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रूस से तेल पर अमेरिकी दबाव SJM ने बहिष्कार की अपील की

Ratna Netam
12 Aug 2026 5:28 PM IST
रूस से तेल पर अमेरिकी दबाव SJM ने बहिष्कार की अपील की
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नई दिल्ली : रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक सीमा शुल्क यानी टैरिफ लगाने की अमेरिकी पहल को लेकर भारत में विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच (SJM) ने अमेरिकी सीनेट की ओर से पारित किए गए नए विधेयक का कड़ा विरोध किया है। संगठन ने केंद्र सरकार से अमेरिका के दबाव के आगे नहीं झुकने और भारत के राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए अपने रुख पर कायम रहने की अपील की है।
स्वदेशी जागरण मंच ने कहा है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए किसी भी देश से कच्चा तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र है। संगठन का कहना है कि भारत जैसे संप्रभु देश के व्यापारिक और ऊर्जा संबंधी फैसलों पर किसी तीसरे देश को निर्देश देने का अधिकार नहीं होना चाहिए। SJM ने अमेरिकी कदम को आर्थिक दबाव की राजनीति बताते हुए इसकी आलोचना की है।
स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्वनी महाजन ने बयान जारी कर कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, तेल की उपलब्धता और आम नागरिकों के हितों को ध्यान में रखकर रूस से कच्चा तेल खरीदने का फैसला किया गया है। उनके मुताबिक यह भारत का संप्रभु अधिकार है और किसी बाहरी शक्ति को इस फैसले को नियंत्रित करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
अश्वनी महाजन ने कहा कि यदि अमेरिका के रूस के साथ राजनीतिक या रणनीतिक मतभेद हैं तो वह अपनी विदेश नीति के अनुसार फैसले लेने के लिए स्वतंत्र है। लेकिन इन मतभेदों के चलते भारत जैसे दूसरे संप्रभु देशों पर आर्थिक प्रतिबंध या भारी टैरिफ लगाने का दबाव बनाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम वैश्विक व्यापार व्यवस्था और देशों के बीच समानता के सिद्धांत पर सवाल खड़े करते हैं।
SJM ने भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता का भी जिक्र किया। संगठन का कहना है कि दोनों देशों के बीच किसी भी व्यापार समझौते का आधार आपसी सम्मान और बराबरी होना चाहिए। अश्वनी महाजन ने स्पष्ट किया कि व्यापार समझौता दबाव या धमकी के माहौल में नहीं किया जा सकता। भारत के हितों को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी शर्त को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
दरअसल, अमेरिकी सीनेट ने हाल ही में रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल या गैस खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की व्यवस्था से संबंधित विधेयक को 86-11 के भारी बहुमत से पारित किया है। इस प्रस्ताव के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को ऐसे देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार दिए जाने की बात सामने आई है। इस पहल को लेकर भारत में राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
स्वदेशी जागरण मंच ने अमेरिकी विधेयक में भारत और चीन समेत कुछ देशों को निशाना बनाए जाने पर भी सवाल उठाया है। संगठन ने आरोप लगाया कि एक ओर रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर कुछ देशों पर दबाव बनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ यूरोपीय देश अब भी रूसी गैस का आयात कर रहे हैं। SJM ने इसे अमेरिकी नीति का दोहरा रवैया बताते हुए इसकी आलोचना की है।
संगठन ने देश की जनता से अमेरिकी कंपनियों के उत्पादों और सेवाओं के बहिष्कार पर भी विचार करने की अपील की है। SJM का कहना है कि यदि भारत पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जाता है तो देश को भी अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए वैकल्पिक कदम उठाने चाहिए। संगठन ने सरकार से अमेरिकी टेक्नोलॉजी और सोशल मीडिया क्षेत्र की बड़ी कंपनियों के खिलाफ एकतरफा प्रतिबंध जैसे कड़े विकल्पों पर भी विचार करने की मांग की है।
इसके अलावा स्वदेशी जागरण मंच ने ई-कॉमर्स क्षेत्र में विदेशी निवेश यानी FDI से जुड़े नियमों की भी समीक्षा करने की मांग उठाई है। संगठन का तर्क है कि भारत को अपनी घरेलू कंपनियों, छोटे कारोबारियों और स्थानीय उद्योगों को मजबूत करने के लिए ऐसी आर्थिक नीतियां अपनानी चाहिए, जिससे विदेशी दबाव का असर कम किया जा सके।
SJM ने केंद्र सरकार से कहा है कि भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक संप्रभुता के मुद्दे पर स्पष्ट एवं दृढ़ नीति अपनानी चाहिए। संगठन के मुताबिक रूस से तेल खरीद का फैसला केवल व्यापार से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध भारत की ऊर्जा जरूरतों, महंगाई और आम उपभोक्ताओं के हितों से भी है।
अमेरिकी प्रस्ताव पर भारत सरकार की ओर से आगे क्या रणनीति अपनाई जाती है, इस पर अब सभी की नजर है। फिलहाल स्वदेशी जागरण मंच ने साफ संकेत दिया है कि वह अमेरिकी टैरिफ दबाव के खिलाफ देश में आर्थिक और स्वदेशी अभियान को तेज करने के पक्ष में है।
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