- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- सफदरजंग अस्पताल में...
सफदरजंग अस्पताल में सोनम वांगचुक की स्टाफ से बहस का वीडियो वायरल

नई दिल्ली : सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के कर्मचारियों और अधिकारियों से बहस करते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।
वायरल वीडियो में सोनम वांगचुक अस्पताल के अधिकारियों और पुलिसकर्मियों से यह सवाल करते दिखाई दे रहे हैं कि उन्हें अस्पताल से बाहर जाने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है। वह अधिकारियों से मांग कर रहे हैं कि या तो उन्हें अस्पताल से बाहर जाने दिया जाए या फिर उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया जाए।
बताया जा रहा है कि यह घटना 21 जुलाई की है। इसी दिन दिल्ली हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि सोनम वांगचुक को उनकी पसंद के अस्पताल में स्थानांतरित किया जाए। इससे पहले उन्हें जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन स्थल से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
वांगचुक उस समय भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें चिकित्सा निगरानी के लिए अस्पताल ले जाया गया था।
वायरल वीडियो में दिखी नाराजगी
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में सोनम वांगचुक अपने कमरे के बाहर मौजूद अस्पताल के अधिकारियों और पुलिसकर्मियों से बातचीत करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में वह बार-बार यह सवाल करते हैं कि उन्हें बाहर जाने से क्यों रोका जा रहा है।
वीडियो में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है कि यदि प्रशासन उन्हें रोकना चाहता है तो उन्हें गिरफ्तार किया जाए, लेकिन इस तरह अस्पताल में रखना उचित नहीं है। उन्होंने अधिकारियों से दरवाजा खोलने और बाहर जाने देने की मांग की।
वांगचुक वीडियो में काफी नाराज दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि मानसिक तनाव के कारण उनकी तबीयत बिगड़ती है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी। उन्होंने अस्पताल प्रशासन और पुलिस से स्पष्ट जवाब मांगा।
This is the video from Safdarjung hospital in Delhi where Sonam Wangchuk was under medical observation. After the high court order, he was leaving for Medanta when Safdarjung hospital staff tried to stop him on July 21.
— Piyush Rai (@Benarasiyaa) July 25, 2026
Right wing narrative: Look he is so fit. Walking around… pic.twitter.com/V9qWdXzr3J
भूख हड़ताल और प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
सोनम वांगचुक लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। इस मामले में उनका प्रदर्शन भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर था।
वांगचुक का कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना जरूरी है, क्योंकि लाखों युवा इन परीक्षाओं के आधार पर अपने भविष्य का निर्माण करते हैं। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था।
जंतर-मंतर पर उनके विरोध प्रदर्शन के दौरान स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें अस्पताल ले जाया गया। बाद में उनके स्थानांतरण को लेकर मामला दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंचा, जहां अदालत ने उनकी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने का निर्देश दिया था।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद अस्पताल में भर्ती
This is the video from Safdarjung hospital in Delhi where Sonam Wangchuk was under medical observation. After the high court order, he was leaving for Medanta when Safdarjung hospital staff tried to stop him on July 21.
— Piyush Rai (@Benarasiyaa) July 25, 2026
Right wing narrative: Look he is so fit. Walking around… pic.twitter.com/V9qWdXzr3J
जानकारी के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में रखा गया। अस्पताल में रहते हुए भी उन्होंने अपनी मांगों को लेकर रुख कायम रखा।
वायरल वीडियो में उनकी नाराजगी मुख्य रूप से इस बात को लेकर दिखाई दे रही है कि उन्हें अस्पताल से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। उन्होंने अधिकारियों से स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
हालांकि, अस्पताल प्रशासन या पुलिस की ओर से इस वायरल वीडियो और घटना को लेकर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि उस समय उन्हें किस कानूनी या प्रशासनिक आदेश के तहत अस्पताल में रखा गया था।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का दौर
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों ने वांगचुक के समर्थन में आवाज उठाई और उनके सवालों को जायज बताया। वहीं, कुछ लोगों ने कहा कि अस्पताल में मरीज की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को निर्णय लेने का अधिकार होता है।
सोनम वांगचुक देश में शिक्षा, पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों को लेकर जाने जाते हैं। लद्दाख के विकास और वहां के लोगों की मांगों को लेकर भी वह लगातार सक्रिय रहे हैं।
प्रशासन के सामने चुनौती
इस घटना ने एक बार फिर प्रदर्शनकारियों के अधिकार, स्वास्थ्य सुरक्षा और प्रशासनिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। जब कोई व्यक्ति आंदोलन के दौरान स्वास्थ्य कारणों से अस्पताल में भर्ती होता है, तो उसकी इच्छा और चिकित्सा जरूरतों के बीच तालमेल बनाना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण होता है।
फिलहाल वायरल वीडियो को लेकर लोगों की नजर आगे की घटनाओं पर बनी हुई है। सोनम वांगचुक के आंदोलन, उनकी मांगों और प्रशासन के रुख को लेकर आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
यह मामला केवल एक व्यक्ति और अस्पताल प्रशासन के बीच विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को किस तरह संतुलित किया जाए।





