्वीकार नहीं किया।
मामले में कोर्ट का फैसला इस बात पर केंद्रित रहा कि अंतरिम जमानत की मांग पर विचार करते समय आवेदक के पुराने रिकॉर्ड और पहले मिली जमानत के दौरान उसके आचरण को भी देखा जाना जरूरी है। विकास के मामले में उसका कथित रूप से फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल करके UAE भाग जाना महत्वपूर्ण तथ्य रहा।
फिलहाल विकास गुलिया उर्फ विकास लंगरपुरिया को दिल्ली हाई कोर्ट से अंतरिम जमानत नहीं मिली है। मां की बीमारी के आधार पर मांगी गई राहत को जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट की डिवीजन बेंच ने उसके पुराने रिकॉर्ड और आपराधिक इतिहास को देखते हुए खारिज कर दिया। विकास को वर्ष 2019 में LOC और रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर अबू धाबी में पकड़ा गया था।
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