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दिल्ली में विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन, हिरासत से छूटने के बाद राहुल गांधी राजघाट की ओर रवाना

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच राजधानी दिल्ली में सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी सांसदों ने जंतर-मंतर की ओर मार्च करने का प्रयास किया, लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोककर हिरासत में ले लिया। करीब दो घंटे बाद नेताओं को रिहा किए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद राहुल गांधी ने विपक्षी सांसदों के साथ राजघाट जाने की बात कही। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि विपक्ष शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करना चाहता है, लेकिन पुलिस उसे ऐसा करने से रोक रही है। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट किए जाने का भी आरोप लगाया। इस घटनाक्रम के बीच मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है।
जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे थे विपक्षी सांसद
कांग्रेस और INDIA गठबंधन के सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे थे।
इस दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी नेताओं ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया।
इसके बाद विपक्षी सांसदों और पुलिस के बीच गतिरोध पैदा हो गया।
नेताओं ने सड़क पर बैठकर विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद पुलिस ने कई सांसदों को हिरासत में लिया।
विपक्षी दलों का कहना है कि वे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी मांगें शांतिपूर्ण तरीके से उठाना चाहते हैं।
राहुल गांधी ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
हिरासत से रिहा होने के बाद राहुल गांधी ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा कि विपक्षी सांसद शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें लगातार रोका जा रहा है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई।
उन्होंने कहा, "हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहते हैं और हमें प्रदर्शन से रोका जा रहा है। हमारे लोगों को मारा गया और हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन से रोका जा रहा है। हम राजघाट जा रहे हैं।"
हालांकि, कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट के संबंध में राहुल गांधी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का अधिकार है।
हिरासत में लेने के बाद किया गया रिहा
दिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कई अन्य विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया था।
बुधवार, 7 अक्टूबर के प्रदर्शन में राहुल गांधी को बाराखंभा रोड थाने और प्रियंका गांधी सहित अन्य नेताओं को अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया था।
बाद में पुलिस ने हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा कर दिया।
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, बुधवार के प्रदर्शन में हिरासत में लिए गए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को रात आठ बजे के कुछ समय बाद रिहा किया गया था।
गुरुवार को भी विपक्षी दलों ने विरोध जारी रखा और पुलिस ने उनके मार्च को रोकने की कार्रवाई की।
राजघाट जाने का किया ऐलान
जंतर-मंतर की ओर मार्च रोके जाने के बाद राहुल गांधी ने राजघाट जाने की बात कही।
राजघाट राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का समाधि स्थल है और राजनीतिक दल अक्सर यहां पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
राहुल गांधी के इस ऐलान के बाद राजघाट के आसपास भी सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण हो गई।
दिल्ली पुलिस ने राजघाट और उसके आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए हैं।
इसके तहत संबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति भीड़ एकत्र करने और विरोध प्रदर्शन पर रोक लगाई गई है।
हालांकि, राहुल गांधी और सभी विपक्षी सांसद राजघाट पहुंच गए हैं, इसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं हुई है।
खरगे की अगुवाई में विपक्षी दलों की बैठक
विरोध प्रदर्शन से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्षी सांसदों के लिए दोपहर के भोजन का कार्यक्रम आयोजित किया था।
गुरुवार को यह कार्यक्रम दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित एक रेस्टोरेंट में रखा गया।
इसमें कांग्रेस सहित INDIA गठबंधन के विभिन्न दलों के सांसदों को आमंत्रित किया गया था।
बैठक के दौरान चुनाव आयोग के खिलाफ जारी विरोध और आगे की रणनीति को लेकर चर्चा होने की जानकारी सामने आई।
इसके बाद सांसदों ने प्रदर्शन की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास किया।
इससे पहले बुधवार को भी खरगे ने विपक्षी सांसदों के लिए जनपथ स्थित रेस्टोरेंट में भोजन का कार्यक्रम आयोजित किया था।
चुनाव आयोग के खिलाफ क्यों हो रहा प्रदर्शन?
विपक्षी दलों का यह विरोध मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर उठे विवाद से जुड़ा है।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए।
विपक्ष का दावा है कि इससे नागरिकों के मतदान अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और पुनरीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं।
इसके साथ ही विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
दूसरी ओर चुनाव आयोग ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों से इनकार किया है।
आयोग के अनुसार, मतदाता सूची का पुनरीक्षण अपात्र और दोहराई गई प्रविष्टियों को हटाकर मतदाता रिकॉर्ड को अद्यतन करने की प्रक्रिया है।
लगातार प्रदर्शन कर रहे विपक्षी नेता
दिल्ली में विपक्षी दल लगातार चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
सात अक्टूबर को भी राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य सांसदों ने जंतर-मंतर की ओर मार्च करने का प्रयास किया था।
उस दौरान पुलिस ने बसों में सवार सांसदों को प्रदर्शन स्थल पहुंचने से पहले रोक दिया।
इसके बाद कई विपक्षी नेता सड़क पर बैठ गए और प्रदर्शन शुरू कर दिया।
पुलिस द्वारा हटाए जाने के दौरान दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हुई।
मौके पर मौजूद कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के घायल होने की भी जानकारी सामने आई थी।
विपक्षी नेताओं ने इसके लिए पुलिस की कार्रवाई को जिम्मेदार बताया था।
दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा का दिया हवाला
दिल्ली पुलिस का कहना है कि राजधानी के संवेदनशील क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है।
नई दिल्ली जिले के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रदर्शन और मार्च को लेकर प्रतिबंधात्मक आदेश लागू हैं।
पुलिस के अनुसार, बिना अनुमति आयोजित मार्च और प्रदर्शन को रोकने के लिए कार्रवाई की गई।
अधिकारियों ने संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की है।
वहीं कांग्रेस का आरोप है कि पुलिस की कार्रवाई विपक्षी नेताओं के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को प्रभावित कर रही है।
इस मुद्दे पर पुलिस और विपक्षी दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़ा विपक्ष
कांग्रेस और INDIA गठबंधन के कई नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
उनका कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े विवादों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए।
राहुल गांधी ने भी विरोध प्रदर्शन जारी रखने की बात कही है।
उन्होंने पहले कहा था कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
हालांकि, चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोप राजनीतिक दावे हैं। किसी विशिष्ट अनियमितता की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही की जा सकती है।
विरोध प्रदर्शन से राजधानी में बढ़ी सुरक्षा
लगातार विरोध प्रदर्शनों के कारण दिल्ली के प्रमुख क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है।
कनॉट प्लेस, जनपथ, जंतर-मंतर और चुनाव आयोग मुख्यालय के आसपास पुलिस बल तैनात किया गया है।
प्रदर्शनकारियों की आवाजाही पर निगरानी रखने के लिए महत्वपूर्ण मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई है।
पुलिस की कोशिश प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था और यातायात को प्रभावित होने से बचाने की है।
वहीं विपक्षी सांसद लगातार प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
राहुल गांधी के बयान से सियासत तेज
राहुल गांधी ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन से रोके जाने का आरोप लगाकर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ कथित मारपीट का मुद्दा भी उठाया है।
दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था और प्रतिबंधात्मक आदेशों का पालन कराना उसकी जिम्मेदारी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने चुनाव आयोग से जुड़े विवाद को और राजनीतिक महत्व दे दिया है।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मतदाता सूची की पुनरीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल राहुल गांधी और विपक्षी सांसदों ने विरोध जारी रखने तथा राजघाट जाने की बात कही है। दिल्ली पुलिस ने राजघाट समेत संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी है। अब विपक्षी नेताओं के अगले कदम और प्रशासन की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।





