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सीबीसीआई के वार्षिक क्रिसमस समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन शामिल

SHIDDHANT
18 Dec 2025 10:53 PM IST
सीबीसीआई के वार्षिक क्रिसमस समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन शामिल
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Delhi दिल्ली। कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) के वार्षिक क्रिसमस समारोह में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने देशवासियों को क्रिसमस और नववर्ष 2026 की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि क्रिसमस केवल किसी एक धर्म के अनुयायियों का पर्व नहीं है, बल्कि यह सभी अच्छे लोगों के लिए खुशी, प्रेम और सेवा का संदेश लेकर आता है।
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा, “मैं आप सभी के साथ इस आनंदमय
क्रिसमस
समारोह में शामिल होकर बेहद प्रसन्न हूं और आप सभी को मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं—मेरी क्रिसमस और नववर्ष 2026 की अग्रिम बधाई। क्रिसमस ऐसा पर्व है जो केवल आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवता, करुणा और भाईचारे की भावना को मजबूत करता है।”
सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि यीशु मसीह का जीवन प्रेम, त्याग और निःस्वार्थ सेवा का प्रतीक है। उनके उपदेश आज भी समाज को सही दिशा दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में ऐसे पर्व सामाजिक एकता और आपसी सद्भाव को और मजबूत करते हैं।
कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने भारत की बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि यहां सभी धर्मों के त्योहार समान उत्साह और सम्मान के साथ मनाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि यही भारत की सबसे बड़ी ताकत है, जो “एकता में विविधता” के सिद्धांत को जीवंत बनाती है।
सीबीसीआई के मंच से उन्होंने ईसाई समुदाय द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा के क्षेत्र में दिए जा रहे योगदान की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि चर्च और उससे जुड़े संस्थान वर्षों से गरीबों, वंचितों और जरूरतमंदों की सेवा में अग्रणी भूमिका निभाते आ रहे हैं। यह सेवा भावना ही क्रिसमस का वास्तविक संदेश है।
इस मौके पर उपराष्ट्रपति ने युवाओं से भी आह्वान किया कि वे प्रेम, शांति और सहिष्णुता के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाएं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब दुनिया कई चुनौतियों का सामना कर रही है, तब ऐसे पर्व हमें मानवता के साझा मूल्यों की याद दिलाते हैं।
समारोह में देशभर से आए कैथोलिक बिशप, धर्मगुरु, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। क्रिसमस कैरोल, प्रार्थनाएं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। कार्यक्रम के अंत में उपराष्ट्रपति ने एक बार फिर सभी देशवासियों के लिए शांति, समृद्धि और सौहार्द की कामना की और कहा कि क्रिसमस का संदेश तभी सार्थक होगा, जब हम इसे अपने आचरण और कर्मों में उतारें।
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