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IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग केस में टला फैसला, 10 सितंबर को लालू परिवार के लिए अहम दिन

नई दिल्ली। IRCTC से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तथा उनके परिवार से जुड़े मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट का फैसला फिलहाल टल गया है। अदालत अब 10 सितंबर को आरोप तय करने के मुद्दे पर अपना आदेश सुना सकती है। ऐसे में यह तारीख मामले की आगे की कानूनी दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अदालत के सामने फिलहाल मुख्य सवाल यह है कि जांच एजेंसी की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों, बयानों और अन्य सामग्री के आधार पर आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय करने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं या नहीं। अदालत यदि आरोप तय करने का आदेश देती है तो इसके बाद मामला नियमित सुनवाई की दिशा में आगे बढ़ेगा। वहीं, अदालत का फैसला अलग होने की स्थिति में आगे की कानूनी प्रक्रिया भी उसी के अनुसार निर्धारित होगी।
10 सितंबर को खुलेगा अगला पन्ना
मामले में अब सभी की नजर 10 सितंबर को आने वाले संभावित आदेश पर टिकी हुई है। आरोप तय करने का चरण किसी भी आपराधिक मुकदमे में महत्वपूर्ण माना जाता है। इस स्तर पर अदालत यह तय करती है कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री के आधार पर संबंधित आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार है या नहीं।
यह फैसला आरोपियों को दोषी या निर्दोष घोषित करने का निर्णय नहीं होता। यदि आरोप तय किए जाते हैं तो इसके बाद अभियोजन पक्ष को मुकदमे के दौरान अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य पेश करने होते हैं और आरोपियों को उनका बचाव करने का अवसर मिलता है। अंतिम निर्णय पूरी न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होता है।
क्या है IRCTC से जुड़ा मामला?
यह मामला भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम यानी IRCTC से संबंधित कथित अनियमितताओं से जुड़ा बताया जाता है। मामले को लेकर जांच एजेंसियों ने वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों सहित विभिन्न पहलुओं की जांच की है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू को लेकर जांच आगे बढ़ाई और इसी सिलसिले में मामला अदालत तक पहुंचा।
जांच एजेंसी की ओर से अदालत के समक्ष अपनी दलीलें और दस्तावेज पेश किए गए हैं। दूसरी ओर आरोपियों की तरफ से भी अपना पक्ष रखा गया है। अब अदालत को दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री के आधार पर यह तय करना है कि औपचारिक आरोप तय करने का आधार बनता है या नहीं।
लालू परिवार के लिए क्यों अहम है फैसला?
इस मामले में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार का नाम जुड़े होने के कारण राजनीतिक हलकों में भी अदालती घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है। बिहार की राजनीति में लालू प्रसाद और उनका परिवार लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में मामले में होने वाला प्रत्येक बड़ा कानूनी घटनाक्रम राजनीतिक चर्चा का विषय भी बनता रहा है।
हालांकि, कानूनी प्रक्रिया में आरोप लगना और आरोप साबित होना अलग-अलग चरण हैं। अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने की स्थिति में भी इसे दोष सिद्ध होना नहीं माना जाता। अभियोजन पक्ष को मुकदमे के दौरान अपने आरोपों को साक्ष्यों के आधार पर साबित करना होता है और बचाव पक्ष को उन दावों को चुनौती देने का पूरा अवसर मिलता है।
अदालत के आदेश पर टिकी नजर
फिलहाल राउज एवेन्यू कोर्ट ने आरोप तय करने से जुड़े आदेश को आगे के लिए टाल दिया है। अब 10 सितंबर की तारीख महत्वपूर्ण हो गई है। अदालत उस दिन आदेश सुनाती है तो यह साफ हो सकता है कि संबंधित आरोपियों के खिलाफ मामला किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
यदि अदालत को रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री में प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार नजर आता है और आरोप तय किए जाते हैं तो इसके बाद मामले में ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। इसमें अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य और अन्य सामग्री अदालत के समक्ष पेश की जा सकती है। इसके बाद बचाव पक्ष को भी अपना पक्ष रखने और अभियोजन के साक्ष्यों को चुनौती देने का अवसर मिलेगा।
लंबे समय से चर्चा में मामला
IRCTC से जुड़ा यह मामला लंबे समय से कानूनी और राजनीतिक चर्चा में रहा है। समय-समय पर इस मामले में अदालत में सुनवाई होती रही है। जांच एजेंसी और आरोपियों की ओर से अपने-अपने तर्क रखे गए हैं। अब मामला उस महत्वपूर्ण चरण पर है जहां अदालत को आरोप तय करने के सवाल पर फैसला करना है।
फिलहाल सभी पक्षों को 10 सितंबर के आदेश का इंतजार है। अदालत का निर्णय ही तय करेगा कि मामले में आगे किस प्रकार की न्यायिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी। तब तक लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार से जुड़े इस बहुचर्चित मामले में कानूनी तस्वीर स्पष्ट होने के लिए इंतजार करना होगा।





