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15 अगस्त को लाल किले से पहली बार होगा वंदे मातरम का गायन

Ratna Netam
10 Aug 2026 8:38 PM IST
15 अगस्त को लाल किले से पहली बार होगा वंदे मातरम का गायन
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नई दिल्ली : देश इस साल 15 अगस्त को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। हर साल की तरह इस बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराएंगे और देशवासियों को संबोधित करेंगे, लेकिन 2026 के स्वतंत्रता दिवस समारोह में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेगा। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, पहली बार प्रधानमंत्री के संबोधन से पहले लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' की प्रस्तुति होगी। इसके साथ ही इस साल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने को भी विशेष रूप से रेखांकित किया जाएगा।
रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह का पारंपरिक क्रम बदला गया है। समारोह की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले पहुंचने से होगी। इसके बाद राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' प्रस्तुत किया जाएगा। राष्ट्रगीत की प्रस्तुति के बाद प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और फिर राष्ट्रगान 'जन गण मन' का गायन होगा। इसके बाद प्रधानमंत्री देश के नाम अपना संबोधन देंगे। इस बदलाव को समारोह के इस वर्ष के विशेष महत्व से जोड़कर देखा जा रहा है।
इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह की थीम भी युवाओं पर केंद्रित रखी गई है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, समारोह की थीम 'युवा शक्ति - विकसित भारत की यात्रा का नेतृत्व' है। इसके जरिए देश के विकास में युवा भारतीयों की भूमिका को प्रमुखता दी जाएगी। भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में युवाओं की भागीदारी और उनके योगदान को समारोह में विशेष रूप से सामने लाने की तैयारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ऐसे युवाओं को सम्मानित किए जाने का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है, जो देश के विकास और भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
लाल किले की प्राचीर से 'वंदे मातरम' की प्रस्तुति को ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित 'वंदे मातरम' भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति की भावना का महत्वपूर्ण प्रतीक बना था। यह गीत पहली बार वर्ष 1882 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास 'आनंदमठ' में प्रकाशित हुआ था। बाद में इसकी शुरुआती पंक्तियों को भारत के राष्ट्रगीत के रूप में अपनाया गया।
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 'वंदे मातरम' ने लोगों को एकजुट करने और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रवादी आंदोलन से जुड़े लोगों के बीच यह गीत प्रेरणा का स्रोत रहा। इसके शब्दों में मातृभूमि के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना दिखाई देती है। यही वजह है कि भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के इतिहास में 'वंदे मातरम' का एक विशेष स्थान है।
इस वर्ष समारोह के दौरान 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने का उल्लेख भी किया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय वायुसेना का एक हेलीकॉप्टर समारोह के दौरान एक बड़ा राष्ट्रीय ध्वज लेकर उड़ान भर सकता है। इसे भी 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि समारोह की अंतिम प्रस्तुति और कार्यक्रमों का विस्तृत स्वरूप संबंधित व्यवस्थाओं के अनुसार सामने आएगा।
स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, लाल किले और आसपास के इलाकों में 20 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जाएगी। समारोह स्थल और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी के लिए एक हजार से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की व्यवस्था है। इसके अलावा फेस रिकग्निशन सिस्टम और ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम के जरिए भी निगरानी की जाएगी। सुरक्षा एजेंसियां समारोह के दौरान आने-जाने वाले लोगों और महत्वपूर्ण स्थानों पर विशेष नजर रखेंगी।
हर साल स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री का संबोधन देश के लिए महत्वपूर्ण संदेश लेकर आता है। सरकार की उपलब्धियों, देश के सामने मौजूद चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं को लेकर प्रधानमंत्री अपने विचार देशवासियों के सामने रखते हैं। इस बार संबोधन से पहले 'वंदे मातरम' की प्रस्तुति समारोह के ऐतिहासिक और देशभक्ति से जुड़े पक्ष को और प्रमुख बनाएगी।
इस तरह 15 अगस्त 2026 का स्वतंत्रता दिवस समारोह परंपरा के साथ एक नए बदलाव का गवाह बनेगा। एक ओर लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराने और प्रधानमंत्री के संबोधन की परंपरा जारी रहेगी, वहीं दूसरी ओर पहली बार संबोधन से पहले 'वंदे मातरम' की प्रस्तुति होगी। साथ ही युवा शक्ति को समारोह की थीम बनाकर देश के भविष्य में युवाओं की भूमिका पर जोर दिया जाएगा। कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच होने वाला यह समारोह देशभर में विशेष आकर्षण का केंद्र रहने की उम्मीद है।
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